उत्तराखंड में UCC का बड़ा असर: विवाह पंजीकरण 67 से सीधे 1634 प्रतिदिन, 24 गुना उछाल

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में ऐतिहासिक फैसला, उत्तराखंड बना समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य

देहरादून। उत्तराखंड ने समान नागरिक संहिता लागू कर देश के सामने एक नीतिगत उदाहरण पेश किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड UCC लागू करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है। इस कानून के लागू होने के बाद राज्य में विवाह पंजीकरण को लेकर आम नागरिकों में अभूतपूर्व जागरूकता देखी जा रही है, जिसका सीधा असर आंकड़ों में नजर आ रहा है।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार, UCC लागू होने के बाद प्रतिदिन होने वाले विवाह पंजीकरण में 24 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। जहां पहले पुराने अधिनियम के तहत औसतन केवल 67 विवाह प्रतिदिन पंजीकृत होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 1634 प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

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🗳️ चुनावी वादा, नीतिगत निर्णय और क्रियान्वयन

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने का संकल्प लिया था। सत्ता में आने के बाद सरकार ने पहली ही कैबिनेट बैठक में इस दिशा में निर्णय लेकर स्पष्ट कर दिया कि यह केवल घोषणा नहीं, बल्कि ठोस नीति है। व्यापक जनमत संग्रह, विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं के बाद 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में UCC को लागू कर दिया गया।


⚖️ सामाजिक न्याय और समान अधिकारों की दिशा में कदम

उत्तराखंड UCC को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप एक बड़ा सामाजिक सुधार माना जा रहा है। इस कानून का उद्देश्य किसी भी धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान कानूनी संरक्षण प्रदान करना है।

यूसीसी के अंतर्गत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों को एक समान कानूनी ढांचे में लाया गया है। महिला और पुरुष दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु निर्धारित की गई है, वहीं सभी धर्मों में तलाक और पारिवारिक मामलों के लिए समान और सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इससे महिलाओं को बहुविवाह जैसी कुप्रथाओं से राहत मिली है।


उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण को लेकर बढ़ी जागरूकता।

📊 आंकड़े जो खुद कहानी कहते हैं

  • 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 (6 माह):
    3 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण
  • पुराना अधिनियम (2010–26 जनवरी 2025):
    कुल 3,30,064 विवाह पंजीकरण

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि उत्तराखंड UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण को लेकर जनता का भरोसा और सहभागिता दोनों बढ़ी हैं।


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🗣️ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा,

“उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करना राज्य सरकार का ऐतिहासिक और साहसिक निर्णय है। इसका उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार और सम्मान देना है। विवाह पंजीकरण में आई रिकॉर्ड वृद्धि यह दर्शाती है कि जनता ने इस कानून को सामाजिक सुधार के रूप में स्वीकार किया है।”


🇮🇳 देश के लिए उत्तराखंड मॉडल

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में उत्तराखंड UCC को एक नेशनल बेंचमार्क के रूप में देखा जा रहा है। कानून के सफल क्रियान्वयन और उसके प्रत्यक्ष प्रभावों ने यह संकेत दिया है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो बड़े सामाजिक सुधार भी जमीनी स्तर पर लागू किए जा सकते हैं। आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए उत्तराखंड का यह मॉडल मार्गदर्शक बन सकता है।

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