देहरादून: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच और न्यायिक कार्यवाही को लेकर पुलिस मुख्यालय, देहरादून में गुरुवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) डॉ. वी. मुरुगेशन ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में ऋषिकेश के निकट वनंतरा रिजॉर्ट में हुई इस घटना के बाद उत्तराखंड पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और जांच पूरी होने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया।
इस मामले में 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। पुलिस के अनुसार, तीनों दोषी वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं।
घटना के 24 घंटे के भीतर हुई थी गिरफ्तारी

अंकिता भंडारी वनंतरा रिजॉर्ट में कार्यरत थीं। सितंबर 2022 में उनके लापता होने की खबर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। बाद में उनकी हत्या का खुलासा हुआ, जिससे पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया था। मामले ने महिला सुरक्षा और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से सामने ला दिया।
डॉ. वी. मुरुगेशन के अनुसार, घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर पुलिस टीमों ने आपसी समन्वय से तीनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया था। शुरुआती कार्रवाई के बाद मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए जांच को विशेष स्तर पर आगे बढ़ाया गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई SIT
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था। डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि DIG स्तर की महिला IPS अधिकारी को SIT का अध्यक्ष बनाया गया, ताकि मामले की गहन और प्रभावी जांच सुनिश्चित की जा सके।
SIT ने जांच के दौरान डिजिटल, तकनीकी, फॉरेंसिक और भौतिक साक्ष्य जुटाए। इसके अतिरिक्त अभियुक्तों से पूछताछ की गई और फॉरेंसिक रिपोर्टों तथा गवाहों के बयानों सहित सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया।
88 दिन में जांच पूरी, करीब 500 पन्नों का आरोपपत्र
ADG के अनुसार, SIT ने 88 दिनों के भीतर जांच पूरी कर लगभग 500 पृष्ठों का विस्तृत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसमें जांच के दौरान जुटाए गए महत्वपूर्ण साक्ष्यों और तथ्यों को शामिल किया गया।
किसी भी आपराधिक मामले में आरोपपत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इसके आधार पर अभियोजन न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करता है। अंतिम निर्णय साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर न्यायालय द्वारा किया जाता है।
30 मई 2025 को तीनों दोषियों को उम्रकैद

मामले की सुनवाई के बाद 30 मई 2025 को कोटद्वार स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई।
डॉ. मुरुगेशन ने बताया कि उत्तराखंड शासन की ओर से मामले की त्वरित सुनवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक प्रयास किए गए। पुलिस के अनुसार, जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की पैरवी ने न्यायालय में मामला प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
महिला सुरक्षा को लेकर भी उठे थे सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा। इस मामले ने महिला सुरक्षा, कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ व्यवहार और संवेदनशील आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच जैसे मुद्दों पर व्यापक बहस को जन्म दिया।
घटना के बाद उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन हुए और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग उठी। मामले की संवेदनशीलता के कारण पुलिस जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया पर पूरे देश की नजर रही।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, साक्ष्यों का संरक्षण और न्यायालय में प्रभावी पैरवी महत्वपूर्ण माने जाते हैं। साथ ही, पीड़ित परिवार की चिंताओं और न्याय से जुड़ी मांगों को सुनना भी सार्वजनिक विमर्श का अहम हिस्सा रहता है।
पुलिस मुख्यालय की प्रेस वार्ता में क्या बताया गया?

ADG डॉ. वी. मुरुगेशन की प्रेस वार्ता में पुलिस ने इस मामले में की गई कार्रवाई, SIT की जांच, आरोपपत्र दाखिल करने और न्यायालय से मिली सजा का विवरण प्रस्तुत किया।
पुलिस के अनुसार, घटना सामने आने के बाद गिरफ्तारी से लेकर जांच पूरी करने और न्यायालय में अभियोजन की प्रक्रिया तक विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की गई। तीनों दोषियों को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
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