उत्तराखंड की राजनीति और सैन्य परंपरा से जुड़ा एक बड़ा अध्याय अब इतिहास बन चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में बड़ा निर्णय लेते हुए 20 मई को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। खंडूड़ी की अंतिम यात्रा और अंत्येष्टि पुलिस सम्मान के साथ सम्पन्न होगी, जबकि पूरे उत्तराखंड में तीन दिनों का राजकीय शोक भी घोषित किया गया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
मे.ज. (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी के सम्मान में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित
उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार 19 मई से 21 मई तक पूरे प्रदेश में राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान सभी सरकारी भवनों और कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तीन दिनों के दौरान कोई भी शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा। शासन स्तर पर सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सरकारी मशीनरी अब अंतिम संस्कार कार्यक्रम की तैयारियों में जुट गई है, जहां सैन्य और पुलिस सम्मान के साथ खंडूड़ी को अंतिम विदाई दी जाएगी।
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि अनुशासन, ईमानदारी और साफ प्रशासनिक छवि के प्रतीक माने जाते थे। भारतीय सेना में लंबी सेवा देने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और उत्तराखंड की राजनीति को नई दिशा देने का प्रयास किया। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में केंद्रीय मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल भी काफी चर्चित रहा। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने विकास, पारदर्शिता और प्रशासनिक सख्ती को प्राथमिकता दी थी। यही कारण है कि उनके निधन को केवल एक राजनीतिक क्षति नहीं बल्कि उत्तराखंड के सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।

राज्यभर में भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और पूर्व सैनिक समुदाय के बीच गहरा दुख देखा जा रहा है। देहरादून से लेकर पौड़ी, श्रीनगर, अल्मोड़ा, हरिद्वार और कुमाऊं क्षेत्र तक लगातार श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की जा रही हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग खंडूड़ी के पुराने भाषण, सैन्य जीवन और राजनीतिक कार्यकाल को याद कर रहे हैं। कई लोगों ने उन्हें “ईमानदार राजनीति का चेहरा” बताते हुए श्रद्धांजलि दी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने शोक संदेश में कहा कि मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी ने सेना से लेकर राजनीति तक हर क्षेत्र में अनुशासन, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोच्च रखा। धामी ने यह भी कहा कि राज्य सरकार उनके सम्मान में सभी राजकीय परंपराओं का पालन करेगी और उनकी स्मृतियों को सदैव संजोकर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अंतिम संस्कार कार्यक्रम के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।
राजकीय शोक की घोषणा के बाद अब प्रदेशभर में सरकारी कार्यक्रमों का स्वरूप भी बदला हुआ नजर आएगा। कई विभागों ने अपने सांस्कृतिक और औपचारिक आयोजन स्थगित कर दिए हैं। स्कूलों, सरकारी दफ्तरों और कई सार्वजनिक संस्थानों में भी खंडूड़ी को श्रद्धांजलि देने की तैयारी चल रही है। 20 मई को सार्वजनिक अवकाश के कारण सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे, जबकि आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भुवन चंद्र खंडूड़ी का व्यक्तित्व उत्तराखंड की राजनीति में अलग पहचान रखता था। ऐसे समय में जब राजनीति पर लगातार आरोप लगते रहे, खंडूड़ी की छवि एक सख्त लेकिन साफ नेता की रही। सेना की पृष्ठभूमि होने के कारण उनके निर्णयों में अनुशासन और प्रशासनिक नियंत्रण स्पष्ट दिखाई देता था। यही वजह रही कि विपक्षी दलों के नेता भी व्यक्तिगत तौर पर उनका सम्मान करते थे।
खंडूड़ी के निधन के बाद पुराने राजनीतिक किस्से और उनकी प्रशासनिक शैली फिर चर्चा में आ गई है। मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था और कई बड़े फैसले लिए थे। उत्तराखंड के बुनियादी ढांचे, सड़क परियोजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को लेकर उनकी सोच को आज भी याद किया जाता है। कई वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विशेषज्ञ उन्हें उत्तराखंड के सबसे अनुशासित मुख्यमंत्रियों में गिनते हैं।
पूर्व सैनिक संगठनों में भी गहरा शोक देखा जा रहा है। सेना में उनकी सेवाओं को याद करते हुए कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने कहा कि खंडूड़ी उन चुनिंदा नेताओं में थे जिन्होंने वर्दी की गरिमा को राजनीति में भी कायम रखा। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों और राजनीतिक नेताओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल बीसी खंडूरी का निधन, सीएम धामी बोले- अपूरणीय क्षति
उत्तराखंड में तीन दिनों के राजकीय शोक और सार्वजनिक अवकाश की घोषणा ने यह साफ कर दिया है कि राज्य सरकार भुवन चंद्र खंडूड़ी को केवल पूर्व मुख्यमंत्री नहीं बल्कि एक राष्ट्रीय व्यक्तित्व के रूप में सम्मान दे रही है। आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक विरासत, प्रशासनिक फैसलों और सार्वजनिक जीवन में निभाई गई भूमिका को लेकर और भी चर्चाएं तेज होने की संभावना है। फिलहाल पूरा उत्तराखंड एक ऐसे नेता को अंतिम विदाई देने की तैयारी में है जिसकी पहचान सादगी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा से जुड़ी रही।
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