उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से 24 वर्षीय महिला ट्रैकर बबीता के लापता होने की घटना ने पूरे उत्तराखंड में चिंता बढ़ा दी है। पहाड़ों की खूबसूरती के बीच शुरू हुआ यह ट्रेक अब एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में बदल चुका है। बीते कई दिनों से प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, वन विभाग और स्थानीय टीमें लगातार युवती की तलाश में जुटी हुई हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है। दुर्गम पहाड़ी रास्ते, घने जंगल और लगातार बदलता मौसम राहत कार्य में बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस घटना के बाद ट्रेकिंग सुरक्षा व्यवस्था और पर्वतीय इलाकों में निगरानी तंत्र को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
दयारा बुग्याल ट्रेक पर कैसे लापता हुई बबीता
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प्राप्त जानकारी के अनुसार 24 वर्षीय बबीता 29 मई को अपने दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक के लिए रवाना हुई थीं। ट्रेकिंग दल 30 मई को “गोई” नामक कैंपिंग पॉइंट पर रुका था। साथियों के अनुसार रात के समय बबीता टेंट से बाहर निकली थीं, लेकिन उसके बाद वह वापस नहीं लौटीं। काफी देर तक इंतजार और आसपास तलाश करने के बाद जब उनका कोई पता नहीं चला तो प्रशासन और स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही प्रशासन ने तत्काल सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
बताया जा रहा है कि जिस क्षेत्र में ट्रेकिंग चल रही थी, वहां मोबाइल नेटवर्क बेहद सीमित है और कई हिस्से घने जंगलों व गहरी ढलानों से घिरे हुए हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति के रास्ता भटकने पर खोज अभियान बेहद कठिन हो जाता है। यही वजह है कि रेस्क्यू टीमों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
युद्धस्तर पर चलाया जा रहा सर्च ऑपरेशन

दयारा बुग्याल ट्रेकिंग रूट से लापता हुई महिला की तलाश अब युद्धस्तर पर जारी है। घने जंगलों और दयारा ट्रैक मार्ग के कठिन इलाकों में SDRF, NDRF, ITBP, पुलिस और आपदा प्रबंधन की QRT टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। कई टीमों को अलग-अलग दिशाओं में भेजा गया है ताकि हर संभावित क्षेत्र की गहन जांच की जा सके।
प्रशासन के अनुसार गोई कैंप से रैथल की तरफ लगभग 5-5 किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग क्षेत्रों को खंगाला गया है। रेस्क्यू टीमें पहाड़ी ढलानों, जंगलों, ट्रेकिंग रूट और संभावित जोखिम वाले इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मौसम खराब होने और धुंध बढ़ने के बावजूद अभियान को लगातार जारी रखा गया है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य लगातार कर रहे मॉनिटरिंग
उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं रेस्क्यू ऑपरेशन की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने आपदा स्मार्ट कंट्रोल रूम पहुंचकर अभियान की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान अधिकारियों ने उन्हें अब तक किए गए राहत एवं बचाव कार्य, तैनात टीमों, उपयोग किए जा रहे संसाधनों और क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

जिलाधिकारी ने खोज दलों को पूरी तत्परता और तेजी के साथ महिला ट्रेकर की तलाश करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित सुराग पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और अभियान में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ लगातार कार्य करें ताकि सर्च ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
ITBP और आर्मी की मदद लेने के निर्देश
प्रशांत आर्य ने रेस्क्यू अभियान को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आईटीबीपी और भारतीय सेना की सहायता लेने के निर्देश भी दिए हैं। प्रशासन का मानना है कि हाई-एल्टीट्यूड और कठिन पहाड़ी इलाकों में प्रशिक्षित जवानों की मदद से सर्च ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की लगातार मॉनिटरिंग की जाए और हर गतिविधि की नियमित रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन अब तकनीकी संसाधनों और अतिरिक्त विशेषज्ञ टीमों को भी अभियान में शामिल करने पर विचार कर रहा है।
दयारा बुग्याल ट्रेक क्यों माना जाता है चुनौतीपूर्ण
दयारा बुग्याल उत्तरकाशी जिले का बेहद लोकप्रिय ट्रेकिंग डेस्टिनेशन माना जाता है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घास के विशाल मैदानों और हिमालयी दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक और ट्रैकर्स यहां पहुंचते हैं।
हालांकि यह ट्रेक जितना खूबसूरत माना जाता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। अचानक मौसम बदल जाना, रात में तापमान का तेजी से गिरना, घने जंगल और सीमित नेटवर्क जैसी परिस्थितियां ट्रैकर्स के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी होता है।
ट्रेकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर उठने लगे सवाल
इस घटना के बाद पर्वतीय ट्रेकिंग क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रैकर्स को समूह से अलग नहीं होना चाहिए और रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचना चाहिए। इसके अलावा GPS ट्रैकिंग डिवाइस, इमरजेंसी लोकेटर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे आधुनिक संसाधनों का उपयोग बढ़ाने की जरूरत है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दयारा बुग्याल क्षेत्र में कई ऐसे हिस्से हैं जहां मौसम अचानक खराब हो जाता है और विजिबिलिटी बेहद कम हो जाती है। ऐसे में किसी व्यक्ति को ढूंढना बेहद कठिन हो जाता है। यही कारण है कि प्रशासन अब हर संभावित एंगल से जांच और सर्च अभियान चला रहा है।
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पूरे उत्तराखंड की नजरें रेस्क्यू अभियान पर
फिलहाल उत्तरकाशी प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार अभियान में जुटी हुई हैं। बबीता के परिवार की उम्मीदें अब इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हुई हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी संभावित सुराग को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और हर दिशा में खोजबीन जारी है।

पहाड़ों के कठिन भूगोल और चुनौतीपूर्ण मौसम के बीच चल रहा यह अभियान अब समय के खिलाफ एक बड़ी जंग बन चुका है। पूरे उत्तराखंड की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आखिर लापता ट्रेकर बबीता का कोई सुराग कब तक मिल पाता है।
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