देहरादून। देहरादून ऋषिकेश फोर लेन परियोजना को लेकर पिछले कई दिनों से उठ रहे पर्यावरणीय और जनहित से जुड़े सवालों के बीच उत्तराखण्ड सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन जनभावनाओं, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों की अनदेखी कर कोई भी निर्णय नहीं लिया जाएगा। उन्होंने परियोजना से जुड़े सभी पक्षों के साथ व्यापक संवाद कराने के निर्देश दिए हैं और तब तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद परियोजना को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ मिल गया है। पर्यावरणविदों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार उठाई जा रही चिंताओं को सरकार ने गंभीरता से लिया है।
मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देहरादून ऋषिकेश फोर लेन परियोजना भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा संचालित एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजना है। इस परियोजना पर उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा सभी आवश्यक वैधानिक और पर्यावरणीय स्वीकृतियों का पालन करते हुए कार्यवाही की जा रही थी।
उन्होंने कहा कि सरकार विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। इसलिए प्रमुख सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानीय नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों के साथ पुनः विस्तृत चर्चा की जाए।
पेड़ों की कटाई फिलहाल रहेगी स्थगित

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सभी पक्षों के बीच विश्वास और सहमति का वातावरण तैयार नहीं हो जाता, तब तक परियोजना के दायरे में आने वाले पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी।
सरकार का मानना है कि संवाद के माध्यम से ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिससे विकास कार्य भी प्रभावित न हों और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाई गई योजना
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
इनमें शामिल हैं—
- लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा हाथी अंडरपास।
- छोटे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए विशेष कल्वर्ट।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के उपाय।
- सड़क दुर्घटनाओं में वन्यजीवों की मृत्यु रोकने की व्यवस्था।
सरकार का कहना है कि इन उपायों से वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी और जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
उच्च न्यायालय के निर्देशों का होगा पूर्ण पालन
मुख्यमंत्री ने कहा कि परियोजना से संबंधित सभी कार्यवाही उच्च न्यायालय के निर्देशों और कानून के अनुरूप ही की जाएगी। न्यायालय के आदेशों का सम्मान करते हुए आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी प्रकार का निर्णय जल्दबाजी में नहीं करेगी।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील राज्य में सड़क संपर्क अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दूसरी ओर जंगलों और जैव विविधता की सुरक्षा भी समान रूप से आवश्यक है।
इसी कारण देहरादून ऋषिकेश फोर लेन परियोजना को लेकर सरकार अब संवाद आधारित समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी हितधारकों की सहमति से परियोजना आगे बढ़ती है तो भविष्य में विवादों की संभावना भी कम होगी और विकास कार्य अधिक सुचारु रूप से पूरे किए जा सकेंगे।
स्थानीय लोगों की चिंताओं पर सरकार गंभीर
पिछले कुछ दिनों से सामाजिक संगठनों, पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों द्वारा पेड़ों की कटाई, वन क्षेत्र पर प्रभाव और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे थे।
मुख्यमंत्री के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि सरकार इन सभी सुझावों और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर परियोजना में आवश्यक सुधार भी किए जा सकते हैं।
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उत्तराखण्ड सरकार का स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की प्रकृति, जनभावनाएँ और प्रदेश का विकास—तीनों सरकार के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। सरकार संवाद, सहमति और व्यापक जनहित को आधार बनाकर आगे बढ़ेगी, ताकि विकास और पर्यावरण दोनों के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।
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