हरिद्वार | 21 जुलाई 2026
हरिद्वार कांवड़ यात्रा 2026 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 30 जुलाई से शुरू होने वाली कांवड़ यात्रा से पहले प्रत्येक व्यवस्था समय पर पूरी कर ली जाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और सम्मान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि इस बार कांवड़ यात्रा का संचालन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि उत्तराखंड की सेवा भावना, व्यवस्थापन क्षमता और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन भी होगा। उन्होंने सभी विभागों से बेहतर समन्वय के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए कहा कि हर श्रद्धालु देवभूमि से सुरक्षित और सुखद अनुभव लेकर लौटे, यही सरकार का संकल्प है।
‘सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़’ होगा लक्ष्य

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इस वर्ष कांवड़ यात्रा को तीन प्रमुख उद्देश्यों के साथ संचालित किया जाएगा— सुरक्षित कांवड़, सुव्यवस्थित कांवड़ और स्वच्छ कांवड़।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यात्रा मार्ग, मेला क्षेत्र, घाटों और प्रमुख पड़ावों पर सभी मूलभूत सुविधाएं पहले से उपलब्ध होनी चाहिए। किसी भी श्रद्धालु को पेयजल, शौचालय, चिकित्सा, सुरक्षा या यातायात जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी विभागों को अभी से तैयारी पूरी करनी होगी।
रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। इस वर्ष अब तक चारधाम यात्रा में 45 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जबकि 55 हजार से अधिक श्रद्धालु आदि कैलाश यात्रा भी पूरी कर चुके हैं।
इसी क्रम में इस बार कांवड़ यात्रा में भी पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी व्यवस्थाएं संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए बनाई जाएं।
महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था
बैठक में मुख्यमंत्री ने महिला श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने निर्देश दिए कि—
- पर्याप्त संख्या में पिंक टॉयलेट स्थापित किए जाएं।
- प्रमुख स्थलों पर महिला हेल्प डेस्क सक्रिय रहें।
- महिला पुलिस कर्मियों की पर्याप्त तैनाती की जाए।
- महिला श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित विश्राम स्थल विकसित किए जाएं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुविधा किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
AI, ड्रोन और CCTV से होगी चौबीसों घंटे निगरानी
आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे कांवड़ मेला क्षेत्र में AI आधारित निगरानी प्रणाली, हाई रेजोल्यूशन CCTV कैमरे और ड्रोन सर्विलांस का व्यापक उपयोग किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी रखी जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने या भ्रामक सूचना प्रसारित करने वालों पर भी विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल रहेगा तैनात
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन स्थानों पर अधिक भीड़ रहती है, वहां अतिरिक्त पुलिस बल पहले से तैनात किया जाए।
विशेष रूप से—
- हर की पैड़ी
- कांगड़ा पुल
- प्रमुख घाट
- भीड़भाड़ वाले बाजार
- मुख्य कांवड़ मार्ग
पर सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने जल पुलिस, SDRF, NDRF तथा अग्निशमन सेवाओं को भी पूरी तरह अलर्ट रखने को कहा।
ट्रैफिक व्यवस्था पर रहेगा विशेष फोकस

हरिद्वार कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यातायात प्रबंधन को माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए आवश्यकतानुसार अलग-अलग यातायात व्यवस्था बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि—
- किसी भी स्थिति में वीआईपी मूवमेंट के कारण श्रद्धालुओं की यात्रा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
- ट्रैफिक प्लान का सख्ती से पालन कराया जाए।
- आपातकालीन सेवाओं के लिए अलग मार्ग सुनिश्चित किया जाए।
- पुलिस और परिवहन विभाग लगातार समन्वय बनाए रखें।
मेडिकल कैंप और वाटर एंबुलेंस रहेंगी तैनात
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि पूरे कांवड़ मार्ग और प्रमुख पड़ावों पर पर्याप्त संख्या में—
- मेडिकल कैंप
- एंबुलेंस
- चिकित्सक
- पैरामेडिकल स्टाफ
- दवाइयों की उपलब्धता
सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही हर की पैड़ी सहित प्रमुख घाटों पर वाटर एंबुलेंस भी तैनात करने के निर्देश दिए गए ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाई जा सके।
खाद्य सुरक्षा से लेकर स्वच्छता तक, हर व्यवस्था पर रहेगा प्रशासन का विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर संचालित सभी होटल, ढाबे, भोजनालय और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच की जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक प्रतिष्ठान पर लाइसेंस एवं पंजीकरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो। यदि कोई प्रतिष्ठान नियमों का उल्लंघन करता है या मिलावटी एवं खराब गुणवत्ता का भोजन परोसता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार का उद्देश्य केवल यात्रा का संचालन नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और विश्वास की रक्षा करना भी है।
स्वच्छता अभियान और नो-प्लास्टिक मिशन को मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के दौरान स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए नगर निगम, ग्राम पंचायतों और संबंधित विभागों को नियमित सफाई अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि—
- पूरे कांवड़ मार्ग पर नियमित सफाई हो।
- पर्याप्त संख्या में कूड़ेदान लगाए जाएं।
- प्लास्टिक के उपयोग पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए।
- श्रद्धालुओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाए।
- यात्रा समाप्त होते ही पूरे क्षेत्र की तत्काल सफाई कर पूर्व स्थिति बहाल की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वच्छ वातावरण श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ देवभूमि की छवि को भी मजबूत करेगा।
धर्माचार्यों और संत समाज का लिया जाएगा सहयोग

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल प्रशासनिक व्यवस्था से सफल नहीं हो सकती, बल्कि इसमें संत समाज, धर्माचार्यों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रमुख धर्माचार्यों एवं संतों के वीडियो संदेश तैयार कर श्रद्धालुओं तक पहुंचाए जाएं। इन संदेशों के माध्यम से श्रद्धालुओं को अनुशासन, स्वच्छता, यातायात नियमों और धार्मिक मर्यादाओं का पालन करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि सामाजिक सहभागिता से यात्रा और अधिक शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित होगी।
हर की पैड़ी और प्रमुख घाटों पर रहेगी विशेष सुरक्षा
हरिद्वार की पहचान हर की पैड़ी से जुड़ी है। इसी कारण मुख्यमंत्री ने हर की पैड़ी, कांगड़ा पुल तथा अन्य प्रमुख घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि—
- जल पुलिस की पर्याप्त तैनाती रहे।
- भीड़ नियंत्रण की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की जाए।
- आपातकालीन निकासी योजना पूरी तरह तैयार रहे।
- घाटों पर सुरक्षा कर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए।
- किसी भी दुर्घटना की स्थिति में त्वरित राहत उपलब्ध हो।
इसके साथ ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार जारी रखने और अत्यधिक ऊंची कांवड़ तथा निर्धारित मानकों से अधिक ध्वनि वाले डीजे वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश भी दिए गए।
24 घंटे सक्रिय रहेंगे कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान सभी कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन चौबीसों घंटे सक्रिय रहनी चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रतिदिन व्यवस्थाओं की समीक्षा करें तथा किसी भी शिकायत या समस्या का तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
इस व्यवस्था से श्रद्धालुओं को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में आसानी होगी और किसी भी आपात स्थिति का समय रहते समाधान किया जा सकेगा।
महाकुंभ-2027 की तैयारियों पर नहीं पड़ेगा असर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान महाकुंभ-2027 से जुड़े विकास कार्यों में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों कार्यों के बीच बेहतर समन्वय बनाते हुए विकास परियोजनाओं को निर्धारित समय पर आगे बढ़ाया जाए ताकि उत्तराखंड भविष्य के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
बैठक में कई जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
समीक्षा बैठक में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मदन कौशिक, प्रदीप बत्रा, राम सिंह कैड़ा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापार मंडलों और गंगा सभा के प्रतिनिधियों ने भी कांवड़ यात्रा को और बेहतर बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने तैयारियों की विस्तृत जानकारी मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत की। देहरादून, पौड़ी और टिहरी के जिलाधिकारियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने जिलों की तैयारियों का ब्यौरा भी साझा किया।
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क्या होगा इन तैयारियों का प्रभाव?
यदि सभी विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर तैयारियां पूरी कर लेते हैं, तो हरिद्वार कांवड़ यात्रा 2026 पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तकनीकी रूप से सशक्त आयोजन बन सकती है।
AI आधारित निगरानी, ड्रोन सर्विलांस, बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन, मेडिकल सुविधाओं का विस्तार, महिला सुरक्षा, स्वच्छता अभियान और आपदा प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं का अनुभव बेहतर बनाएगी, बल्कि आगामी महाकुंभ-2027 के लिए भी एक प्रभावी प्रशासनिक मॉडल प्रस्तुत करेगी।
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