18% बनाम 0% के गणित ने क्यों भड़का दिया देश का अन्नदाता?
देश एक बार फिर बड़े किसान आंदोलन की दहलीज पर खड़ा है।
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने 12 फरवरी को ‘देशव्यापी आम हड़ताल’ (Bharat Bandh / Nationwide General Strike) का ऐलान कर सरकार को सीधा अल्टीमेटम दे दिया है।
इस बार मामला सिर्फ नीतियों का विरोध नहीं, बल्कि केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के इस्तीफे की मांग तक पहुंच चुका है।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)SKM का आरोप बेहद गंभीर है—
👉 “बंद कमरों में ऐसे ट्रेड डील किए जा रहे हैं जो किसानों से किए गए सार्वजनिक वादों के ठीक उलट हैं। यह सीधा विश्वासघात है।”
🔥 नीतियों से आगे निकली लड़ाई, अब जवाबदेही की मांग
अब तक किसान MSP, आयात-निर्यात और फसल सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आंदोलन करते रहे हैं, लेकिन 12 फरवरी का भारत बंद एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
SKM नेताओं का साफ कहना है—
“अगर मंत्री अपने वचनों की रक्षा नहीं कर सकते, तो उन्हें पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।”
यही वजह है कि इस बार आंदोलन का केंद्रबिंदु Accountability है, न कि केवल Policy Review।
❗ ‘रेड लाइन’ का दावा और ‘बैकडोर एंट्री’ का आरोप
सरकार बार-बार कहती रही है कि
कृषि और डेरी सेक्टर भारत की ‘रेड लाइन्स’ हैं,
यानी इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को सीधी छूट नहीं मिलेगी।
लेकिन SKM का दावा है कि—
- सीधे “खेती” शब्द से बचकर
- Processed Food, Value Added Products और Agri-Business Framework के ज़रिए
विदेशी कंपनियों को पिछले दरवाज़े से एंट्री दी जा रही है।
किसानों को डर है कि यह धीरे-धीरे
👉 भारतीय मंडियों पर कॉरपोरेट कब्जे की जमीन तैयार कर रहा है।
💣 18% बनाम 0% — वही आंकड़ा जिसने आग लगा दी
इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बना है Asymmetric Trade Model।
SKM का सवाल सीधा है—
“जब अमेरिका भारतीय कृषि उत्पादों पर 18% टैरिफ लगाता है
और भारत अमेरिकी उत्पादों पर 0% ड्यूटी देता है,
तो इसे फ्री ट्रेड नहीं, आर्थिक आत्महत्या कहते हैं।”
इसका सीधा असर:
- 🇮🇳 भारतीय निर्यात महंगा → अमेरिका में नहीं बिकेगा
- 🇺🇸 अमेरिकी आयात सस्ता → भारतीय मंडियों में बाढ़
- 🌾 किसान की लागत भी नहीं निकलेगी
बादाम, सेब, सोयाबीन, दालें—सब कुछ विदेशी और सस्ता।
यही वह बिंदु है जहाँ किसानों का धैर्य टूट गया।
🥛 डेरी सेक्टर पर खतरा: 10 करोड़ परिवारों की चिंता
भारत का ग्रामीण अर्थशास्त्र डेरी सेक्टर की रीढ़ पर टिका है।
SKM को आशंका है कि Zero Tariff Policy से—
- सस्ता विदेशी Milk Powder और Butter Oil भारत में आएगा
- Amul, Mother Dairy जैसी संस्थाएं दबाव में आएंगी
- दूध के दाम गिरेंगे
- छोटा पशुपालक कर्ज में डूबेगा
किसानों का आरोप है कि यह सब
👉 कॉरपोरेट लॉबी के दबाव में हो रहा है।
🚜 12 फरवरी: सड़क से संसद तक असर
12 फरवरी 2026 को देश के कई हिस्सों में—
- 🛑 मंडियां बंद
- 🚧 हाईवे और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
- 📢 एक ही नारा— “कृषि बचाओ, पीयूष गोयल हटाओ”
यह हड़ताल बजट सत्र के बीच सरकार के लिए राजनीतिक और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चुनौती बन सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस, पॉलीहाउस और फसल बीमा पर सख्त निर्देश
🔮 आगे क्या?
अगर 12 फरवरी के बाद—
- सरकार ने ठोस बातचीत नहीं की
- या ट्रेड फ्रेमवर्क में पारदर्शिता नहीं लाई
तो यह आंदोलन लंबा और उग्र हो सकता है—
जैसा देश पहले भी देख चुका है।
कभी नारा था— “किसानों की आय दोगुनी होगी”
आज सवाल है— “क्या किसान अपनी आय बचा पाएगा?”
18% बनाम 0% का यह संघर्ष तकनीकी नहीं,
👉 यह अस्तित्व की लड़ाई है।
12 फरवरी तय करेगा—
सरकार अपने मंत्री के साथ खड़ी होती है
या अपने अन्नदाता के साथ।
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