उत्तराखंड बना देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य, सीएम धामी बोले- यह नई शुरुआत है – Eviral Press

उत्तराखंड बना देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य, सीएम धामी बोले- यह नई शुरुआत है

देहरादून: उत्तराखंड ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए देश के छठवें पूर्ण साक्षर राज्य का दर्जा हासिल किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत निर्धारित वयस्क साक्षरता मानकों को पूरा करने के बाद 8 जुलाई 2026 को उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किया गया था। इसके साथ ही राज्य मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद इस सूची में शामिल हुआ।

इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिस्सा लिया और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।

पूर्ण साक्षरता को बताया सामूहिक प्रयास का परिणाम

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने पर प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल सरकार की नहीं, बल्कि शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों, शिक्षा विभाग और अभियान से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।

विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड में इस लक्ष्य को हासिल करना विशेष महत्व रखता है। पहाड़ी क्षेत्रों में दूरस्थ गांवों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे में साक्षरता के निर्धारित मानकों को पूरा करना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक उपलब्धि मानी जा रही है।

उल्लास कार्यक्रम के तहत राज्य में निरक्षर लोगों की पहचान कर उन्हें साक्षर बनाने के लिए अभियान चलाया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड की साक्षरता दर 2025 में 98.7 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि पूर्ण साक्षर राज्य के लिए उल्लास के तहत 95 प्रतिशत या उससे अधिक वयस्क साक्षरता का मानक निर्धारित है।

‘सीखने की कोई उम्र नहीं होती’

मुख्यमंत्री ने नव-साक्षरों को संबोधित करते हुए कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उम्र के एक पड़ाव के बाद पढ़ना-लिखना सीखा, उन्होंने यह साबित किया है कि आगे बढ़ने के लिए कभी देर नहीं होती।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अक्षर ज्ञान तक सीमित नहीं है। शिक्षा व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास पैदा करती है और उसके सामने रोजगार, आर्थिक अवसर तथा सामाजिक भागीदारी के नए रास्ते खोलती है।

सीएम धामी ने कहा कि आज के दौर में साक्षरता की परिभाषा भी व्यापक हो चुकी है। पढ़ने-लिखने और हस्ताक्षर करने के साथ डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनोपयोगी कौशल भी नागरिकों के लिए जरूरी हैं।

अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर जोर

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब सरकार का जोर नागरिकों को डिजिटल माध्यमों के इस्तेमाल, वित्तीय निर्णयों, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और रोजमर्रा के जीवन में उपयोगी कौशल से जोड़ने पर रहेगा।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, ऑनलाइन भुगतान और विभिन्न नागरिक सेवाओं तक पहुंच increasingly डिजिटल माध्यमों से हो रही है। ऐसे में केवल पढ़ना-लिखना जानना पर्याप्त नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया को सुरक्षित और समझदारी से इस्तेमाल करना भी जरूरी हो गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाएं

मुख्यमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार बच्चों और युवाओं के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है।

नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की योजना भी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

करीब 25 हजार स्वयंसेवकों की रही भूमिका

शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने के अभियान में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में हासिल इस उपलब्धि को राज्य के लिए गौरव का विषय बताया।

उन्होंने कहा कि अब अगले छह महीने में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत तक पहुंचाने के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में भी उत्तराखंड तेजी से आगे बढ़ रहा है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।

पूर्ण साक्षरता के बाद उत्तराखंड के सामने नई चुनौती

उत्तराखंड का पूर्ण साक्षर राज्य बनना निश्चित रूप से एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब चुनौती इस उपलब्धि को स्थायी और प्रभावी बनाने की है। साक्षरता अभियान के बाद नव-साक्षरों को निरंतर शिक्षा, डिजिटल जानकारी और जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।

उत्तराखंड ने 2023-24 में 83.8 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 98.7 प्रतिशत साक्षरता दर तक पहुंचने की उपलब्धि दर्ज की है। अब सरकार के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि साक्षरता केवल आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा असर लोगों के जीवन, रोजगार, आर्थिक निर्णयों और सामाजिक भागीदारी में भी दिखाई दे।

कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

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