देहरादून में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण यानी एमडीडीए ने अवैध निर्माण और बिना अनुमति संचालित गतिविधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डोईवाला क्षेत्र के ग्राम कण्डोगल कुडियाल (थानों) स्थित एक मस्जिद और मदरसा भवन को सील कर दिया। प्राधिकरण का कहना है कि संबंधित भवन में बिना वैधानिक अनुमति धार्मिक और शैक्षणिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। कई नोटिस, सुनवाई और अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद प्रशासन ने 01 जून 2026 को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में भवन को सील कर दिया।

इस कार्रवाई के बाद इलाके में चर्चा का माहौल बन गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक पूरी कार्रवाई उत्तराखण्ड नगर एवं ग्राम नियोजन तथा विकास अधिनियम, 1973 के तहत की गई है और इसमें सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। एमडीडीए ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी समुदाय विशेष को लक्ष्य बनाकर नहीं, बल्कि नियमों के समान पालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
बिना अनुमति चल रहा था मस्जिद और मदरसा
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार जांच में पाया गया कि भवन के प्रथम और द्वितीय तल पर मस्जिद संचालित की जा रही थी, जबकि परिसर में मदरसा भी चल रहा था। प्राधिकरण का कहना है कि इन गतिविधियों के लिए आवश्यक विभागीय स्वीकृतियां और पंजीकरण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जांच के दौरान उत्तराखण्ड वक्फ बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता और पंजीकरण सहित कई महत्वपूर्ण अभिलेख मांगे गए थे।
प्राधिकरण के अनुसार संबंधित पक्ष को नियमों के अनुसार बार-बार नोटिस जारी किए गए और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया। इसके बावजूद निर्धारित समयसीमा के भीतर अपेक्षित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए।
पहले भी हो चुकी थी सीलिंग की कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक इस भवन के खिलाफ इससे पहले भी कार्रवाई की जा चुकी थी। एमडीडीए ने 17 दिसंबर 2025 को भवन के प्रथम तल को सील किया था। इसके बाद जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की ओर से प्राधिकरण को पत्र भेजा गया था, जिसमें इमामों के आवास की व्यवस्था का हवाला देते हुए अतिरिक्त समय मांगा गया था।

एमडीडीए ने मानवीय आधार पर राहत देते हुए सीमित समय की मोहलत दी और संबंधित पक्ष को सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कराने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई के लिए 7 जनवरी 2026 और 11 फरवरी 2026 की तारीखें तय की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि सुनवाई के दौरान भी अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
निरीक्षण में जारी मिला मदरसे का संचालन
एमडीडीए अधिकारियों के अनुसार बाद में किए गए निरीक्षण के दौरान परिसर में मदरसे का संचालन जारी पाया गया। इसे नियमों का गंभीर उल्लंघन माना गया। अधिकारियों ने कहा कि बार-बार नोटिस, सुनवाई और समय देने के बावजूद वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, जिसके बाद कार्रवाई अपरिहार्य हो गई।
01 जून 2026 को प्रशासनिक टीम और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूरे चालानशुदा अवैध निर्माण को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
भारी पुलिस बल की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
सीलिंग कार्रवाई के दौरान एमडीडीए के सहायक अभियंता प्रमोद मेहरा, अवर अभियंता दीपक नौटियाल, सुपरवाइजर, नायब तहसीलदार डोईवाला राजेन्द्र सिंह रावत और रानीपोखरी थाना पुलिस मौके पर मौजूद रही। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया था।
अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और क्षेत्र में किसी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं हुई। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
एमडीडीए ने क्या कहा?

एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसी संस्था या समुदाय विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य, संस्थान संचालन या भूमि उपयोग परिवर्तन निर्धारित नियमों और वैधानिक स्वीकृतियों के अनुरूप होना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष को कई अवसर दिए गए, नोटिस जारी किए गए और मानवीय आधार पर अतिरिक्त समय भी प्रदान किया गया। लेकिन निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। ऐसे में अधिनियम के तहत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया।
एमडीडीए सचिव मोहन सिंह बर्निया ने भी कहा कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया गया था। आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया, लेकिन नियमों का पालन नहीं किया गया। निरीक्षण में उल्लंघन पाए जाने के बाद भवन को सील करने की कार्रवाई की गई।
अवैध निर्माणों पर तेज हुआ अभियान
पिछले कुछ महीनों में एमडीडीए ने देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज किया है। प्राधिकरण लगातार बिना अनुमति बनाए गए भवनों, व्यावसायिक गतिविधियों और अनधिकृत संस्थानों पर कार्रवाई कर रहा है। प्रशासन का कहना है कि धार्मिक, शैक्षणिक, व्यावसायिक और आवासीय संस्थानों के लिए समान नियम लागू हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तेजी से बढ़ते अनधिकृत निर्माणों को रोकने के लिए प्रशासन अब सख्त रणनीति अपना रहा है। इससे आने वाले समय में अन्य क्षेत्रों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।
क्षेत्र में बढ़ी चर्चा और राजनीतिक हलचल
इस कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कुछ लोग इसे कानून के समान पालन की दिशा में प्रशासन का सख्त कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे संवेदनशील मामला मान रहे हैं। हालांकि प्रशासन लगातार यह स्पष्ट कर रहा है कि कार्रवाई केवल वैधानिक नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रखा गया है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बन सकता है।
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