देहरादून के विकास को नई दिशा: एमडीडीए बोर्ड बैठक में 41 प्रस्तावों को मिली सैद्धांतिक स्वीकृति, धौलास परियोजना को मिलेगा ₹50 करोड़ का संबल

देहरादून महायोजना 2041 की आपत्तियों की सुनवाई जल्द, पारदर्शिता पर जोर

देहरादून: राजधानी के नियोजित और संतुलित विकास को लेकर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने सोमवार को सचिवालय स्थित आयुक्त गढ़वाल मंडल कार्यालय में 112वीं बोर्ड बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता एमडीडीए बोर्ड के अध्यक्ष एवं आयुक्त गढ़वाल मंडल विनय शंकर पांडेय ने की, जबकि उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी और प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में लगभग 41 विकास से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तृत चर्चा हुई। इनमें ईको-रिज़ॉर्ट, होटल, आवासीय निर्माण, व्यावसायिक प्रोजेक्ट और मानचित्र स्वीकृति जैसे विषय प्रमुख रहे। इनमें से कई प्रस्तावों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई, जबकि कुछ मामलों को आगामी बैठक तक के लिए विचाराधीन रखा गया।


देहरादून महायोजना 2041 पर मंथन: आपत्तियों की निष्पक्ष सुनवाई

बैठक में देहरादून महायोजना 2041 (Draft Master Plan) से जुड़ी आपत्तियों और सुझावों पर विशेष चर्चा हुई। बोर्ड ने निर्णय लिया कि सभी प्राप्त आपत्तियों और अभ्यावेदनों की शीघ्र सुनवाई की जाएगी।
अध्यक्ष विनय शंकर पांडेय ने कहा कि महायोजना में पारदर्शिता और व्यवहारिकता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इंजीनियर्स एवं आर्किटेक्ट्स एसोसिएशन द्वारा उठाए गए भौगोलिक असंतुलन के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।


धौलास आवासीय परियोजना को मिले ₹50 करोड़, आधुनिक हाउसिंग को नया आयाम

बैठक का एक प्रमुख निर्णय रहा — धौलास आवासीय परियोजना के अवशेष कार्यों को पूरा करने के लिए हुडको से ₹50 करोड़ ऋण लेने की स्वीकृति। शासन द्वारा प्रस्ताव को सशर्त मंजूरी दी गई है। परियोजना की संशोधित लागत ₹102.74 करोड़ तय की गई है।
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने बताया कि ऋण स्वीकृति के बाद अब परियोजना को तेजी से पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा, “धौलास परियोजना देहरादून को आधुनिक आवासीय सुविधाओं के नए स्तर तक पहुंचाएगी और राजधानी की हाउसिंग व्यवस्था में सुधार लाएगी।”


पारदर्शी और जनहितकारी विकास पर जोर

अध्यक्ष विनय शंकर पांडेय ने कहा कि देहरादून का नियोजित और पारदर्शी विकास एमडीडीए की प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के विकास में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनहित सर्वोपरि रहेंगे।
“महायोजना-2041 देहरादून को एक सस्टेनेबल अर्बन मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी,” उन्होंने कहा।


नागरिक सहभागिता को बढ़ावा: ऑनलाइन प्रक्रिया पर बल

बैठक में निर्णय लिया गया कि विकास योजनाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा।
साथ ही, आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया। इससे आम नागरिकों को सुविधा और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित की जा सकेगी।


बैठक में शामिल रहे प्रमुख अधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त सचिव वित्त विजय कुमार, एडीएम कृष्ण कुमार मिश्र, संयुक्त सचिव आवास धीरेन्द्र कुमार सिंह, नगर निगम उपनगर अधिकारी संतोष कुमार पांडेय, मुख्य नगर नियोजक एस.एम. श्रीवास्तव, सचिव एमडीडीए मोहन सिंह बर्निया, संयुक्त सचिव गौरव चटवाल, वित्त नियंत्रक संजय कुमार सिंह, मुख्य अभियंता एच.सी.एस. राणा, अधिशासी अभियंता सुनील कुमार तथा सहायक अभियंता अजय कुमार मलिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के अंत में अध्यक्ष विनय शंकर पांडेय ने सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “बोर्ड द्वारा लिए गए निर्णय राजधानी देहरादून के हरित, संतुलित और योजनाबद्ध विकास की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होंगे।”

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