उत्तराखंड THDC टनल हादसा ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टनल में मलबा और पानी भरने से कई श्रमिक अंदर फंस गए। गुरुवार शाम हुई इस घटना के बाद पूरी रात युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया गया। ताजा जानकारी के अनुसार टनल में फंसे 22 लोगों में से 19 लोगों को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि 7 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है और शेष 3 लोगों की तलाश जारी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, पुलिस और जिला प्रशासन को समन्वित तरीके से रेस्क्यू अभियान चलाने के निर्देश दिए। शुक्रवार को मुख्यमंत्री स्वयं खराब मौसम के बावजूद पीपलकोटी पहुंचे और घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण किया।
कैसे हुआ उत्तराखंड THDC टनल हादसा

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम लगभग 7:05 बजे टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में अचानक भूधंसाव के कारण मलबा और पानी का तेज बहाव अंदर पहुंच गया। हादसा टनल के लगभग 1.50 किलोमीटर अंदर हुआ, जहां निर्माण कार्य चल रहा था।
यह टनल विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना का हिस्सा है और इसकी कुल लंबाई लगभग 3 किलोमीटर बताई गई है। घटना के समय टनल के भीतर कार्यरत श्रमिकों के फंसने की सूचना मिली, जिसके बाद तुरंत बचाव अभियान शुरू किया गया।
22 लोग फंसे, 19 को सुरक्षित बाहर निकाला गया
जिला प्रशासन के अनुसार टनल में कुल 22 लोगों के फंसे होने की सूचना थी। रातभर चले रेस्क्यू अभियान में 19 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि बचाव कार्य के लिए टनल के अंदर गए सभी 6 बचावकर्मी सुरक्षित हैं।
घटना में अब तक 7 लोगों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। शेष 3 लोगों की तलाश के लिए मलबा हटाने और पानी की निकासी का काम लगातार जारी है।
युद्धस्तर पर चला रेस्क्यू अभियान

हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। टनल के भीतर मलबा, पानी और सीमित पहुंच जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद बचाव दल लगातार अभियान में जुटे रहे।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भारी मशीनरी, तकनीकी उपकरण और विशेष बचाव संसाधनों का उपयोग किया गया। प्रशासन ने पूरे अभियान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखा।
मुख्यमंत्री धामी ने संभाली राहत अभियान की निगरानी

घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देर रात राज्य आपदा परिचालन केंद्र पहुंचे और वहां से पूरे अभियान की निगरानी की। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए रखा और पल-पल की जानकारी लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता टनल में फंसे प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत और बचाव कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।
रेस्क्यू किए गए श्रमिकों से की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग
मुख्यमंत्री धामी ने सुरक्षित निकाले गए श्रमिकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधे संवाद किया। उन्होंने उनका हालचाल जाना, उनका मनोबल बढ़ाया और आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उनके उपचार और पुनर्वास की पूरी व्यवस्था करेगी।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि घायलों के उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे और आवश्यकता पड़ने पर गंभीर घायलों को एम्स या अन्य उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया जाए।
खराब मौसम के बीच पीपलकोटी पहुंचे मुख्यमंत्री

शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रतिकूल मौसम के बावजूद पीपलकोटी पहुंचे। खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर की लैंडिंग भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई।
मुख्यमंत्री ने घटनास्थल का स्थलीय निरीक्षण किया, टनल के अंदर जाकर बचाव कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने शेष 3 लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी उपलब्ध तकनीकी विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी गौरव कुमार पूरी रात रहे मौके पर
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार पूरे घटनाक्रम के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे और राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी करते रहे। उन्होंने रेस्क्यू टीमों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा और शेष लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की।
प्रशासन ने घटनास्थल पर चिकित्सा व्यवस्था, मशीनरी, सुरक्षा प्रबंधन और परिजनों के लिए आवश्यक सहायता की व्यवस्था भी की।
घायलों का गोपेश्वर में उपचार जारी
रेस्क्यू किए गए घायल श्रमिकों को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर लाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार उनकी चिकित्सकीय निगरानी कर रही है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपचार, दवाइयों, आवास, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी हुई बातचीत

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से दूरभाष पर बातचीत कर उनके राज्यों के श्रमिकों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने दोनों राज्यों को आश्वस्त किया कि उत्तराखंड सरकार सभी प्रभावित श्रमिकों और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है।
राज्य सरकार ने कहा कि मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि है और प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण सवाल
यह हादसा निर्माणाधीन सुरंग परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार भूधंसाव और पानी के अचानक प्रवेश ने हादसे को गंभीर बनाया। ऐसे में टनल निर्माण के दौरान भूगर्भीय जोखिम, जल निकासी व्यवस्था, रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में चल रही बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं में भूगर्भीय अस्थिरता और जल प्रवाह से जुड़े जोखिमों का निरंतर वैज्ञानिक आकलन और निगरानी अत्यंत आवश्यक है।
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फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान शेष 3 लोगों की तलाश और सुरक्षित निकासी पर केंद्रित है। टनल के भीतर मलबा हटाने, पानी की निकासी और तकनीकी सर्वेक्षण का काम लगातार जारी है।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा मानकों की समीक्षा के साथ जिम्मेदारियों का निर्धारण भी किया जाएगा। उत्तराखंड THDC टनल हादसा न केवल एक बड़ी औद्योगिक दुर्घटना है, बल्कि हिमालयी क्षेत्र में अवसंरचना परियोजनाओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
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