उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार के बीच समन्वय के तहत कई वरिष्ठ IAS अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, जबकि कुछ अधिकारियों को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए मंजूरी दे दी गई है। इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की प्रशासनिक संरचना में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासतौर पर स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में आने वाले समय में व्यापक पुनर्संरचना की संभावना जताई जा रही है।
सेंथिल पांडियन को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी
उत्तराखंड कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी सेंथिल पांडियन को केंद्र सरकार में नई तैनाती मिल गई है। केंद्रीय प्रतिनियुक्ति में उनके कार्यकाल को दो वर्ष का विस्तार दिया गया है और अब उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव पेयजल की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। पेयजल और स्वच्छता से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार की कई बड़ी योजनाएं इस समय प्राथमिकता में हैं, ऐसे में सेंथिल पांडियन की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि ग्रामीण पेयजल योजनाओं, जल जीवन मिशन और राज्यों के साथ समन्वय की दिशा में उनका अनुभव केंद्र सरकार के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में काम करने का अनुभव उनके लिए नई भूमिका में एक मजबूत आधार माना जा रहा है।
सचिन कुर्वे जाएंगे केंद्र, उत्तराखंड में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव
वर्तमान में स्वास्थ्य, स्वास्थ्य शिक्षा एवं नागरिक उड्डयन विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ IAS अधिकारी सचिन कुर्वे को भी केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर भेजा जाएगा। DOPT के आदेश के तहत उन्हें पांच वर्ष की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली भेजे जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
सचिन कुर्वे का केंद्र जाना उत्तराखंड प्रशासन के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि वे राज्य के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से कई का संचालन कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग विशेष रूप से पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार की प्राथमिकता में रहा है। वहीं नागरिक उड्डयन विभाग चारधाम कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं के विस्तार के लिहाज से रणनीतिक महत्व रखता है।
अब उनके जाने के बाद इन विभागों में नए सचिवों की नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। शासन स्तर पर इसको लेकर मंथन शुरू हो चुका है और माना जा रहा है कि जल्द ही नई जिम्मेदारियों का वितरण किया जाएगा।
देहरादून के DM सविन बंसल और IAS वंदना को भी मिली NOC

राज्य सरकार ने देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल और IAS अधिकारी वंदना को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए NOC जारी कर दी है। दोनों अधिकारियों की आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें कुछ वर्षों के लिए केंद्र सरकार में जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।
सविन बंसल वर्तमान में देहरादून के जिलाधिकारी के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं और कई प्रशासनिक अभियानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। राजधानी जिले में उनकी कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। ऐसे में उनका केंद्र जाना राज्य प्रशासन के लिए एक और बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि दोनों अधिकारियों को केंद्र में तैनाती मिलती है तो उत्तराखंड कैडर के अधिकारियों की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति और मजबूत होगी। इससे राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों की विश्वसनीयता और प्रभाव भी बढ़ेगा।
PCS अधिकारियों को भी मिली नई जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने प्रशासनिक फेरबदल के तहत वरिष्ठ PCS अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां दी हैं। वरिष्ठ PCS अधिकारी अशोक जोशी को मुख्य विकास अधिकारी पौड़ी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पौड़ी जैसे महत्वपूर्ण जिले में विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अहम मानी जाएगी।
वहीं वरिष्ठ PCS अधिकारी गिरीश गुणवंत को RFC और संभागीय खाद्य आयुक्त गढ़वाल की जिम्मेदारी दी गई है। खाद्य वितरण और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की निगरानी के लिहाज से यह विभाग काफी संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सरकार ने अनुभवी अधिकारी को यह जिम्मेदारी देकर प्रशासनिक संतुलन साधने की कोशिश की है।
MSME विभाग में भी नई नियुक्ति
राज्य सरकार ने लंबे समय से खाली चल रहे MSME विभाग में भी नियुक्ति कर दी है। अब निदेशक उद्योग और MD SIDCUL सौरभ गहरवार को MSME विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उत्तराखंड में उद्योग और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए MSME विभाग बेहद अहम माना जाता है। विशेषकर छोटे उद्योगों, स्टार्टअप और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहन देने की दिशा में सरकार इस विभाग को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में यह नियुक्ति निवेश और औद्योगिक विकास के नजरिए से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दिवेश शासनी को अतिरिक्त जिम्मेदारी
CDO ऊधम सिंह नगर दिवेश शासनी को शासन ने अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी है। अब वे CDO के साथ-साथ UIRD यानी Institute Of Rural Development के अधिशासी निदेशक का कार्यभार भी संभालेंगे।
ग्रामीण विकास और पंचायती राज से जुड़े प्रशिक्षण एवं योजनाओं के संचालन में UIRD की बड़ी भूमिका रहती है। ऐसे में दिवेश शासनी को यह अतिरिक्त जिम्मेदारी देना सरकार की प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
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क्या संकेत दे रहा है यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल?
विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड सरकार आने वाले समय में प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सक्रिय तथा परिणाम आधारित बनाने की दिशा में काम कर रही है। केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय के लिए अनुभवी अधिकारियों को दिल्ली भेजना भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
दूसरी तरफ राज्य में कई महत्वपूर्ण विभागों में नई नियुक्तियों की संभावना ने नौकरशाही में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, उद्योग और ग्रामीण विकास जैसे विभागों में नए चेहरों की एंट्री देखने को मिल सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल नियमित प्रक्रिया नहीं बल्कि भविष्य की प्रशासनिक रणनीति का संकेत भी है। खासकर 2027 के राजनीतिक और विकासात्मक एजेंडे को ध्यान में रखते हुए सरकार अब प्रशासनिक मशीनरी को नए तरीके से व्यवस्थित करने में जुटी दिखाई दे रही है।
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