उत्तराखंड में SIR का 92% डिजिटाइजेशन पूरा, CEO ने दिए बड़े निर्देश

देहरादून | 29 जून 2026

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रदेशभर में 92 प्रतिशत से अधिक डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 99 प्रतिशत से अधिक गणना फॉर्म वितरित किए जा चुके हैं। इस प्रगति की समीक्षा सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सभी जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की।

बैठक में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन मतदाताओं को “अन कलेक्टेबल” (Un Collectable) श्रेणी में रखा गया है, उनका एक बार फिर से भौतिक सत्यापन किया जाए। साथ ही उन्होंने जिलाधिकारियों (DEO) और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) को ASD सूची (Absent, Shifted, Dead) की बूथवार स्वयं समीक्षा करने के निर्देश दिए।

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क्या है Special Intensive Revision (SIR)?

मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) निर्वाचन आयोग की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना होता है।

इस प्रक्रिया के दौरान—

  • नए मतदाताओं का पंजीकरण
  • मृत मतदाताओं के नाम हटाना
  • स्थानांतरित मतदाताओं का सत्यापन
  • दोहराव (Duplicate Entries) समाप्त करना
  • मतदान केंद्रों का पुनर्गठन

जैसे कार्य किए जाते हैं।

इस बार डिजिटाइजेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में मतदाता सूची अधिक सटीक और डिजिटल रूप से उपलब्ध हो सके।

CEO ने जिलों को दिए अहम निर्देश

उत्तराखंड SIR डिजिटाइजेशन

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कहा कि जिन जिलों में डिजिटाइजेशन लगभग पूरा हो चुका है, वे अब मतदान केंद्रों के पुनर्गठन (Polling Station Rationalization) की तैयारी शुरू करें।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि—

  • सभी लंबित फॉर्म का डिजिटाइजेशन जल्द पूरा किया जाए।
  • “Un Collectable” मतदाताओं का दोबारा सत्यापन किया जाए।
  • ASD सूची की व्यक्तिगत स्तर पर बूथवार समीक्षा की जाए।
  • किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने न पाए।

उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

किन जिलों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया?

समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के अधिकांश जिलों ने डिजिटाइजेशन कार्य में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

100 प्रतिशत डिजिटाइजेशन

  • अल्मोड़ा
  • चम्पावत

इन दोनों जिलों ने SIR गणना फॉर्म के डिजिटाइजेशन का कार्य पूरी तरह पूरा कर लिया है।

अन्य जिलों की प्रगति

  • बागेश्वर – 97%
  • पिथौरागढ़ – 97%
  • टिहरी गढ़वाल – 96%
  • उत्तरकाशी – 95%
  • चमोली – 94%
  • पौड़ी गढ़वाल – 94%
  • रुद्रप्रयाग – 93%
  • नैनीताल – 91%
  • ऊधम सिंह नगर – 91%
  • देहरादून – 88%
  • हरिद्वार – 88%

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन आंकड़ों पर संतोष व्यक्त करते हुए सभी जिलों की टीमों को बधाई भी दी।

“Un Collectable” और ASD सूची पर क्यों है विशेष फोकस?

निर्वाचन आयोग के अनुसार “Un Collectable” श्रेणी में वे मतदाता आते हैं जिनसे संबंधित दस्तावेज या फॉर्म निर्धारित प्रक्रिया के दौरान प्राप्त नहीं हो सके।

वहीं ASD सूची में सामान्यतः ऐसे मतदाता शामिल होते हैं जो—

  • अनुपस्थित (Absent)
  • स्थानांतरित (Shifted)
  • मृत (Dead)

पाए जाते हैं।

यदि इन सूचियों का सही सत्यापन नहीं किया जाता तो मतदाता सूची की शुद्धता प्रभावित हो सकती है। इसलिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इन दोनों श्रेणियों की विशेष समीक्षा के निर्देश दिए हैं।

डिजिटाइजेशन से क्या होगा फायदा?

मतदाता सूची के डिजिटल होने से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे—

  • मतदाता डेटा अधिक सुरक्षित रहेगा।
  • त्रुटियों की पहचान तेजी से होगी।
  • डुप्लीकेट नाम हटाने में आसानी होगी।
  • भविष्य के चुनावों की तैयारी अधिक पारदर्शी बनेगी।
  • मतदान केंद्रों की योजना बेहतर तरीके से बनाई जा सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल निर्वाचन प्रबंधन से चुनाव प्रक्रिया और अधिक विश्वसनीय एवं प्रभावी बनेगी।

निर्वाचन आयोग की प्राथमिकता

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बैठक में दोहराया कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल होना चाहिए और किसी भी अपात्र नाम को सूची में स्थान नहीं मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी निर्वाचन आयोग की समय-सीमा का पालन करते हुए लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।

समीक्षा बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?

वीडियो कॉन्फ्रेंस में—

  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम
  • संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का
  • उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी
  • सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास

सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

आगे क्या?

अब जिन जिलों में डिजिटाइजेशन लगभग पूरा हो चुका है, वहां मतदान केंद्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होगी। साथ ही “Un Collectable” और ASD सूची की पुनः समीक्षा कर अंतिम मतदाता सूची को और अधिक सटीक बनाने का कार्य तेज किया जाएगा।

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