देहरादून | 2 जुलाई 2026
देश के शीर्ष वन प्रशिक्षण संस्थानों में शामिल इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA), देहरादून को नया नेतृत्व मिल गया है। भारतीय वन सेवा (IFS) के 1991 बैच के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने गुरुवार को अकादमी के नए निदेशक के रूप में कार्यभार ग्रहण कर लिया। उन्होंने श्रीमती भारती का स्थान लिया है, जो 30 जून 2026 को सेवानिवृत्त हुई थीं।
वन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक नेतृत्व में तीन दशक से अधिक का अनुभव रखने वाले डॉ. राजेंद्र खजूरिया की नियुक्ति को भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
IGNFA को मिला अनुभवी नेतृत्व

डॉ. राजेंद्र खजूरिया ने 2 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (IGNFA) के निदेशक का पदभार संभाला। इससे पहले वे आंध्र प्रदेश पर्यावरण प्रबंधन निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का नेतृत्व किया।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और सतत वन प्रबंधन जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
35 वर्षों का समृद्ध प्रशासनिक और शैक्षणिक अनुभव
आंध्र प्रदेश कैडर के 1991 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारी डॉ. राजेंद्र खजूरिया मूल रूप से जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं।
उन्होंने कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। अपने लंबे करियर में उन्होंने वन प्रबंधन, पर्यावरण नीति, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में उनके कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं, जिससे वे वन एवं पर्यावरण क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद् और विशेषज्ञ के रूप में भी पहचान रखते हैं।
‘अमृत काल’ के विजन के अनुरूप प्रशिक्षण पर रहेगा फोकस
सरकारी जानकारी के अनुसार, डॉ. राजेंद्र खजूरिया भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के प्रशिक्षण को ‘अमृत काल’ की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक और प्रभावी बनाने का स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हैं।
आने वाले समय में अकादमी में तकनीक आधारित प्रशिक्षण, जलवायु परिवर्तन, वन संरक्षण, जैव विविधता प्रबंधन, वन्यजीव संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद खजूरिया ने कार्यभार संभालते ही अधिकारियों और कर्मचारियों से की चर्चा
निदेशक का पदभार ग्रहण करने के बाद डॉ. राजेंद्र खजूरिया ने अकादमी के संकाय सदस्यों और कर्मचारियों के साथ बैठक की। उन्होंने संस्थान में चल रही विभिन्न प्रशिक्षण गतिविधियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की।
उन्होंने अकादमी की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशिक्षित करने पर जोर दिया।
IGNFA की भूमिका क्यों है महत्वपूर्ण?
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी देश में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के प्रशिक्षण का प्रमुख संस्थान है।
यहां—
- भारतीय वन सेवा के प्रोबेशनर्स को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
- वरिष्ठ अधिकारियों के लिए क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- वन नीति, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर शोध एवं प्रशिक्षण संचालित होता है।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आधुनिक वन प्रबंधन तकनीकों पर भी कार्य किया जाता है।
वन एवं पर्यावरण क्षेत्र को मिल सकता है नया दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि डॉ. राजेंद्र खजूरिया के व्यापक अनुभव का लाभ अकादमी के साथ-साथ भारतीय वन सेवा के भविष्य के अधिकारियों को भी मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन, कार्बन प्रबंधन, वन संरक्षण और तकनीकी नवाचार जैसे विषय आने वाले वर्षों में वन प्रशासन की प्राथमिकता होंगे और ऐसे में उनका अनुभव संस्थान को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि डॉ. राजेंद्र खजूरिया के नेतृत्व में IGNFA भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में किस प्रकार के नए सुधार लागू करती है और भविष्य के वन अधिकारियों को बदलती पर्यावरणीय चुनौतियों के लिए किस तरह तैयार करती है।
#DrRajendraKhajuria #IGNFA #IndianForestService #IFS #Dehradun #ForestAcademy #Environment #ForestManagement #Uttarakhand #HeadlinesIP