नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सुर्खियों में आ गई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से लंबी बैठक के बाद उनके इस्तीफ़े को लेकर सोशल मीडिया पर अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसी बीच, NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे Cockroach Janata Party (CJP) और उससे जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे प्रमुख मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की है।
क्या है पूरा विवाद?
पिछले कई सप्ताह से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन जारी है।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा प्रणाली में गंभीर खामियां हैं और लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर संसद के पहले दिन “चलो संसद” मार्च का आह्वान किया गया, जिसके दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी।
अमित शाह और धर्मेंद्र प्रधान की बैठक क्यों चर्चा में है?

सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद परिसर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के साथ कई घंटे तक बैठक की।
बैठक के एजेंडे को लेकर सरकार ने कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की। इसी वजह से सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या सरकार शिक्षा मंत्री के भविष्य को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने वाली है।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दे रहे हैं।
CJP की तीन प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारी संगठन CJP ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं—
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा।
- सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई।
- कथित तौर पर NEET विवाद से जुड़े आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि जब तक इन मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
JP नड्डा ने प्रदर्शनकारियों से की बातचीत

स्थिति को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की और उनका ज्ञापन प्राप्त किया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार सरकार कुछ मांगों पर विचार कर सकती है, लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग पर सहमति के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
क्या सोनम वांगचुक ने भी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगा?

सोशल मीडिया पर यह दावा भी वायरल हुआ कि सोनम वांगचुक ने अपने अनशन समाप्त करने की शर्तों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग रखी है।
लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वांगचुक द्वारा सार्वजनिक रूप से जारी की गई अनशन समाप्त करने की शर्तों में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग शामिल नहीं थी। इस्तीफ़े की मांग CJP के आंदोलन का हिस्सा है।
क्या धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफ़ा दे रहे हैं?
संक्षिप्त उत्तर— फिलहाल नहीं कहा जा सकता।
वर्तमान स्थिति में—
- सरकार ने इस्तीफ़े की पुष्टि नहीं की है।
- धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफ़ा देने की कोई घोषणा नहीं की है।
- अमित शाह के साथ बैठक के विषय का आधिकारिक विवरण जारी नहीं हुआ है।
- केवल प्रदर्शनकारी संगठन इस्तीफ़े की मांग कर रहा है।
इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे दावों को अभी अटकल ही माना जाएगा, जब तक सरकार या संबंधित पक्ष आधिकारिक घोषणा नहीं करते।
विपक्ष और छात्रों का दबाव
NEET विवाद को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। दूसरी ओर, छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुधार की मांग कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास बहाल करना और दूसरी ओर बढ़ते राजनीतिक दबाव का सामना करना।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में संसद के मानसून सत्र के दौरान यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है। यदि सरकार परीक्षा सुधारों पर कोई बड़ा ऐलान करती है या आंदोलनकारियों के साथ बातचीत आगे बढ़ती है, तो स्थिति में बदलाव संभव है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए वायरल दावों पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक सूचना का इंतजार करना चाहिए।
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