गैरसैंण विधानसभा सत्र में 7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट, कुंभ से पेयजल योजनाओं तक बड़े प्रावधान – Eviral Press

गैरसैंण विधानसभा सत्र में 7,844 करोड़ का अनुपूरक बजट, कुंभ से पेयजल योजनाओं तक बड़े प्रावधान

उत्तराखंड विधानसभा के पांचवें कार्यकाल के तीसरे सत्र का 28 अक्टूबर 2026 को गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में समापन हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सत्र के समापन के बाद प्रेस वार्ता में कहा कि गैरसैंण में एक वर्ष में दो विधानसभा सत्रों का आयोजन राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और प्रदेश की जनभावनाओं के सम्मान का प्रतीक है। सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 7,844.18 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट और विभिन्न विधेयक सदन के पटल पर रखे गए।

अनुपूरक बजट में धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों, पेयजल परियोजनाओं, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र, शहरी विकास, स्थानीय निकायों तथा आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन संसाधनों के माध्यम से प्रदेश में विकास कार्यों को गति देने और जनसुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा।

 

पूंजीगत विकास के लिए 4,164 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान

वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट का कुल आकार 7,844.18 करोड़ रुपये है। इसमें 4,164.32 करोड़ रुपये पूंजीगत मद और 3,679.86 करोड़ रुपये राजस्व मद में प्रस्तावित किए गए हैं। इस तरह अनुपूरक बजट में आधे से अधिक धनराशि पूंजीगत व्यय के लिए रखी गई है।

राज्य के मूल बजट का आकार 1,11,703.21 करोड़ रुपये था। अनुपूरक बजट जुड़ने के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के कुल बजट का आकार 1,19,547.39 करोड़ रुपये हो जाएगा।

बजट में सड़क, पेयजल, ऊर्जा, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक अवसंरचना से संबंधित योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया गया है। इन मदों के माध्यम से पहले से संचालित योजनाओं को आगे बढ़ाने और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर जोर दिया गया है।

दिव्य कुंभ की तैयारियों के लिए लगभग 290 करोड़ रुपये

हरिद्वार में आगामी दिव्य कुंभ की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए अनुपूरक बजट में अवस्थापना सुविधाओं के लिए विभिन्न मदों के अंतर्गत समग्र रूप से लगभग 290 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की आवाजाही, आधारभूत सुविधाओं और व्यवस्थागत तैयारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बजट में किए गए इन प्रावधानों का उद्देश्य आयोजन से संबंधित आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना है।

हरिद्वार-गंगा कॉरिडोर परियोजना के लिए भी पूंजीगत मद में 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। इसके माध्यम से परियोजना से संबंधित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है।

नंदा राजजात यात्रा के लिए 20 करोड़ रुपये

उत्तराखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी नंदा राजजात यात्रा के लिए अनुपूरक बजट में 20 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। यह राशि पूंजीगत मद में रखी गई है।

नंदा राजजात यात्रा प्रदेश की विशिष्ट धार्मिक परंपराओं में शामिल है। इससे जुड़ी व्यवस्थाओं और आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए बजट में धनराशि रखे जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

गैरसैंण जलापूर्ति बांध परियोजना को 122 करोड़ रुपये

प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जलापूर्ति बांध परियोजना के लिए 122 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता और बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जलापूर्ति से जुड़ी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं। अनुपूरक बजट में इस परियोजना को स्थान मिलने से गैरसैंण क्षेत्र की पेयजल आवश्यकताओं के लिए वित्तीय प्रावधान का रास्ता तैयार हुआ है।

इसके अलावा जल जीवन मिशन के अंतर्गत ठेकेदारों के बकाया भुगतान और अन्य आवश्यकताओं के लिए 300 करोड़ रुपये रखे गए हैं। पेयजल विभाग की केएफडब्ल्यू परियोजना के लिए भी लगभग 110 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।

जोशीमठ सहित आपदा प्रभावित क्षेत्रों पर ध्यान

उत्तराखंड के आपदा संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों के लिए भी अनुपूरक बजट में संसाधन रखे गए हैं। जोशीमठ और अन्य स्थानों पर भू-धंसाव से संबंधित आवश्यक कार्यों के लिए लगभग 48 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

पर्वतीय भूगोल और प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। बजट में इस मद को शामिल करने का उद्देश्य ऐसे क्षेत्रों में आवश्यक कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायता देना है।

स्थानीय निकायों को अतिरिक्त 721 करोड़ रुपये

अनुपूरक बजट में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है।

छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों को स्वीकार करते हुए स्थानीय निकायों के लिए राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

इस प्रावधान से ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों को स्थानीय विकास कार्यों तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़ी जरूरतों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।

सड़क, ऊर्जा और शहरी विकास के लिए भी धनराशि

प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए विशेष सहायता योजना (SASCI) के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये का पूंजीगत प्रावधान किया गया है।

ऊर्जा क्षेत्र में खुरपिया फार्म परियोजना सहित पारेषण और वितरण व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न मदों में लगभग 270 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। शहरी विकास विभाग की एशियाई विकास बैंक से पोषित योजनाओं के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था रखी गई है।

पुलिस विभाग के आवासीय एवं अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए लगभग 55 करोड़ रुपये और न्यायिक अवसंरचना सुविधाओं के लिए लगभग 22 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। पंचायत भवनों के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के अनुरक्षण सहित लोक निर्माण विभाग के लिए 31 करोड़ रुपये तथा ग्राम्य विकास विभाग के लिए 30 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं।

सदन के पटल पर रखे गए 10 विधेयक और दो अध्यादेश

विधानसभा सत्र के दौरान सदन के पटल पर 10 विधेयक रखे गए। इनमें उत्तराखंड विनियोग (2026-27 का अनुपूरक) विधेयक, उत्तराखंड सिंचाई जल निकासी विधेयक और मुख्यमंत्री उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक शामिल हैं।

इसके अलावा उत्तराखंड निवेश और आधारभूत संरचना (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, उत्तराखंड जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) द्वितीय विधेयक, अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन विधेयक, उत्तराखंड सिविल विधि संशोधन विधेयक, अग्निशमन एवं आपात सेवा विधेयक, माल और सेवा कर संशोधन विधेयक तथा निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक भी सूची में शामिल हैं।

सदन के पटल पर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम संशोधन अध्यादेश और उत्तराखंड माल और सेवा कर संशोधन अध्यादेश भी रखे गए।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष से सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की

सत्र के समापन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विधानसभा लोकतंत्र का महत्वपूर्ण मंच है, जहां जनप्रतिनिधियों को जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करने के बजाय लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप अपनी बात रखनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर जनहित के विषयों पर सार्थक चर्चा के बजाय राजनीतिक विरोध को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद प्रदेश के विकास और जनता के हितों को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए।

उन्होंने समान नागरिक संहिता, सख्त भू-कानून और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार वर्ष 2022 में जनता के सामने रखे गए दृष्टिपत्र के अनुरूप निर्णय ले रही है। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन, रामपुर तिराहा कांड और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी राजनीतिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता बताई।

मुख्यमंत्री ने भ्रष्टाचार के आरोपों पर सरकार का पक्ष रखते हुए पारदर्शिता और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना, रोजगार के अवसर बढ़ाना और जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है।

गैरसैंण में संपन्न हुए विधानसभा सत्र में अनुपूरक बजट के माध्यम से धार्मिक आयोजनों, पेयजल, आपदा प्रबंधन, सड़क, ऊर्जा और स्थानीय निकायों के लिए अतिरिक्त संसाधनों का प्रस्ताव सामने आया। इन बजटीय प्रावधानों का वास्तविक लाभ संबंधित परियोजनाओं के क्रियान्वयन, धनराशि के उपयोग और निर्धारित कार्यों की प्रगति पर निर्भर करेगा।

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