राज्य आपदा मोचन निधि बैठक में प्रस्तावों को मिली मंजूरी, गुणवत्ता और निगरानी पर मुख्य सचिव का जोर

राज्य आपदा मोचन निधि बैठक को लेकर उत्तराखंड सचिवालय में गुरुवार को एक अहम निर्णय प्रक्रिया पूरी हुई। मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) एवं राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) के अंतर्गत प्राप्त विभिन्न प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि आपदा से जुड़े हर कार्य में गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्ध भौतिक प्रगति से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

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मुख्य सचिव ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल फंड स्वीकृति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक प्रगति और प्रभाव की नियमित समीक्षा भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि स्वीकृत योजनाओं के क्रियान्वयन की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए।

कार्यों की गुणवत्ता और भौतिक प्रगति पर सख्त निर्देश

 

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने आपदा प्रबंधन विभाग को स्पष्ट रूप से निर्देश दिए कि स्वीकृत प्रस्तावों के अंतर्गत जारी किए जाने वाले फंड और कार्यों की भौतिक प्रगति की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि विभागों से निर्धारित MCR फॉर्मेट में प्रगति रिपोर्ट प्राप्त की जाए, जिससे कार्यों की स्थिति का वास्तविक आकलन किया जा सके।

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि केवल कागजी रिपोर्ट नहीं, बल्कि फील्ड लेवल पर कार्यों की स्थिति का सत्यापन जरूरी है। इससे भविष्य में आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

सिंचाई विभाग के लिए इंजीनियर्स समिति को सक्रिय करने के निर्देश

बैठक में सिंचाई विभाग को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए। मुख्य सचिव ने विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में कार्यरत नियोजन की इंजीनियर्स समिति को सक्रिय किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रस्ताव भेजने से पहले समिति द्वारा उसके तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का गंभीर परीक्षण किया जाए।

इस निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य आपदा मोचन निधि बैठक में केवल व्यावहारिक, तकनीकी रूप से मजबूत और दीर्घकालिक प्रभाव वाले प्रस्ताव ही प्रस्तुत हों। इससे न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि आपदा प्रबंधन कार्यों की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी।

राज्य कार्यकारिणी समिति में PWD की स्थायी भागीदारी

मुख्य सचिव ने सचिव आपदा को निर्देश दिए कि राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठकों में ईएनसी, लोक निर्माण विभाग (PWD) को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। इससे सड़क, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे से जुड़े आपदा सुरक्षा कार्यों में बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।

PWD की स्थायी भागीदारी से आपदा न्यूनीकरण से जुड़े निर्माण कार्यों की योजना और क्रियान्वयन में तकनीकी दक्षता बढ़ेगी, जो राज्य के लिए दीर्घकालिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगी।

बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए नॉर्म्स तय करने पर जोर

बैठक में बाढ़ सुरक्षा कार्यों को लेकर भी अहम चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बाढ़ सुरक्षा से जुड़े कार्यों के लिए स्पष्ट नॉर्म्स और गाइडलाइंस तैयार की जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यस्थल की भौगोलिक स्थिति और प्रकृति अलग होती है, इसलिए सभी परियोजनाओं के लिए एक समान मॉडल लागू नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां संभव हो, वहां वेजिटेटिव प्रोटेक्शन वर्क यानी पौधरोपण और प्राकृतिक संरक्षण उपायों को प्राथमिकता दी जाए। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बना रहेगा, बल्कि बाढ़ और कटाव जैसी आपदाओं के प्रभाव को भी कम किया जा सकेगा।

देहरादून के कैनाल सिस्टम सुधारने के निर्देश

मुख्य सचिव ने विभागाध्यक्ष सिंचाई को देहरादून जनपद के अंतर्गत विभिन्न कैनाल सिस्टम को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने नहरों के सुधारीकरण और मजबूतीकरण से जुड़े प्रस्ताव तैयार करने को कहा, ताकि भविष्य में जलभराव और बाढ़ जैसी समस्याओं से प्रभावी रूप से निपटा जा सके।

यह निर्देश शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जल प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण राज्य आपदा मोचन निधि बैठक में प्रमुख सचिव श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. वी. षणमुगम, श्री विनोद कुमार सुमन, श्री आनंद स्वरूप, अपर सचिव श्रीमती रंजना राजगुरु सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित जनपदों के जिलाधिकारी भी बैठक में जुड़े।

यह बैठक स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन को केवल तात्कालिक राहत तक सीमित न रखते हुए, दीर्घकालिक न्यूनीकरण और संरचनात्मक मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रही है। गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और निरंतर निगरानी पर दिया गया जोर भविष्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।

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