देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ने रविवार को भारतीय संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और महिला सशक्तिकरण का ऐसा अद्भुत संगम देखा, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। शहर में आयोजित मैंगो फेस्ट के दौरान 150 महिलाओं ने एक साथ पारंपरिक तरीके से आम के अचार की मिक्सिंग कर मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड बनाने का सफल प्रयास किया। इस ऐतिहासिक पहल ने न केवल भारतीय रसोई की सदियों पुरानी विरासत को सम्मान दिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि हमारी परंपराएं आज भी लोगों को एकजुट करने की ताकत रखती हैं।
आम तौर पर घर की रसोई तक सीमित रहने वाली अचार बनाने की परंपरा जब एक सार्वजनिक मंच पर 150 महिलाओं की सामूहिक भागीदारी के साथ सामने आई, तो यह आयोजन केवल एक रिकॉर्ड प्रयास नहीं रहा, बल्कि भारतीय खाद्य संस्कृति के संरक्षण का उत्सव बन गया।
150 महिलाओं की भागीदारी बनी आयोजन की सबसे बड़ी ताकत

कार्यक्रम का सबसे यादगार क्षण वह था, जब पारंपरिक परिधानों में सजी 150 महिलाओं ने एक साथ बड़े पात्रों में आम, मसालों और तेल को मिलाकर मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की। पूरे परिसर में तालियों की गूंज, उत्साह और भारतीय संस्कृति की झलक साफ दिखाई दे रही थी।
इस रिकॉर्ड प्रयास के दौरान स्वच्छता, पारंपरिक विधियों और गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा गया। आयोजकों ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि भारतीय रसोई की उस विरासत को सम्मान देना था, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी परिवारों के माध्यम से आगे बढ़ती आई है।
भारतीय संस्कृति और स्वाद का बना भव्य उत्सव
इस विशेष आयोजन का संचालन तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट और सोलफिट वैलनेस द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रोटरी क्लब देहरादून सेंट्रल और दीप्स किचन सहयोगी साझेदार रहे, जबकि गोल्डी ग्रुप ने विशेष सहयोग प्रदान किया।
आयोजकों का कहना था कि बदलती जीवनशैली में पारंपरिक भोजन और घरेलू रेसिपियों का महत्व लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे समय में मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड जैसे आयोजन युवाओं को भारतीय भोजन की जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।
पारंपरिक थाली प्रतियोगिता ने भी जीता दिल
मैंगो फेस्ट में आयोजित पारंपरिक थाली प्रतियोगिता आयोजन का दूसरा सबसे बड़ा आकर्षण रही। इसमें 25 महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजन तैयार कर प्रस्तुत किए।
प्रतिभागियों ने उत्तराखंड, उत्तर भारत और विभिन्न क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को आकर्षक ढंग से सजाया। भोजन की प्रस्तुति, स्वाद, पौष्टिकता और भारतीय संस्कृति की झलक ने निर्णायकों को प्रभावित किया।
यह प्रतियोगिता केवल स्वाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारतीय खान-पान की विविधता और समृद्ध विरासत का जीवंत प्रदर्शन भी बनी।
मुख्य अतिथि ने कहा— मां के हाथों के खाने का स्वाद सबसे अनमोल
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हयात रीजेंसी के हेड शेफ शेफ सौगातो ने प्रतियोगिता में तैयार व्यंजनों का स्वाद चखा और प्रतिभागियों की सराहना की।
उन्होंने कहा,
“मां के हाथों के खाने का स्वाद दुनिया के किसी भी बड़े होटल से कहीं बेहतर होता है। भारतीय रसोई हमारी सबसे बड़ी विरासत है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है।”
उनका यह संदेश पूरे आयोजन की भावना को और अधिक मजबूत करता नजर आया।
अनुभवी निर्णायकों ने किया मूल्यांकन
पारंपरिक थाली प्रतियोगिता का मूल्यांकन अनुभवी निर्णायक मंडल ने किया। इसमें शामिल रहे—
- एडवोकेट अंजना साहनी
- शेफ लता कपूर
- अमित मनोचा
- पारुल अग्रवाल
कार्यक्रम में अति विशिष्ट अतिथि रचना पांधी ने भी शिरकत की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं को जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजन समय की आवश्यकता हैं और समाज को इससे सकारात्मक प्रेरणा मिलती है।
“मां की बरनी” पुस्तक का हुआ विमोचन

आयोजन के दौरान दीपा चावला द्वारा लिखित पुस्तक “मां की बरनी” का लोकार्पण भी किया गया।
यह पुस्तक भारतीय अचारों की पारंपरिक रेसिपियों, उनके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को समर्पित है। पुस्तक का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय रसोई की उन परंपराओं से जोड़ना है, जो समय के साथ धीरे-धीरे कम होती जा रही हैं।
आयोजकों ने बताया इस पहल का उद्देश्य
सोलफिट वैलनेस की संस्थापक रूपा शर्मा ने कहा कि मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड बनाना नहीं, बल्कि भारतीय भोजन की पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखना है।
उन्होंने कहा कि यदि हमारी पारंपरिक रेसिपियां और घरेलू ज्ञान अगली पीढ़ी तक नहीं पहुंचेगा, तो हमारी सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ जाएगी।
वहीं तेजस्विनी चैरिटेबल ट्रस्ट की अध्यक्ष प्रिया गुलाटी ने कहा कि 150 महिलाओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि महिलाएं जब किसी सामाजिक उद्देश्य के लिए एकजुट होती हैं, तो वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं।
महिला सशक्तिकरण का बना प्रेरक उदाहरण
इस आयोजन में बड़ी संख्या में गृहिणियों, महिला उद्यमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संस्थाओं से जुड़ी महिलाओं ने भाग लिया।

मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड ने यह साबित किया कि महिलाएं केवल परंपराओं की संरक्षक ही नहीं, बल्कि समाज को नई दिशा देने वाली शक्ति भी हैं। आयोजन ने महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक सहभागिता को एक नया मंच प्रदान किया।
सहयोगी संस्थाओं की रही अहम भूमिका
कार्यक्रम को सफल बनाने में कई संस्थाओं ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें—
- फूजी मीडिया (डिजिटल पार्टनर)
- वाओ डेकोरेटिव्स
- मर्तबान
- खास हमारे पास तुम्हारे
- एलएनएस ग्रुप
- गोल्डी ग्रुप
- रोटरी क्लब देहरादून सेंट्रल
- दीप्स किचन
सभी सहयोगी संस्थाओं ने आयोजन की तैयारियों से लेकर सफल संचालन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को मिला नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि स्थानीय खाद्य विरासत, महिला उद्यमिता और पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में ऐसे प्रयास महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
यदि भविष्य में इस प्रकार के आयोजन नियमित रूप से किए जाते हैं, तो स्थानीय उत्पादों, जैविक खेती, घरेलू उद्योग और पारंपरिक व्यंजनों को भी नया बाजार मिल सकता है।
Highlights
- देहरादून में 150 महिलाओं ने एक साथ बनाया मैंगो पिकल मिक्सिंग रिकॉर्ड।
- मैंगो फेस्ट भारतीय संस्कृति और पारंपरिक खान-पान का उत्सव बना।
- 25 महिलाओं ने पारंपरिक थाली प्रतियोगिता में लिया भाग।
- “मां की बरनी” पुस्तक का हुआ लोकार्पण।
- महिला सशक्तिकरण और भारतीय खाद्य विरासत को मिला नया मंच।
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