उत्तराखंड के चम्पावत जिले में आयोजित ऐतिहासिक श्री रीठा साहिब गुरुद्वारा जोड़ मेले के दौरान रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। लगातार हो रही बारिश के बीच अचानक उफनाई नदी में 50 से अधिक श्रद्धालु बीच धारा में फंस गए, जिसके बाद मौके पर तैनात एसडीआरएफ उत्तराखण्ड की टीम ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। तेज बहाव, बढ़ते जलस्तर और अफरा-तफरी के माहौल के बीच चलाया गया यह रेस्क्यू ऑपरेशन अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।
चम्पावत के रीठा साहिब क्षेत्र में हर वर्ष आयोजित होने वाला जोड़ मेला हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड सहित देश के कई राज्यों से गुरुद्वारा साहिब के दर्शन और संगम क्षेत्र में स्नान के लिए पहुंचे थे। लेकिन मौसम ने अचानक करवट बदल ली और कुछ ही देर की तेज बारिश ने पूरे इलाके की स्थिति बदल दी। लदिया और रतिया नदियों के संगम क्षेत्र स्थित कुंड में स्नान कर रहे श्रद्धालु अचानक बढ़े जलस्तर के कारण बीच नदी में फंस गए। नदी का बहाव इतना तेज हो गया कि वहां खड़े कई वाहन भी पानी में फंस गए और मौके पर भगदड़ जैसे हालात बनने लगे।

रीठा साहिब जोड़ मेले में SDRF की सतर्कता बनी जीवनरक्षक
हालांकि इस बार सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि एसडीआरएफ उत्तराखण्ड ने पहले से ही मौसम और भीड़ के जोखिम को देखते हुए मेले में अपनी टीम की अग्रिम तैनाती कर रखी थी। यही रणनीति संभावित त्रासदी को टालने में सबसे बड़ा कारण बनी। सेनानायक एसडीआरएफ उत्तराखण्ड श्री अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर पहले से मौजूद टीम ने बिना समय गंवाए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।
उप निरीक्षक दीपक सामंत के नेतृत्व में एसडीआरएफ जवान तेजी से घटनास्थल पर पहुंचे और नदी के बीच फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। लगातार बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बावजूद जवानों ने धैर्य, साहस और पेशेवर दक्षता का शानदार परिचय दिया। टीम ने एक-एक कर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित नदी पार कराया। कई बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी इस दौरान बीच पानी में फंसे हुए थे, जिन्हें जवानों ने मानवीय श्रृंखला और सुरक्षा उपकरणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान नदी क्षेत्र में फंसे वाहनों को भी बाहर निकालने में सहायता दी गई। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार यदि एसडीआरएफ टीम पहले से तैनात न होती तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे। अचानक बढ़े जलस्तर ने कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र को जोखिम क्षेत्र में बदल दिया था। ऐसे में समय रहते शुरू किया गया रेस्क्यू अभियान कई परिवारों के लिए जीवनदान साबित हुआ।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और ट्रैफिक पुलिस भी सक्रिय हो गई। प्रशासन ने तत्काल दोनों ओर बैरियर लगाकर लोगों की आवाजाही नियंत्रित की और श्रद्धालुओं को नदी क्षेत्र की ओर जाने से रोक दिया। एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के कारण स्थिति को जल्द नियंत्रण में ले लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्यों में आपदा प्रबंधन एजेंसियों की तैयारी कितनी महत्वपूर्ण होती है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में अचानक बादल फटने, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। ऐसे में धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर पहले से आपदा राहत बलों की तैनाती अब प्रशासनिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है।
एसडीआरएफ सेनानायक श्री अर्पण यदुवंशी ने घटना के बाद टीम की सराहना करते हुए कहा कि संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए अग्रिम तैनाती का उद्देश्य ही ऐसी आपात स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना था। उन्होंने कहा कि टीम ने जिस प्रकार साहस और सतर्कता के साथ कार्य किया, वह सराहनीय है। उन्होंने प्रदेश में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सभी एसडीआरएफ इकाइयों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश भी जारी किए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून और प्री-मानसून सीजन में पहाड़ी क्षेत्रों की नदियां कुछ ही मिनटों में उफान पर आ सकती हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी और चेतावनियों का पालन करना बेहद जरूरी हो जाता है। धार्मिक मेलों और पर्यटन स्थलों पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों को नदी किनारों और जलधाराओं के पास अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
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रीठा साहिब जोड़ मेले की यह घटना सिर्फ एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी नहीं है, बल्कि यह समय पर तैयारी, त्वरित निर्णय और प्रशिक्षित आपदा बल की अहमियत का भी बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। जिस तरह एसडीआरएफ जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दर्जनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, उसने एक बार फिर उत्तराखंड पुलिस और आपदा राहत बलों पर लोगों का भरोसा मजबूत किया है।
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