देश के सबसे बड़े शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education यानी CBSE को लेकर इस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित होने के तुरंत बाद CBSE के री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर कथित साइबर अटैक की खबर सामने आई, जिसके बाद अब केंद्र सरकार ने On-Screen Marking System यानी OSM से जुड़ी सेवाओं की खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर के लाखों छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

सरकारी आदेश के अनुसार, इस जांच समिति की अध्यक्षता S. Radha Chauhan करेंगी, जो वर्तमान में Capacity Building Commission की चेयरपर्सन हैं। समिति को CBSE के On-Screen Marking System से संबंधित सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, तकनीकी प्रबंधन और संभावित अनियमितताओं की जांच का जिम्मा सौंपा गया है। समिति को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट Department of Personnel and Training को सौंपनी होगी।
इसी बीच CBSE का री-इवैल्यूएशन पोर्टल भी भारी विवादों में घिर गया है। बोर्ड के अनुसार, पोर्टल लॉन्च होने के कुछ ही मिनटों में उस पर 15 लाख से अधिक हिट्स दर्ज की गईं, जबकि एक लाख से ज्यादा अनधिकृत एक्सेस प्रयास रिकॉर्ड हुए। सुरक्षा एजेंसियों और तकनीकी टीमों को तुरंत सक्रिय किया गया और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब CBSE की डिजिटल सुरक्षा और मूल्यांकन प्रणाली पहले से ही सवालों के घेरे में थी।
आखिर क्या है On-Screen Marking System विवाद?

CBSE पिछले कुछ वर्षों से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए डिजिटल On-Screen Marking System यानी OSM का उपयोग कर रहा है। इस प्रणाली के तहत परीक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है और मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए होता है। इसे पारदर्शिता बढ़ाने और मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करने के लिए लागू किया गया था।
लेकिन हाल के दिनों में इसी सिस्टम को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि OSM सिस्टम से जुड़े कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म में सुरक्षा कमजोरियां थीं। इसके बाद अब केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले की गहराई से जांच कराने का फैसला लिया है। सरकार द्वारा बनाई गई एक सदस्यीय समिति इस बात की जांच करेगी कि OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया में कहीं कोई तकनीकी या प्रशासनिक चूक तो नहीं हुई।
सरकारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्ष S. Radha Chauhan को आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार भी दिया गया है। इसके अलावा समिति को सचिवीय सहायता Capacity Building Commission द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि केंद्र सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से देख रही है।
CBSE री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर क्या हुआ?
CBSE द्वारा बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के लिए री-इवैल्यूएशन और अंक सत्यापन पोर्टल शुरू किया गया था। लेकिन पोर्टल लॉन्च होते ही उस पर भारी ट्रैफिक दर्ज किया गया। बोर्ड के अनुसार, केवल कुछ मिनटों में 15 लाख से ज्यादा हिट्स दर्ज हुईं। इसी दौरान एक लाख से अधिक अनधिकृत लॉगिन और एक्सेस प्रयास भी सामने आए।
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति किसी बड़े Distributed Denial of Service यानी DDoS अटैक जैसी गतिविधि की ओर संकेत कर सकती है, जिसमें किसी वेबसाइट या सर्वर पर अत्यधिक ट्रैफिक भेजकर सिस्टम को धीमा या अस्थायी रूप से ठप करने की कोशिश की जाती है।
CBSE ने कहा कि सुरक्षा प्रणाली ने संदिग्ध गतिविधियों की पहचान समय रहते कर ली थी और तत्काल सुरक्षा उपाय लागू किए गए। बोर्ड के अनुसार, छात्रों के डेटा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और फिलहाल किसी बड़े डेटा ब्रीच की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि पूरे मामले की जांच जारी है।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता
देशभर में लाखों छात्र अपने परिणामों को लेकर पहले ही मानसिक दबाव में रहते हैं। ऐसे में री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर तकनीकी गड़बड़ियां और साइबर अटैक की खबरों ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है। कई छात्रों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की कि पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था या लॉगिन नहीं हो पा रहा था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस तरह की तकनीकी समस्याएं लगातार बनी रहती हैं तो इसका सीधा असर कॉलेज एडमिशन, काउंसलिंग और करियर प्लानिंग पर पड़ सकता है। क्योंकि री-इवैल्यूएशन के परिणाम कई छात्रों के भविष्य को प्रभावित करते हैं।
डिजिटल शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

यह पूरा मामला केवल CBSE तक सीमित नहीं है बल्कि देश की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की मजबूती पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में लगभग सभी प्रमुख परीक्षाएं, परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो चुकी हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का मुद्दा बन चुका है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि शिक्षा से जुड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म अब साइबर अपराधियों के लिए आसान निशाना बनते जा रहे हैं। लाखों छात्रों का डेटा, परीक्षा रिकॉर्ड और मूल्यांकन सिस्टम ऑनलाइन होने के कारण सुरक्षा जोखिम लगातार बढ़ रहे हैं। इसी वजह से सरकार अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सतर्क दिखाई दे रही है।
केंद्र सरकार की जांच से क्या निकल सकता है?
सरकार द्वारा बनाई गई समिति कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच कर सकती है। इसमें OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, तकनीकी ठेके, साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, डेटा प्रबंधन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो भविष्य में बड़े प्रशासनिक बदलाव भी संभव हैं।
यह भी माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर CBSE के डिजिटल सिस्टम में बड़े सुधार किए जा सकते हैं। आने वाले समय में बोर्ड अपने साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए नई तकनीक और अतिरिक्त सुरक्षा लेयर लागू कर सकता है।
फिलहाल छात्रों को क्या करना चाहिए?
CBSE ने छात्रों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक पोर्टल और प्रमाणित सूचना स्रोतों का ही उपयोग करें। किसी भी अनधिकृत वेबसाइट, लिंक या सोशल मीडिया अफवाहों पर भरोसा न करने की सलाह दी गई है। बोर्ड ने यह भी कहा है कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से जारी रहेगी और तकनीकी टीम लगातार निगरानी कर रही है।
अब सभी की नजरें केंद्र सरकार की जांच समिति पर टिकी हैं। आने वाले एक महीने में समिति की रिपोर्ट कई बड़े खुलासे कर सकती है और यह तय कर सकती है कि CBSE के डिजिटल सिस्टम में आखिर कहां कमजोरी रह गई।
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