कार्यक्रम की तैयारी पर सीधी समीक्षा
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यह पहल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने का ऑपरेशनल ड्राइव है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और संगठन—तीनों की सक्रिय भागीदारी को अनिवार्य बताया गया।
45 दिवसीय अभियान, हर न्याय पंचायत में शिविर
17 दिसंबर 2025 से प्रदेशभर में 45 दिनों तक “प्रशासन गांव की ओर अभियान” चरणबद्ध तरीके से संचालित होगा। हर न्याय पंचायत में बहुद्देशीय शिविर लगाए जाएंगे। बड़ी न्याय पंचायतों में आवश्यकता अनुसार एक से अधिक शिविर होंगे, ताकि कोई पात्र लाभार्थी छूटे नहीं।
मौके पर समाधान, फाइल नहीं भटकेगी
शिविरों में आवेदन स्वीकार करने के साथ-साथ जनसमस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए गए। संबंधित विभागों के अधिकारी मौके पर मौजूद रहेंगे, ताकि पात्रता, दस्तावेज और स्वीकृति की प्रक्रिया वहीं पूरी हो सके।
घर-घर पहुंचेंगी योजनाएं
शिविरों के बाद अधिकारियों को नजदीकी गांवों में भ्रमण कर पात्र लाभार्थियों की पहचान करने और आवेदन भरवाने के निर्देश दिए गए। जिन कारणों से लोग वंचित हैं, उन्हें मौके पर दूर किया जाएगा। शिविर से 3–4 दिन पहले व्यापक प्रचार-प्रसार अनिवार्य रहेगा।
मॉनिटरिंग टॉप-टू-बॉटम
हर सप्ताह किसी एक शिविर में जिलाधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित होगी। अन्य शिविरों में वरिष्ठ अधिकारी तैनात रहेंगे। मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीएम स्तर से निरंतर मॉनिटरिंग होगी। साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय और सामान्य प्रशासन विभाग को भेजी जाएगी।
जनप्रतिनिधियों की 100% भागीदारी
जनप्रतिनिधियों और संगठनात्मक नेतृत्व की शत-प्रतिशत उपस्थिति पर जोर दिया गया। योजनाओं के प्रचार-प्रसार और जनसमस्याओं के समाधान में समन्वित कार्यप्रणाली को अभियान की रीढ़ बताया गया।
लाभार्थी संतुष्टि पर फोकस
हर कार्यक्रम का विधिवत पंजीकरण होगा और लाभार्थी संतुष्टि को प्रमुख मानक माना जाएगा। लक्ष्य स्पष्ट है—केंद्र और राज्य की योजनाओं से शत-प्रतिशत पात्र लाभार्थियों को जोड़ना।


