(देवभूमि उत्तराखंड से बड़ी खबर)
📍 देहरादून/रुद्रप्रयाग | Eviralpress Special
देवभूमि उत्तराखंड के चारधाम—बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—एक बार फिर देशव्यापी बहस के केंद्र में हैं। इस बार मुद्दा है चारधामों की पवित्रता, परंपरा और सुरक्षा, और प्रस्ताव है—गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध (NO ENTRY)।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को अब तीर्थ पुरोहित समाज का खुला और मजबूत समर्थन मिल गया है। यही वजह है कि यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, प्रशासनिक और राजनीतिक विमर्श का भी बड़ा विषय बन गया है।
🛕 क्यों उठा ‘NO ENTRY’ का मुद्दा?
चारधाम हिंदू आस्था के सबसे पवित्र केंद्र माने जाते हैं। हर साल लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में—
- अनुशासनहीनता के मामले
- रील्स और सोशल मीडिया कंटेंट के नाम पर मर्यादा उल्लंघन
- सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ती चिंताएं
इन सबने धार्मिक संगठनों को यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या चारधामों की मूल सनातन परंपरा सुरक्षित है?
यहीं से जन्म हुआ उस प्रस्ताव का, जिसमें गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई।
🧘♂️ पुरोहित समाज का दो टूक स्टैंड
केदारनाथ धाम के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित और चारधाम तीर्थ पुरोहित महासंगठन के उपाध्यक्ष संतोष त्रिवेदी ने इस प्रस्ताव को ऐतिहासिक और आवश्यक कदम बताया है।
उनका कहना है:
“चारधाम केवल पर्यटन स्थल नहीं हैं, ये सनातन संस्कृति के जीवंत केंद्र हैं। यहाँ अनुशासन, आस्था और मर्यादा सर्वोपरि होनी चाहिए। यह फैसला पवित्रता और सुरक्षा—दोनों को मजबूत करेगा।”
पुरोहित समाज का मानना है कि यह कदम—
- श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा करेगा
- धार्मिक अनुशासन को पुनर्स्थापित करेगा
- बाहरी अव्यवस्था और अनावश्यक गतिविधियों पर रोक लगाएगा
🌊 गंगोत्री से हरिद्वार तक फैलती मांग
यह मांग अब सिर्फ बदरीनाथ और केदारनाथ (BKTC) तक सीमित नहीं रही।
- गंगोत्री मंदिर समिति पहले ही गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक का निर्णय ले चुकी है
- हरिद्वार में हरकी पैड़ी समेत कई प्रमुख धार्मिक स्थलों पर संत समाज लगातार ऐसी मांग उठा रहा है
धार्मिक संगठनों का तर्क साफ है—
👉 “जहाँ आस्था है, वहाँ अनुशासन जरूरी है।”
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🏛️ BKTC की बोर्ड बैठक पर सबकी नजर
सूत्रों के मुताबिक, बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) की आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से रखा जाएगा।
अगर यह प्रस्ताव पास हो जाता है, तो—
- चारधामों में प्रवेश नियमों में बड़ा बदलाव
- पहचान और धार्मिक आस्था के आधार पर एंट्री सिस्टम
- प्रशासनिक स्तर पर नई गाइडलाइंस
लागू की जा सकती हैं।
🗣️ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने क्या कहा?

इस संवेदनशील मुद्दे पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संतुलित और परिपक्व बयान दिया है।
सीएम धामी ने कहा:
“राज्य सरकार धार्मिक संगठनों और संत समाज की भावनाओं का पूरा सम्मान करती है। जो भी निर्णय होगा, वह कानून और परंपरा के दायरे में रहकर लिया जाएगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि—
- पुराने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है
- धार्मिक संस्थाओं की राय को प्राथमिकता दी जाएगी
यानी सरकार टकराव नहीं, संतुलन के रास्ते पर चलना चाहती है।
⚖️ कानूनी और सामाजिक बहस भी तेज
जहाँ एक ओर संत-पुरोहित समाज इस प्रस्ताव का स्वागत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर—
- संवैधानिक अधिकार
- धार्मिक स्वतंत्रता
- समानता के सिद्धांत
जैसे मुद्दों पर बहस भी शुरू हो चुकी है।
हालांकि समर्थकों का कहना है कि— 👉 यह प्रतिबंध आस्था आधारित स्थलों तक सीमित है, न कि सार्वजनिक स्थानों पर।
चारधाम केवल भौगोलिक स्थल नहीं, बल्कि हिंदू सभ्यता की आत्मा हैं। इतिहास गवाह है कि हर धर्म अपने पवित्र स्थलों की मर्यादा तय करता है—चाहे वह भारत हो या दुनिया का कोई और कोना।
यह प्रस्ताव परंपरा बनाम आधुनिकता की बहस नहीं, बल्कि आस्था बनाम अराजकता का प्रश्न बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि BKTC और राज्य सरकार इस संतुलन को कैसे साधते हैं।
