कांवड़ मेला 2026 के दौरान उत्तराखंड राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए हाईटेक सुरक्षा रणनीति लागू की है। इसी क्रम में SDRF के सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने मेला क्षेत्र में तैनात टीमों का व्यापक स्थलीय निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली और रेस्क्यू, निगरानी तथा आपदा प्रबंधन तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और जवानों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा, त्वरित रेस्क्यू और मानवीय सेवा SDRF की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
कांवड़ मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु गंगा घाटों और प्रमुख मार्गों पर पहुंचते हैं। ऐसे में SDRF की भूमिका केवल रेस्क्यू तक सीमित नहीं है, बल्कि भीड़ प्रबंधन, नदी तट सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को प्रभावी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अर्पण यदुवंशी ने सुरक्षा तैयारियों की की व्यापक समीक्षा
मेला क्षेत्र के विभिन्न घाटों, संवेदनशील स्थलों और ड्यूटी प्वाइंट्स का निरीक्षण करते हुए अर्पण यदुवंशी ने रेस्क्यू उपकरणों, संचार प्रणाली, चिकित्सा सहायता, नदी तट सुरक्षा और आपदा प्रबंधन संसाधनों का जायजा लिया।
उन्होंने टीमों से सीधे संवाद कर उनकी परिचालन तैयारियों की जानकारी ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी टीमें 24×7 अलर्ट मोड में रहें। किसी भी आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय न्यूनतम रखा जाए और प्रत्येक संवेदनशील स्थल पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।
नभ नेत्र ड्रोन से हो रही रियल-टाइम निगरानी

कांवड़ मेला 2026 SDRF की सुरक्षा रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नभ नेत्र ड्रोन प्रणाली है। निरीक्षण के दौरान अर्पण यदुवंशी ने ड्रोन के माध्यम से मेला क्षेत्र, प्रमुख घाटों और संवेदनशील स्थानों की रियल-टाइम हवाई निगरानी व्यवस्था का अवलोकन किया।
ड्रोन तकनीक के माध्यम से निम्न गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है:
- श्रद्धालुओं की भीड़ का घनत्व
- नदी तटों की गतिविधियां
- संभावित जोखिम वाले क्षेत्र
- आपात स्थिति की शुरुआती पहचान
इस तकनीक के कारण SDRF को किसी भी संभावित खतरे की समय रहते जानकारी मिल रही है, जिससे रेस्क्यू और राहत कार्यों की गति तेज हुई है।
24 रेस्क्यू अभियान, 37 श्रद्धालुओं को सुरक्षित बचाया
कांवड़ मेला 2026 के दौरान SDRF ने अब तक 24 रेस्क्यू अभियान चलाए हैं, जिनके माध्यम से लगभग 37 कांवड़ यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया है।
ये अभियान नदी में तेज बहाव, फिसलन, भीड़ के दबाव और अन्य आपात परिस्थितियों के दौरान संचालित किए गए। अर्पण यदुवंशी ने कहा कि यह उपलब्धि SDRF के जवानों की सतर्कता, त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और पेशेवर दक्षता का प्रमाण है।
पिछले तीन वर्षों में 500 से अधिक श्रद्धालुओं की जान बची
SDRF का कांवड़ मेले में रेस्क्यू रिकॉर्ड लगातार मजबूत रहा है। पिछले तीन वर्षों के दौरान:
- 240 रेस्क्यू अभियान संचालित किए गए
- 500 से अधिक कांवड़ यात्रियों के जीवन की रक्षा की गई
यह रिकॉर्ड दर्शाता है कि SDRF ने बड़े धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण क्षमता विकसित की है।
जवानों को दिया सेवा और संवेदनशीलता का संदेश

अर्पण यदुवंशी ने कहा कि SDRF का दायित्व केवल दुर्घटनाओं और आपदाओं के समय रेस्क्यू तक सीमित नहीं है। उन्होंने अधिकारियों और जवानों को निर्देश दिया कि श्रद्धालुओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, उन्हें आवश्यक सहायता देना और मानवीय संवेदनाओं के साथ सेवा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी टीमों को अनुशासन, सतर्कता और समर्पण के साथ कार्य करने तथा प्रत्येक श्रद्धालु की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
सफल रेस्क्यू टीमों का किया उत्साहवर्धन
निरीक्षण के दौरान विभिन्न घाटों और ड्यूटी स्थलों पर सफल रेस्क्यू अभियानों में शामिल टीमों की सराहना की गई। अर्पण यदुवंशी ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी SDRF के जवानों द्वारा प्रदर्शित साहस, तत्परता और पेशेवर दक्षता संस्था की कार्यकुशलता और सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
उन्होंने सभी टीमों को भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते रहने के लिए प्रेरित किया।
श्रद्धालुओं के लिए सेवा शिविर भी बना सहारा
कांवड़ मेला 2026 के दौरान SDRF द्वारा संचालित सेवा शिविर का भी निरीक्षण किया गया। इस शिविर में श्रद्धालुओं को निःशुल्क:
- फल
- पेयजल
- प्राथमिक सहायता सामग्री
- अन्य आवश्यक सुविधाएं
उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अर्पण यदुवंशी ने स्वयं श्रद्धालुओं से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम जानी और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। यात्रियों ने SDRF द्वारा प्रदान की जा रही सेवाओं और सहयोग की सराहना की।
सुरक्षा, सेवा और समर्पण की हाईटेक रणनीति
SDRF उत्तराखंड “सुरक्षा, सेवा एवं समर्पण” के मूल मंत्र के साथ कांवड़ मेला 2026 में कार्य कर रही है। आधुनिक ड्रोन निगरानी, प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों की 24×7 तैनाती और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली के कारण मेला क्षेत्र के प्रत्येक संवेदनशील स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
अर्पण यदुवंशी ने स्पष्ट किया कि सभी टीमें पूर्णतः अलर्ट मोड पर हैं और किसी भी आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका उद्देश्य प्रत्येक श्रद्धालु की यात्रा को सुरक्षित, सुगम और सुखद बनाना है।
निरीक्षण के दौरान सहायक सेनानायक सुशील रावत, निरीक्षक कवीन्द्र सजवाण, उपनिरीक्षक पंकज खरोला, आशीष त्यागी, योगेन्द्र भण्डारी सहित SDRF के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी उपस्थित रहे।
कांवड़ मेला 2026 में SDRF की रणनीति स्पष्ट रूप से हाईटेक निगरानी, प्रशिक्षित रेस्क्यू बल और मानवीय सेवा पर आधारित है। अब तक के रेस्क्यू अभियान और सुरक्षा प्रबंधन यह संकेत देते हैं कि उत्तराखंड में इस वर्ष कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को पहले की तुलना में और अधिक संगठित, तकनीक-सक्षम और प्रभावी बनाया गया है।