बागेश्वर/देहरादून। उत्तराखंड प्रशासन में युवा नेतृत्व की एक नई मिसाल सामने आई है। IAS अपूर्वा पांडे ने महज 31 वर्ष की आयु में बागेश्वर की जिलाधिकारी (District Magistrate) का दायित्व संभालकर राज्य के प्रशासनिक इतिहास में एक नई पहचान बनाई है। 23 मई 2026 से वे बागेश्वर की जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और युवा प्रशासनिक अधिकारियों की नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं।
2018 बैच की इस IAS अधिकारी ने बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद के UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 39 हासिल की थी। उनका संघर्ष, अनुशासन और सेल्फ स्टडी आधारित तैयारी आज लाखों UPSC अभ्यर्थियों और विशेष रूप से महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
कौन हैं IAS अपूर्वा पांडे?
IAS अपूर्वा पांडे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2018 बैच की अधिकारी हैं, जिनका कैडर उत्तराखंड है। उनका जन्म 29 अप्रैल 1994 को उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुआ। बचपन से ही वे पढ़ाई में मेधावी रहीं और इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा UPSC Civil Services Examination को अपना लक्ष्य बनाया।
आज वे उत्तराखंड प्रशासन की उन युवा अधिकारियों में गिनी जाती हैं जिन्होंने कम समय में अपनी अलग कार्यशैली और प्रशासनिक दक्षता से पहचान बनाई है।
शिक्षा से मिला मजबूत आधार
अपूर्वा पांडे ने वर्ष 2016 में गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग (B.Tech.) की डिग्री प्राप्त की।
इंजीनियरिंग शिक्षा के दौरान उनमें विश्लेषणात्मक सोच, तार्किक निर्णय क्षमता और समस्या समाधान की दक्षता विकसित हुई, जिसने आगे चलकर UPSC की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिक्षकों के परिवार से हैं अपूर्वा पांडे
अपूर्वा पांडे का परिवार शिक्षा जगत से जुड़ा रहा है।
- पिता: के.सी. पांडे — सरकारी पॉलिटेक्निक, कोटाबाग में इंजीनियरिंग के प्रवक्ता रहे।
- माता: मीना पांडे — जीजीआईसी नैनीताल में रसायन विज्ञान की प्रवक्ता रहीं।
घर के शैक्षणिक वातावरण ने उन्हें बचपन से अनुशासन, मेहनत और उत्कृष्टता की सीख दी, जिसका प्रभाव उनके पूरे करियर में स्पष्ट दिखाई देता है।
बिना कोचिंग पास की UPSC परीक्षा
IAS अपूर्वा पांडे की सफलता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया।
उन्होंने पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के माध्यम से की।
उनकी तैयारी की प्रमुख रणनीतियां थीं—
- NCERT पुस्तकों का गहन अध्ययन
- सीमित लेकिन प्रमाणिक अध्ययन सामग्री
- नियमित करंट अफेयर्स
- उत्तर लेखन (Answer Writing) का निरंतर अभ्यास
- पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों का विश्लेषण
- नियमित आत्ममूल्यांकन
इन रणनीतियों की बदौलत उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में शानदार सफलता प्राप्त की।
AIR 39 हासिल कर बनीं IAS
सिर्फ 24 वर्ष की आयु में अपूर्वा पांडे ने UPSC Civil Services Examination में All India Rank 39 प्राप्त की।
उनका वैकल्पिक विषय था—
Political Science & International Relations (PSIR)
परीक्षा में प्रदर्शन
- कुल अंक: 1070
- मुख्य परीक्षा: 905 अंक
- व्यक्तित्व परीक्षण (Interview): 165 अंक
यह उपलब्धि उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ सफल अभ्यर्थियों में शामिल करती है।
प्रशासनिक सफर
IAS बनने के बाद अपूर्वा पांडे ने उत्तराखंड सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं।
उन्होंने अलग-अलग विभागों में कार्य करते हुए शासन और फील्ड प्रशासन दोनों का अनुभव प्राप्त किया। बाद में वे Additional Secretary के पद पर भी कार्यरत रहीं।
इसके बाद 23 मई 2026 को राज्य सरकार के प्रशासनिक फेरबदल के दौरान उन्हें जिलाधिकारी, बागेश्वर नियुक्त किया गया।
बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिले की बड़ी जिम्मेदारी

बागेश्वर उत्तराखंड का एक संवेदनशील और पर्वतीय जिला है, जहां प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां रहती हैं।
मुख्य चुनौतियां—
- आपदा प्रबंधन
- भूस्खलन
- सड़क संपर्क
- स्वास्थ्य सेवाएं
- शिक्षा
- पेयजल व्यवस्था
- पलायन
- स्थानीय रोजगार
- पर्यटन विकास
पदभार ग्रहण करने के बाद IAS अपूर्वा पांडे ने स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता स्थानीय रोजगार बढ़ाना, पलायन रोकना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत बनाना होगी।
उनकी कार्यशैली क्यों अलग है?
अपूर्वा पांडे को उनकी संवेदनशील, पारदर्शी और परिणाम आधारित प्रशासनिक शैली के लिए जाना जाता है।
उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं—
- जनता से सीधा संवाद
- त्वरित निर्णय
- पारदर्शी प्रशासन
- तकनीक आधारित कार्यप्रणाली
- विकास केंद्रित सोच
- फील्ड विजिट पर विशेष जोर
- समयबद्ध शिकायत निस्तारण
वे मानती हैं कि प्रभावी प्रशासन का सबसे बड़ा आधार जनता की समस्याओं को सुनना और उनका शीघ्र समाधान करना है।
महिलाओं के लिए प्रेरणा
भारतीय प्रशासनिक सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी प्रशासन को नई दिशा दे रही है।
IAS अपूर्वा पांडे इस परिवर्तन की मजबूत पहचान हैं। उन्होंने यह साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, तैयारी व्यवस्थित हो और मेहनत निरंतर हो, तो बिना महंगी कोचिंग के भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है।
UPSC अभ्यर्थियों के लिए सीख
अपूर्वा पांडे की सफलता से कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिलती हैं—
- Self Study भी सफलता दिला सकती है।
- उत्तर लेखन का नियमित अभ्यास बेहद आवश्यक है।
- सीमित लेकिन गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री अधिक प्रभावी होती है।
- अनुशासन और निरंतरता सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
- इंटरव्यू में व्यक्तित्व और आत्मविश्वास का महत्व ज्ञान जितना ही होता है।
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उत्तराखंड के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत
हल्द्वानी से निकलकर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का उनका सफर उत्तराखंड के हजारों युवाओं को यह भरोसा देता है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
आज IAS अपूर्वा पांडे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन, आत्मविश्वास और समर्पण की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। आने वाले वर्षों में उनसे बागेश्वर और पूरे उत्तराखंड के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।
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