देहरादून का वही मंच…जहां कुछ देर पहले राज्य के मुख्यमंत्री मौजूद थे, वहीं कुछ ही समय बाद ऐसा विवाद खड़ा हुआ जिसने पूरे कार्यक्रम की दिशा बदल दी। सवाल अब और गंभीर हो गया है—क्या एक ही मंच पर मर्यादा और विवाद के बीच इतनी बड़ी दूरी हो सकती है?
11 अप्रैल 2026 को डीएवी (पीजी) कॉलेज, करनपुर परिसर में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में हरियाणवी गायक मासूम शर्मा की प्रस्तुति के दौरान कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया। खास बात यह है कि इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी शामिल हुए थे, लेकिन यह विवाद उस समय हुआ जब मुख्यमंत्री कार्यक्रम से निकल चुके थे।
सीएम की मौजूदगी के बाद बदला माहौल

कार्यक्रम की शुरुआत गरिमामय माहौल में हुई थी और पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में सब कुछ व्यवस्थित रहा। लेकिन उनके जाने के बाद मंच का माहौल अचानक बदल गया और इसी दौरान मासूम शर्मा की प्रस्तुति में कथित आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग हुआ।
यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया, क्योंकि अब यह सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक उपस्थिति के बाद हुई घटना के रूप में देखा जा रहा है।
शिकायत और मुकदमा—मामला पहुंचा थाने
12 अप्रैल 2026 को छात्र प्रतिनिधि प्रांचल नौनी द्वारा थाना डालनवाला में लिखित शिकायत दी गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि मासूम शर्मा ने सार्वजनिक मंच से अभद्र और अश्लील शब्दों का प्रयोग किया, जिससे उपस्थित छात्र-छात्राओं और आम लोगों की भावनाएं आहत हुईं।
इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मासूम शर्मा के खिलाफ मु0अ0सं0 63/2026 के तहत मामला दर्ज किया।
किन धाराओं में फंसे मासूम शर्मा
एफआईआर में मासूम शर्मा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 352, 79 और 351(3) लगाई गई हैं। ये धाराएं सार्वजनिक शांति भंग करने, आपत्तिजनक व्यवहार और आक्रामक गतिविधियों से जुड़ी हैं।

पुलिस के अनुसार, सूचना रात 11:16 बजे दर्ज की गई और घटना स्थल डीएवी कॉलेज करनपुर परिसर बताया गया है।
छात्रों में आक्रोश—कार्यक्रम की गरिमा पर सवाल
इस घटना के बाद छात्र संगठनों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। छात्रों का कहना है कि जिस मंच पर कुछ समय पहले पुष्कर सिंह धामी मौजूद थे, उसी मंच पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल होना बेहद चिंताजनक है।
छात्रों ने कहा कि मासूम शर्मा को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए थी और सार्वजनिक कार्यक्रम में इस तरह की प्रस्तुति नहीं देनी चाहिए थी।
पुलिस जांच—सच क्या है?
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और वीडियो फुटेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
फोकस इस बात पर है कि क्या मासूम शर्मा द्वारा कही गई बातें कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आती हैं या नहीं।
इमेज और सिस्टम—दोनों पर असर
यह मामला केवल मासूम शर्मा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे आयोजन तंत्र पर भी सवाल खड़े करता है। एक तरफ कलाकार की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ आयोजकों की भी जवाबदेही तय होती है।
अगर आरोप साबित होते हैं, तो मासूम शर्मा के करियर और पब्लिक इमेज पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
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क्या बनेगा यह मामला एक मिसाल?
अब यह केस एक टेस्ट केस बन चुका है—क्या सार्वजनिक मंच पर अभिव्यक्ति की सीमाएं तय होंगी? क्या भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों के लिए सख्त गाइडलाइंस बनेंगी?
अगर इस मामले में कड़ी कार्रवाई होती है, तो यह एक मजबूत संदेश होगा कि किसी भी मंच पर, किसी भी स्थिति में, मर्यादा से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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