उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार सुबह बड़ा अलर्ट जारी किया है। IMD Flash Flood Alert के National Flash Flood Guidance Bulletin के अनुसार राज्य के कई पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में अगले 24 घंटों के दौरान Low to Moderate Flash Flood Risk बना हुआ है। विभाग ने विशेष रूप से प्रशासन और स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
बुलेटिन के अनुसार उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल है जहां पिछले 24 घंटों में भारी वर्षा दर्ज की गई है और अगले 24 घंटों में कुछ स्थानों पर 130 मिमी तक बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।
किन जिलों के लिए तत्काल खतरे की चेतावनी?
IMD के अनुसार पिछले छह घंटों के दौरान उत्तराखंड के कुछ जिलों में Low to Moderate Flash Flood Threat दर्ज किया गया है। इनमें शामिल हैं—
- देहरादून
- उत्तरकाशी
- टिहरी गढ़वाल
- पिथौरागढ़
- चम्पावत
इन क्षेत्रों में जलभराव, छोटे नालों और गदेरों में अचानक जलस्तर बढ़ने तथा संवेदनशील ढलानों पर खतरा बढ़ सकता है।
अगले 6 घंटे भी रहेंगे बेहद अहम
IMD ने अगले छह घंटों के लिए भी उत्तराखंड के कई हिस्सों में Persistent Flash Flood Threat जारी रखा है।
विशेष रूप से—
- देहरादून
- उत्तरकाशी
- टिहरी गढ़वाल
में लगातार वर्षा के कारण पहले से संतृप्त मिट्टी वाले क्षेत्रों में सतही बहाव (Surface Runoff) और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका जताई गई है।
अगले 24 घंटे: 11 जिलों के लिए बड़ा अलर्ट

IMD ने 22 जुलाई की सुबह तक के लिए जारी Flash Flood Risk Outlook में उत्तराखंड के 11 जिलों को संवेदनशील श्रेणी में रखा है।
इनमें शामिल हैं—
- देहरादून
- उत्तरकाशी
- पौड़ी गढ़वाल
- टिहरी गढ़वाल
- चमोली
- अल्मोड़ा
- नैनीताल
- बागेश्वर
- पिथौरागढ़
- चम्पावत
- रुद्रप्रयाग
इन जिलों में अचानक जलभराव, छोटे नदी-नालों का उफान, भूस्खलन और सड़क अवरोध जैसी स्थितियां बन सकती हैं।
IMD ने क्यों जताई चिंता?
बुलेटिन के अनुसार—
- पिछले 24 घंटे में कुछ क्षेत्रों में 100 मिमी तक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
- कई जलग्रहण क्षेत्रों में मिट्टी पहले से अत्यधिक नम है।
- अगले 24 घंटे में 130 मिमी तक बहुत भारी वर्षा का अनुमान है।
ऐसी स्थिति में कम समय में अधिक बारिश होने पर फ्लैश फ्लड की आशंका बढ़ जाती है।
फ्लैश फ्लड क्या होता है?
फ्लैश फ्लड सामान्य बाढ़ से अलग होती है। इसमें बहुत कम समय में तेज बारिश के कारण नदी, नाले या गदेरे अचानक उफान पर आ जाते हैं। पहाड़ी राज्यों जैसे उत्तराखंड में यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक मानी जाती है क्योंकि पानी के साथ मलबा और चट्टानें भी तेजी से नीचे आती हैं।
IMD ने अपने बुलेटिन में स्पष्ट किया है कि यह Guidance Bulletin है, जिसका उद्देश्य संभावित जोखिम का आकलन करना है। इसे स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक बाढ़ चेतावनी का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
लोगों के लिए जरूरी सलाह
- नदी, नाले और गदेरों के किनारे जाने से बचें।
- भूस्खलन संभावित मार्गों पर अनावश्यक यात्रा न करें।
- मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक सलाह का पालन करें।
- पहाड़ी क्षेत्रों में रात के समय यात्रा करने से बचें।
- आपातकालीन स्थिति में स्थानीय प्रशासन और SDRF के निर्देशों का पालन करें।
प्रशासन के सामने चुनौती
- उत्तराखंड में मानसून के दौरान हर वर्ष भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में IMD का यह ताजा बुलेटिन जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस और SDRF के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
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IMD का ताजा Flash Flood Guidance Bulletin उत्तराखंड के लिए गंभीर संकेत देता है। हालांकि यह अंतिम बाढ़ चेतावनी नहीं है, लेकिन अगले 24 घंटे राज्य के कई जिलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। लगातार बारिश और संतृप्त मिट्टी को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने तथा प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।
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