हेडलाइनसिप ब्यूरो
2027 में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट कर दिया है कि उपराष्ट्रपति पद किसी सहयोगी दल को नहीं, बल्कि पार्टी के अपने विश्वस्त नेता को ही दिया जाएगा।
पार्टी के शीर्ष सूत्रों ने Headlinesip Bureau को बताया कि “यह निर्णय विचारधारा की स्पष्टता और संगठनात्मक प्रतिबद्धता को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है।” इसके संकेत कुछ दिन पहले बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और वरिष्ठ नेताओं की कोर ग्रुप बैठक के बाद मिलने शुरू हो गए थे।
बताया जा रहा है कि जिस व्यक्ति का नाम लगभग तय माना जा रहा है, वह वर्षों से पार्टी से जुड़ा हुआ है और आरएसएस की विचारधारा का मजबूत पक्षधर है। यह नाम संघ और संगठन दोनों की सहमति से आगे बढ़ाया जा रहा है।
यह कदम ऐसे समय पर आ रहा है जब एनडीए के कई सहयोगी दल उपराष्ट्रपति पद के लिए अपने दावेदारों को लेकर सक्रिय थे। लेकिन बीजेपी ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि शीर्ष संवैधानिक पदों पर अब पार्टी “अकेले दम” पर फैसले लेगी।
राजनीतिक संदेश स्पष्ट:
यह फैसला केवल एक पद भरने का नहीं, बल्कि सहयोगी दलों को सख्त संदेश देने का भी माध्यम माना जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत मिलने के बाद बीजेपी अब अपने “core control” मॉडल पर आगे बढ़ रही है — जिसमें बड़े फैसले सिर्फ पार्टी द्वारा ही लिए जाएंगे।
अब यह देखना रोचक होगा कि नाम की औपचारिक घोषणा कब होती है और विपक्ष इसकी प्रतिक्रिया में क्या रुख अपनाता है।
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