देहरादून: मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन के तहत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने युवा प्रतिभाओं से सीधा संवाद करते हुए तकनीक, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, स्वरोजगार और विकसित उत्तराखंड को लेकर विद्यार्थियों के विचार सुने। मुख्यमंत्री आवास में आयोजित ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने अपने सवाल और सुझाव मुख्यमंत्री के सामने रखे। संवाद के दौरान उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने, फैक्ट्रियों के साथ सीधे समझौते कर आवश्यक ट्रेड की पहचान करने, उत्तराखंड की विशिष्ट वनस्पतियों से जुड़े उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने और पिरुल को रोजगार से जोड़ने जैसे विषय प्रमुख रहे। इसी क्रम में राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की घोषणा भी की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की नई सोच, बड़े सपने और आत्मविश्वास ही नए और विकसित उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार नए क्षेत्रों में आगे बढ़ें और राज्य के विकास में अपनी भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन में तकनीक और नवाचार पर संवाद

मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन के दौरान विद्यार्थियों ने ऐसे विषय उठाए जो आने वाले समय में शिक्षा और रोजगार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
कार्यक्रम में तकनीक, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने अपनी जिज्ञासा और विचार मुख्यमंत्री के सामने रखे।
मुख्यमंत्री ने युवा प्रतिभाओं के इन विचारों को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि नई सोच और नए प्रयोग ही विकसित उत्तराखंड की ताकत बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के सामने पारंपरिक रोजगार के अलावा तकनीक, नवाचार और नए व्यवसायों के क्षेत्र में भी आगे बढ़ने के अवसर हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता को पहचानकर भविष्य की जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।
यह संवाद इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि विद्यालय स्तर के विद्यार्थियों को सीधे राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखने का अवसर दिया गया।
उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण

कार्यक्रम में एक छात्र ने मुख्यमंत्री से उत्तराखंड में स्थापित हो रहे उद्योगों और फैक्ट्रियों के मद्देनजर युवाओं के कौशल विकास को लेकर सवाल किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देने की दिशा में काम कर रही है।
इसके लिए उद्योगों और फैक्ट्रियों के साथ सीधे समझौते किए जा रहे हैं। इन उद्योगों से यह जानकारी ली जा रही है कि उन्हें किन-किन ट्रेड और कौशल में प्रशिक्षित युवाओं की आवश्यकता है।
इसके बाद उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को संबंधित ट्रेड में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य दो स्तर पर लाभ पहुंचाना है।
पहला, प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं को उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण के बाद रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
दूसरा, राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
यानी कौशल प्रशिक्षण को केवल प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय उसे सीधे उद्योगों की वास्तविक मांग से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
फैक्ट्री की जरूरत पहले पता होगी, प्रशिक्षण बाद में
मुख्यमंत्री के बयान में कौशल विकास की एक महत्वपूर्ण दिशा सामने आती है। सामान्य तौर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पहले पाठ्यक्रम तय किया जाता है और बाद में रोजगार की संभावनाएं तलाश की जाती हैं।
लेकिन सरकार की बताई गई व्यवस्था में पहले उद्योगों से उनकी जरूरत पूछने और फिर उसी के अनुसार ट्रेड तथा कौशल की पहचान करने की बात कही गई है।
यदि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है तो प्रशिक्षण और रोजगार के बीच की दूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि उद्योगों के साथ किए जा रहे समझौते कितने प्रभावी ढंग से लागू होते हैं और प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के लिए रोजगार के अवसर किस स्तर पर उपलब्ध होते हैं।
युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाने पर जोर

स्वरोजगार को लेकर भी एक छात्र ने मुख्यमंत्री से सवाल किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी काम कर रही है।
इसके लिए स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और ब्रांडिंग से जोड़ने की बात कही गई।
उत्तराखंड जैसे राज्य में स्थानीय संसाधनों से जुड़े छोटे व्यवसाय, कृषि आधारित गतिविधियां, वन उत्पाद, पर्यटन, हस्तशिल्प और अन्य स्थानीय उत्पाद ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं।
ऐसे संसाधनों को बाजार से जोड़ने और उनके मूल्यवर्धन की दिशा में काम होने से युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भी नई सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
‘सगंध मिशन’ से उत्तराखंड की खुशबू पहुंचेगी वैश्विक बाजार
मुख्यमंत्री ने ‘सगंध मिशन’ का उल्लेख करते हुए बताया कि उत्तराखंड की जैव विविधता और यहां पाई जाने वाली विशिष्ट वनस्पतियों की खुशबू को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इन वनस्पतियों से सुगंधित उत्पाद और इत्र तैयार करने तथा उन्हें ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के माध्यम से देश और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इस पहल के पीछे स्थानीय संसाधनों का मूल्यवर्धन करने की सोच है।
उत्तराखंड में पाई जाने वाली वनस्पतियों और प्राकृतिक संसाधनों को यदि स्थानीय स्तर पर उत्पादों में बदला जाता है तो इससे केवल कच्चे संसाधन की बिक्री के बजाय तैयार उत्पाद के माध्यम से अधिक आर्थिक गतिविधियां पैदा करने की संभावना बन सकती है।
इसी प्रक्रिया में स्थानीय युवाओं के लिए उत्पादन, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और उद्यमिता से जुड़े अवसर भी विकसित हो सकते हैं।
पिरुल से रोजगार और स्वरोजगार की कोशिश
उत्तराखंड के जंगलों में बड़ी मात्रा में मिलने वाला पिरुल लंबे समय से पर्यावरण और वनाग्नि के संदर्भ में चर्चा का विषय रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पिरुल को भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है।
राज्य में पिरुल को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है और इसका उपयोग विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार करने में किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य पिरुल का बेहतर उपयोग करने के साथ स्थानीय लोगों के लिए आय के नए साधन तैयार करना है।
पिरुल के संग्रहण और उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने की संभावना है। इसके साथ ही जंगलों में उपलब्ध इस सामग्री को उपयोगी उत्पादों में बदलने की दिशा में काम किया जा सकता है।
हालांकि इस पहल का व्यापक प्रभाव संग्रहण व्यवस्था, प्रसंस्करण क्षमता, तैयार उत्पादों के बाजार और स्थानीय लोगों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करेगा।
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ में युवाओं ने पूछे भविष्य के सवाल
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन के तहत आयोजित ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यार्थियों और मुख्यमंत्री के बीच सीधा संवाद रहा।
छात्र-छात्राओं ने केवल शिक्षा से जुड़े सवाल ही नहीं पूछे, बल्कि तकनीक, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और विकसित उत्तराखंड को लेकर भी अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का जवाब दिया और उनके सुझावों को सुना।
इस तरह कार्यक्रम का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को संबोधित करना नहीं, बल्कि उनसे संवाद स्थापित करना भी रहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं की नई सोच और बड़े सपने विकसित उत्तराखंड की ताकत हैं।
छात्रा के सवाल पर कार्यक्रम में ही टैबलेट की घोषणा
इसी संवाद का सबसे प्रमुख हिस्सा उस समय सामने आया जब हरिद्वार की कक्षा 11वीं की छात्रा लवप्रीत कौर ने ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर सवाल उठाया।
छात्रा ने मुख्यमंत्री से कहा कि आज ऑनलाइन पढ़ाई का चलन बढ़ रहा है, लेकिन कई परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे बच्चों के लिए फोन या लैपटॉप खरीद सकें।
छात्रा ने पूछा कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए सरकार क्या व्यवस्था करेगी।
जवाब में मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान ही घोषणा की कि राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि दी जाएगी।
इस घोषणा के बाद डिजिटल शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए एक नई सहायता व्यवस्था की बात सामने आई है।
टैबलेट के लिए डीबीटी से मिलेगी राशि
सरकार की घोषणा के अनुसार विद्यार्थियों को स्वयं टैब उपलब्ध कराने के बजाय उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
इस व्यवस्था में विद्यार्थी या उनके अभिभावक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार टैब खरीद सकेंगे।
डीबीटी आधारित व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सहायता की राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचती है।
हालांकि इस घोषणा के बाद अभी कुछ जानकारियां विस्तृत दिशा-निर्देश के स्तर पर स्पष्ट होना बाकी हैं।
मसलन—
- प्रति विद्यार्थी कितनी राशि दी जाएगी?
- कितने विद्यार्थी इस योजना के पात्र होंगे?
- डीबीटी कब शुरू होगा?
- टैबलेट खरीद के लिए कोई तकनीकी मानक निर्धारित होगा या नहीं?
- क्या खरीद के बाद बिल या अन्य प्रमाण देना होगा?
- योजना की निगरानी किस विभाग द्वारा की जाएगी?
इन सवालों के जवाब संबंधित सरकारी आदेश और योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होंगे।
इसलिए फिलहाल निश्चित राशि का उल्लेख किए बिना इतना स्पष्ट है कि सरकार ने राजकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के लिए टैब खरीदने हेतु डीबीटी सहायता की घोषणा की है।
डिजिटल शिक्षा की जरूरत से जुड़ा है फैसला
ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते इस्तेमाल के बीच डिजिटल उपकरण विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं।
पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री, शैक्षणिक वीडियो, डिजिटल पुस्तकें, परीक्षा की तैयारी और अन्य अध्ययन सामग्री तक पहुंच के लिए टैबलेट उपयोगी हो सकता है।
लेकिन डिजिटल शिक्षा की सफलता केवल उपकरण उपलब्ध कराने पर निर्भर नहीं करती।
इसके लिए पर्याप्त इंटरनेट सुविधा, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, डिजिटल साक्षरता और विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं उपयोगी तरीके से तकनीक इस्तेमाल करने की जानकारी भी जरूरी है।
इसलिए टैबलेट सहायता के साथ इन पहलुओं पर भी ध्यान देना योजना के प्रभाव को निर्धारित कर सकता है।
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन से नीति तक पहुंचेंगे विद्यार्थियों के विचार?
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन की एक खास बात यह है कि विद्यार्थियों से केवल सवाल पूछने के बजाय उन्हें राज्य के भविष्य को लेकर अपनी सोच रखने का अवसर दिया गया।
तकनीक, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे विषय यह बताते हैं कि विद्यार्थी भविष्य के रोजगार और तकनीकी बदलावों को लेकर भी अपनी सोच विकसित कर रहे हैं।
वहीं कौशल प्रशिक्षण और उद्योगों से सीधे जुड़ने का सवाल रोजगार के व्यावहारिक पक्ष को सामने लाता है।
स्वरोजगार का सवाल स्थानीय संसाधनों और उद्यमिता से जुड़ता है।
सगंध मिशन और पिरुल से जुड़ी योजनाएं स्थानीय संसाधनों को आर्थिक गतिविधियों में बदलने की दिशा को सामने रखती हैं।
इस तरह कार्यक्रम में विद्यार्थियों के सवालों के माध्यम से शिक्षा से लेकर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था तक कई मुद्दे सामने आए।
2.67 लाख विद्यार्थियों से शुरू हुआ संवाद अब आगे बढ़ा
इस पूरी पहल की पृष्ठभूमि में प्रदेश के विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी भी है।
‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ अभियान के तहत 2,67,744 विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए थे। इनमें से 140 विद्यार्थियों का चयन कर उन्हें मुख्यमंत्री के साथ सीधे संवाद का अवसर दिया गया।
इन विद्यार्थियों में कक्षा 11वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं शामिल रहे।
इस व्यापक भागीदारी के बाद अब संवाद का अगला चरण उन विचारों और सुझावों को सामने लाना है जो विद्यार्थी उत्तराखंड के भविष्य को लेकर दे रहे हैं।
युवा विद्यार्थी मंथन का महत्व इसी बिंदु पर बढ़ता है कि विद्यार्थी केवल योजना के लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य को लेकर अपने विचार रखने वाले नागरिक भी हैं।
140 चयनित विद्यार्थियों के लिए करियर सहायता भी
अभियान से जुड़े पहले चरण में चयनित 140 विद्यार्थियों के लिए कक्षा 12वीं के बाद करियर तैयारी और कोचिंग हेतु 2 लाख रुपये तक की छात्रवृत्ति की जानकारी सामने आई थी।
इस सहायता का उद्देश्य चयनित विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आर्थिक सहयोग देना बताया गया है।
यहां ‘2 लाख रुपये तक’ का अर्थ अधिकतम सहायता से है। वास्तविक सहायता संबंधित पात्रता और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार तय होगी।
इस प्रकार इस पहल में एक तरफ विद्यार्थियों के विचारों को मंच दिया गया, वहीं दूसरी तरफ चयनित विद्यार्थियों की आगे की तैयारी से जुड़ी आर्थिक सहायता का प्रावधान भी सामने आया।
रोजगार से लेकर स्वरोजगार तक, युवाओं के लिए क्या संकेत?
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के जवाबों से युवाओं के लिए कई संभावित क्षेत्रों की तस्वीर सामने आती है।
पहला क्षेत्र है उद्योग आधारित कौशल प्रशिक्षण, जहां उद्योगों की मांग के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देने की बात कही गई है।
दूसरा क्षेत्र है स्वरोजगार, जिसमें स्थानीय संसाधनों और उत्पादों को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने पर जोर है।
तीसरा क्षेत्र है तकनीक, जिसमें रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे नए विषय विद्यार्थियों के सवालों में सामने आए।
चौथा क्षेत्र है डिजिटल शिक्षा, जिसके लिए सरकारी विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब के लिए डीबीटी सहायता देने की घोषणा हुई है।
इन सभी क्षेत्रों का साझा बिंदु युवा हैं।
अब घोषणाओं के क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
किसी भी सरकारी योजना की वास्तविक उपयोगिता उसके क्रियान्वयन से सामने आती है।
इसलिए अब नजर रहेगी कि उद्योगों के साथ किए जाने वाले समझौतों के आधार पर कितने नए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होते हैं और कितने युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार मिलता है।
इसी तरह सगंध मिशन के तहत तैयार उत्पाद कितनी मात्रा में बाजार तक पहुंचते हैं और स्थानीय स्तर पर कितने लोगों को इससे आर्थिक लाभ मिलता है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
पिरुल की खरीद और उससे तैयार उत्पादों की बाजार व्यवस्था भी इस पहल के प्रभाव को तय करेगी।
वहीं टैबलेट योजना में पात्र विद्यार्थियों की संख्या, प्रति विद्यार्थी सहायता राशि और डीबीटी की समयसीमा सामने आने के बाद योजना का वास्तविक दायरा स्पष्ट होगा।
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन के तहत आयोजित ‘मेरे सपनों का उत्तराखंड’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्तराखंड के भविष्य को लेकर तकनीक, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े सवाल उठाए।
UPI MDR: 7 बड़े बदलाव, ₹2,000 के बाद क्या बदलेगा?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और फैक्ट्रियों के साथ सीधे समझौते कर आवश्यक ट्रेड की पहचान करने की बात कही। साथ ही सगंध मिशन के माध्यम से उत्तराखंड की विशिष्ट वनस्पतियों से तैयार सुगंधित उत्पादों को ‘हाउस ऑफ हिमालय’ के जरिए देश और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की जानकारी दी।
पिरुल को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदकर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की पहल का भी उल्लेख किया गया।
सबसे महत्वपूर्ण घोषणा हरिद्वार की छात्रा लवप्रीत कौर के सवाल पर हुई। मुख्यमंत्री ने राजकीय विद्यालयों के कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि देने की घोषणा की।
अब इस पहल का अगला महत्वपूर्ण चरण इसका क्रियान्वयन होगा। विद्यार्थियों के सवालों और सुझावों से लेकर कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और डिजिटल शिक्षा तक—इन घोषणाओं का वास्तविक असर तब सामने आएगा जब योजनाओं का लाभ जमीन पर विद्यार्थियों और युवाओं तक पहुंचेगा।
उत्तराखंड के युवाओं ने अपने सपनों का उत्तराखंड सामने रखा है। अब उन सपनों को योजनाओं, कौशल, अवसर और रोजगार से जोड़ना अगली बड़ी चुनौती होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन क्या है?
मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन विद्यार्थियों को उत्तराखंड के भविष्य को लेकर अपने विचार, सुझाव और सवाल सीधे सरकार के सामने रखने का मंच उपलब्ध कराने वाली पहल है।
2. मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन में किन विषयों पर चर्चा हुई?
कार्यक्रम में तकनीक, रोबोटिक्स, साइबर सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार और विकसित उत्तराखंड जैसे विषयों पर विद्यार्थियों ने सवाल और सुझाव रखे।
3. किन विद्यार्थियों को टैब के लिए डीबीटी राशि मिलेगी?
घोषणा के अनुसार राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को टैब उपलब्ध कराने के लिए उनके खातों में डीबीटी के माध्यम से धनराशि दी जाएगी।
4. टैबलेट के लिए कितनी राशि मिलेगी?
अभी उपलब्ध घोषणा में प्रति विद्यार्थी निश्चित राशि का उल्लेख नहीं है। इसकी जानकारी विस्तृत सरकारी दिशा-निर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
5. पिरुल कितने रुपये प्रति किलोग्राम खरीदा जा रहा है?
मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य में पिरुल को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है।
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