दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर अंकिता भंडारी केस की चर्चा तेज, राजनीतिक रणनीति और आरोपों पर उठे सवाल – Eviral Press

दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर अंकिता भंडारी केस की चर्चा तेज, राजनीतिक रणनीति और आरोपों पर उठे सवाल

देहरादून। उत्तराखंड में अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद कांग्रेस की ओर से इस नियुक्ति और अंकिता भंडारी मामले को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंकिता के परिवार को न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के पीछे दलित, विशेषकर जाटव समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आगामी चुनावों से जुड़े समीकरणों की चर्चा भी हो रही है।

लेकिन इस पूरे विवाद में तीन अलग-अलग सवालों को अलग रखना जरूरी है—दुष्यंत गौतम की राज्यपाल के रूप में नियुक्ति, अंकिता भंडारी मामले में उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप और भाजपा की कथित राजनीतिक रणनीति। इनमें से किसी भी राजनीतिक दावे को आधिकारिक पुष्टि या विश्वसनीय साक्ष्य के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने पर सवाल: अंकिता भंडारी केस, जाटव समीकरण और भाजपा की रणनीति की चर्चा

राहुल गांधी ने परिवार के साथ जताया समर्थन

14 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा दिल्ली के इंडिया गेट पहुंचे, जहां अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे थे। कांग्रेस नेताओं ने परिवार के साथ एकजुटता जताई और दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने पर सवाल उठाए। परिवार ने मांग की है कि कथित VIP एंगल की जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। यह मांग फिलहाल परिवार और कांग्रेस का पक्ष है; नियुक्ति रोकने का कोई निर्णय घोषित नहीं हुआ है।

राहुल गांधी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि अंकिता के परिवार को चार साल बाद भी न्याय नहीं मिला, जबकि कथित VIP को संवैधानिक पद का इनाम दिया गया। उन्होंने भाजपा पर महिला सुरक्षा और न्याय के मुद्दे पर सवाल उठाए। इन आरोपों को राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी अदालत के निष्कर्ष के रूप में।

अंकिता भंडारी केस में दुष्यंत गौतम का नाम क्यों चर्चा में है?

अंकिता भंडारी पौड़ी गढ़वाल जिले के वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो कर्मचारियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हाल के महीनों में कथित VIP की पहचान को लेकर सवाल फिर उठे हैं। अंकिता के माता-पिता ने दुष्यंत गौतम का नाम लेते हुए जांच की मांग की है। दूसरी ओर, गौतम के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर कानूनी विवाद भी सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियों या अदालत ने उन्हें अंकिता की हत्या के मामले में आरोपी के रूप में स्थापित नहीं किया है। कथित VIP की पहचान और भूमिका को लेकर परिवार की मांग है कि जांच पूरी पारदर्शिता से हो।

इसलिए दो बातों को अलग रखना जरूरी है: परिवार को निष्पक्ष जांच की मांग करने का अधिकार है, लेकिन किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करना जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है। दुष्यंत गौतम को कथित VIP बताने वाले दावे को स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति के पीछे जाटव समीकरण है

दुष्यंत गौतम भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे हैं। वे दलित समुदाय के जाटव समाज से आते हैं। इसी वजह से उनकी नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विश्लेषण में सामाजिक प्रतिनिधित्व और चुनावी समीकरणों की चर्चा हो रही है।

उत्तर प्रदेश में मायावती और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेता जाटव समाज की राजनीति से जुड़े रहे हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले दलित मतदाताओं का प्रतिनिधित्व राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण विषय है। ऐसे में भाजपा के एक प्रमुख जाटव नेता को राज्यपाल बनाए जाने को कुछ लोग सामाजिक प्रतिनिधित्व के नजरिए से देख रहे हैं।

लेकिन यह दावा कि भाजपा ने अंकिता भंडारी मामले से पैदा होने वाले राजनीतिक नुकसान की काट के रूप में ही गौतम को राज्यपाल बनाया, अभी तक आधिकारिक रूप से प्रमाणित नहीं है। राष्ट्रपति की नियुक्ति संबंधी घोषणा में इस निर्णय के पीछे किसी जातीय या चुनावी रणनीति का उल्लेख नहीं किया गया है।

भाजपा ने विरोध की आशंका के बावजूद फैसला लिया?

यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर नियुक्ति से विवाद होने की आशंका थी, तो भाजपा नेतृत्व ने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाने का निर्णय क्यों लिया। इसका निश्चित उत्तर देने के लिए पार्टी के आंतरिक निर्णय या नेतृत्व की आधिकारिक टिप्पणी उपलब्ध नहीं है।

संभव है कि नियुक्ति को उनके संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक पृष्ठभूमि के आधार पर देखा जाए। दूसरी ओर, अंकिता के परिवार के विरोध ने इस नियुक्ति को संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। इन दोनों पहलुओं को साथ रखकर देखना जरूरी है, लेकिन किसी कथित रणनीति को तथ्य मान लेना सही नहीं होगा।

असली सवाल: जांच और न्याय पर भरोसा कैसे कायम होगा?

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष अंकिता भंडारी के परिवार की न्याय की मांग है। राज्यपाल की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक बहस अपनी जगह है, लेकिन उससे यह सवाल खत्म नहीं होता कि कथित VIP एंगल की जांच में क्या सामने आएगा।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति 12 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति की ओर से घोषित की गई थी। अब परिवार और कांग्रेस की मांग है कि कथित VIP एंगल की जांच पूरी होने तक नियुक्ति पर पुनर्विचार किया जाए। केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं की ओर से इस मांग पर किसी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल तथ्य यह है कि दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, अंकिता भंडारी के परिवार ने इस नियुक्ति का विरोध किया है और कांग्रेस ने परिवार की मांग का समर्थन किया है। नियुक्ति के पीछे कथित जातीय रणनीति या मामले से जुड़ी किसी भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार करना आवश्यक है।

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