कृषि कुंभ। भारत में खेती सिर्फ परंपरा नहीं बल्कि आज के समय में तकनीक, विज्ञान और नवाचार का संगम बनती जा रही है। इसी सोच के साथ उत्तराखंड के पहाड़ी जनपद उत्तरकाशी से 52 किसानों का एक दल आधुनिक खेती की तकनीक सीखने के लिए पंतनगर रवाना हुआ है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने शुक्रवार 13 मार्च को इन किसानों को हरी झंडी दिखाकर पंतनगर के लिए रवाना किया। यह दल ऊधमसिंह नगर के पंतनगर में आयोजित अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी, जिसे आम बोलचाल में “कृषि कुंभ” भी कहा जाता है, में भाग लेगा।
यह कृषि कुंभ मेला 13 मार्च से 16 मार्च 2026 तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देशभर से किसान, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और कृषि उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों, कृषि यंत्रों और प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक मॉडल से परिचित कराना है ताकि वे अपनी खेती को अधिक लाभदायक बना सकें।
किसानों को मिलेगा आधुनिक खेती का प्रशिक्षण
पंतनगर में आयोजित यह कृषि कुंभ देश के प्रमुख कृषि आयोजनों में से एक माना जाता है। इस मेले में किसानों को नई तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।
उत्तरकाशी से गए किसानों को यहां कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी जाएगी, जैसे:
- आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग
- उन्नत किस्म के बीजों की जानकारी
- जैविक और प्राकृतिक खेती के मॉडल
- जल संरक्षण तकनीक
- फसल उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीके
- कृषि आधारित उद्योगों के अवसर
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को यह भी बताया जाएगा कि किस तरह कम लागत में अधिक उत्पादन हासिल किया जा सकता है।
पहाड़ी क्षेत्रों के किसानों के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सीमित भूमि और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में खेती करना चुनौतीपूर्ण होता है।
जिलाधिकारी ने किसानों को दिया प्रेरक संदेश
किसानों को रवाना करते समय जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि आज के समय में खेती में नवाचार और वैज्ञानिक सोच बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के भ्रमण कार्यक्रम किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम होते हैं। जब किसान स्वयं जाकर आधुनिक खेती को देखते हैं और विशेषज्ञों से बातचीत करते हैं, तब उन्हें खेती के नए मॉडल अपनाने की प्रेरणा मिलती है।
जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि पंतनगर कृषि कुंभ मेले से प्राप्त अनुभव और जानकारी का उपयोग करके उत्तरकाशी के किसान अपनी खेती को और अधिक लाभदायक बना सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में जिले के किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेंगे।
नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कॉरिडोर योजना का बड़ा उद्देश्य
यह भ्रमण कार्यक्रम नमामि गंगे प्राकृतिक कृषि कॉरिडोर योजना के अंतर्गत आयोजित किया गया है।
इस योजना का उद्देश्य गंगा नदी के किनारे बसे क्षेत्रों में प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देना है।
मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न राज्यों में आयोजित कृषि मेलों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि 13 मार्च से 16 मार्च 2026 तक चलने वाले इस कृषि कुंभ राज्य स्तरीय भ्रमण कार्यक्रम में किसान:
- कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे
- प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण में भाग लेंगे
- कृषि वैज्ञानिकों से सीधे संवाद करेंगे
इससे किसानों को नई तकनीकों और उन्नत कृषि मॉडल के बारे में गहराई से जानकारी मिलेगी।
कृषि कुंभ में दिखेंगे आधुनिक कृषि के नए मॉडल
पंतनगर का कृषि मेला वर्षों से किसानों के लिए ज्ञान और तकनीक का बड़ा मंच रहा है।
यहां देशभर के कृषि विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और निजी कृषि कंपनियां अपने नवीनतम उत्पाद और तकनीक प्रस्तुत करती हैं।
कृषि कुंभ में किसानों को निम्न प्रकार की प्रदर्शनी देखने को मिलती है:
- आधुनिक ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी
- ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली
- उन्नत बीज और पौध सामग्री
- डेयरी और पशुपालन तकनीक
- मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन
- जैविक खाद और बायो-फर्टिलाइजर
इस तरह के आयोजनों का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि किसान सिर्फ सिद्धांत नहीं बल्कि तकनीक को व्यवहार में लागू होते हुए भी देख पाते हैं।
पहाड़ी किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में खेती की परिस्थितियां मैदानी क्षेत्रों से काफी अलग होती हैं।
यहां खेत छोटे होते हैं, सिंचाई के संसाधन सीमित होते हैं और मौसम भी कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
ऐसे में यदि किसान आधुनिक तकनीक अपनाते हैं तो कम भूमि में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, बागवानी और उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की आय कई गुना बढ़ सकती है।
इसी दिशा में सरकार और कृषि विभाग लगातार प्रयास कर रहे हैं ताकि किसानों को नई तकनीकों और प्रशिक्षण से जोड़ा जा सके।
कृषि विभाग की टीम भी रही मौजूद
किसानों को पंतनगर कृषि कुंभ के लिए रवाना करते समय कई अधिकारी और विभागीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित रहे:
- पीडी डीआरडीए अजय सिंह
- मुख्य कृषि अधिकारी एसएस वर्मा
- कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी
- जिले के प्रगतिशील किसान
इन सभी ने किसानों को नई तकनीक सीखने और उसे अपने गांवों में लागू करने के लिए प्रेरित किया।
भविष्य में बढ़ेगी किसानों की आय
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक खेती और प्राकृतिक कृषि मॉडल को अपनाते हैं तो खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।
पंतनगर कृषि कुंभ जैसे आयोजनों का उद्देश्य भी यही है कि किसान नई जानकारी लेकर अपने गांव लौटें और अपने अनुभव अन्य किसानों के साथ साझा करें।
इससे पूरे क्षेत्र में खेती का स्तर बेहतर होता है और किसानों की आय में स्थायी वृद्धि संभव हो पाती है।
उत्तरकाशी से गए 52 किसानों के इस दल से भी यही उम्मीद की जा रही है कि वे आधुनिक खेती के नए मॉडल सीखकर लौटेंगे और जिले की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देंगे।
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