One Nation One Election: 2029 तक लागू हो सकता है बड़ा चुनावी सुधार, Joint Parliamentary Committee ने दिया बड़ा संकेत

नई दिल्ली/गोवा:

देश में “One Nation, One Election” लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार की तैयारी अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। संसद की संयुक्त समिति (Joint Parliamentary Committee – JPC) के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने संकेत दिया है कि समिति ऐसी रूपरेखा तैयार कर रही है, जिससे 2029 के लोकसभा चुनाव तक पूरे देश में एक साथ चुनाव “One Nation, One Election” कराने की व्यवस्था लागू की जा सके।

गोवा में आयोजित दो दिवसीय बैठक के दौरान समिति ने संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान राज्य सरकारों, संवैधानिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और सिविल सोसाइटी से प्राप्त सुझावों पर भी विचार किया गया।

2029 तक लागू करने की दिशा में काम

Breffing on One Nation One Election

समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने कहा कि फिलहाल विभिन्न विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उद्देश्य ऐसी चुनावी व्यवस्था तैयार करना है, जिसे सभी प्रमुख राजनीतिक दल स्वीकार कर सकें।

उन्होंने संकेत दिया कि यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं तो 2029 के आम चुनाव तक “One Nation, One Election” व्यवस्था लागू की जा सकती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय संसद, राजनीतिक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।

One Nation, One Election का 99 प्रतिशत हितधारकों ने किया समर्थन का दावा

पी.पी. चौधरी ने दावा किया कि समिति ने अब तक जिन हितधारकों से चर्चा की है, उनमें से लगभग 99 प्रतिशत लोगों ने “One Nation, One Election” प्रस्ताव का समर्थन किया है।

इन हितधारकों में शामिल हैं—

  • संवैधानिक विशेषज्ञ
  • शिक्षाविद
  • सिविल सोसाइटी संगठन
  • पूर्व प्रशासनिक अधिकारी
  • विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ

समिति का कहना है कि लगातार होने वाले चुनावों से प्रशासनिक मशीनरी और सरकारी संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है।

बार-बार चुनाव से सात लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक प्रभाव

समिति के अनुसार, देश में अलग-अलग समय पर होने वाले चुनावों के कारण प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 7 लाख करोड़ रुपये तक का आर्थिक प्रभाव पड़ता है।

समिति का मानना है कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाएं तो—

  • सरकारी खर्च में भारी कमी आएगी।
  • प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा।
  • बार-बार लागू होने वाली आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
  • सुरक्षा बलों की तैनाती अधिक प्रभावी होगी।
  • शासन और विकास परियोजनाओं की गति तेज होगी।

गोवा में हुई महत्वपूर्ण बैठक

गोवा में आयोजित बैठक की शुरुआत मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत और उनके मंत्रिमंडल के साथ चर्चा से हुई।

बैठक में निम्न प्रमुख विषयों पर विचार किया गया—

  • एक साथ चुनाव कराने की व्यावहारिक चुनौतियां
  • राज्यों की संवैधानिक भूमिका
  • चुनावी समन्वय
  • प्रशासनिक तैयारी
  • राज्यों के सुझाव

समिति ने इन सुझावों को अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कई राज्यों का दौरा कर चुकी है समिति

पी.पी. चौधरी ने बताया कि समिति अब तक कई राज्यों का दौरा कर चुकी है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • गुजरात
  • महाराष्ट्र
  • कर्नाटक
  • हिमाचल प्रदेश
  • उत्तराखंड
  • पंजाब
  • हरियाणा
  • दिल्ली

इन राज्यों में विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थाओं से व्यापक परामर्श लिया गया है।

क्या 2029 से पहले भी लागू हो सकती है व्यवस्था?

समिति ने एक महत्वपूर्ण संभावना भी जताई है।

यदि कुछ राज्य सरकारें और राजनीतिक दल स्वेच्छा से अपने चुनावी कार्यक्रमों का समन्वय करने पर सहमत होते हैं, तो 2029 से पहले भी कुछ राज्यों में “One Nation, One Election” मॉडल लागू किया जा सकता है।

हालांकि इसके लिए संवैधानिक और राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी।

क्या है संविधान (129वां संशोधन) विधेयक?

यह प्रस्तावित संशोधन देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने के लिए संवैधानिक व्यवस्था तैयार करने से जुड़ा है।

इसके तहत कई संवैधानिक प्रावधानों में संशोधन की आवश्यकता होगी ताकि चुनावी चक्र को एक समान बनाया जा सके।

राजनीतिक सहमति होगी सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि समिति समर्थन का दावा कर रही है, लेकिन इस सुधार के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति आवश्यक होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि—

  • राज्यों के कार्यकाल का समायोजन
  • संवैधानिक संशोधन
  • विभिन्न राजनीतिक दलों की सहमति
  • चुनाव आयोग की तैयारी

जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर अंतिम निर्णय होना बाकी है।

One Nation One Election: 28% कम हो जाएगा चुनावी स्टाफ?

देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है यह सुधार

यदि “One Nation, One Election” व्यवस्था लागू होती है, तो भारतीय चुनावी प्रणाली में यह स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े चुनावी सुधारों में से एक होगा।

इससे न केवल चुनावी प्रक्रिया में व्यापक बदलाव आएगा, बल्कि शासन, प्रशासन और सार्वजनिक व्यय की व्यवस्था पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।

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