कोविड महामारी के दौर में जब लाखों रेहड़ी-पटरी वालों की रोज़ी-रोटी पर संकट मंडरा रहा था, तब केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि योजना) की शुरुआत की थी। यह योजना छोटे व्यापारियों और स्ट्रीट वेंडर्स के लिए आर्थिक सहारा बनकर आई और उन्हें स्वरोजगार की नई दिशा दी।
अब सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाते हुए बड़ा निर्णय लिया है। पीएम स्वनिधि योजना का पुनर्गठन कर इसे मार्च 2030 तक बढ़ा दिया गया है।
क्या है पीएम स्वनिधि योजना?
इस योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को बिना गारंटी छोटे ऋण उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकें। शुरुआत में यह कोविड संकट से निपटने के लिए लाई गई थी, लेकिन इसके उत्साहजनक परिणामों ने इसे एक दीर्घकालिक स्वरोजगार मॉडल में बदल दिया।
अब तक का प्रभाव
- 1 करोड़ से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को लाभ मिला।
- छोटे व्यापारियों को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ने का अवसर।
- समाज के उस वर्ग को स्थिरता, जिसे अक्सर नज़रअंदाज़ किया जाता है।
2030 तक का रास्ता
योजना की अवधि बढ़ने से लाखों रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे दुकानदार अपने सपनों को नई उड़ान दे सकेंगे। केंद्र सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल छोटे व्यापार को गति देगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक मजबूती और रोज़गार सृजन को भी बढ़ावा देगा।