लेखक: सरोज शर्मा
संविधान विशेषज्ञ
जब सूरज की पहली किरण 26 जनवरी की सुबह भारत की धरती को छूती है,
तो वह सिर्फ रोशनी नहीं लाती—
👉 वह संविधान की शक्ति,
👉 स्वतंत्रता के संघर्ष,
👉 और लोकतंत्र की आत्मा को जगाती है।
इसी रोशनी में चमकते हैं
26 मोती-माणक,
जो भारत के गणतंत्र को सिर्फ एक तारीख नहीं,
बल्कि एक जीवंत चेतना बनाते हैं।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)📜 पहला मोती: संविधान का जन्म (26 जनवरी 1950)
26 जनवरी 1950—
वह ऐतिहासिक दिन, जब भारत ने स्वयं को
👉 राजतंत्र से गणतंत्र घोषित किया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर की अगुवाई में
389 सदस्यों वाली संविधान सभा ने
एक ऐसा दस्तावेज रचा—
जो न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता का आधार बना।
👉 यह मोती याद दिलाता है:
अब भारत अपने भाग्य का निर्माता खुद है।
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✊ दूसरा मोती: पूर्ण स्वराज का संकल्प (26 जनवरी 1930)
लाहौर अधिवेशन में लिया गया
पूर्ण स्वराज का संकल्प,
जिसने आज़ादी की लौ को जन-जन तक पहुंचाया।
👉 यही कारण है कि
26 जनवरी सिर्फ संविधान की तारीख नहीं,
बल्कि आजादी की जड़ों की भी पहचान है।
संकल्प से सिद्धि तक का सफर
🪖 तीसरा मोती: राजपथ की भव्य परेड
सेनाओं की पदचाप,
टैंकों की गर्जना,
विमानों की उड़ान—
राजपथ पर निकलती परेड
👉 भारत की एकता, शक्ति और विविधता का जीवंत प्रमाण है।
🇮🇳 चौथा और पाँचवां मोती: राष्ट्रपति का अभिभाषण और बीटिंग रिट्रीट
- राष्ट्रपति का संबोधन → भविष्य की दिशा
- बीटिंग रिट्रीट → सेनाओं के त्याग का सम्मान
सूर्यास्त के समय जब बैंड की धुन गूंजती है,
तो हर भारतीय की आंखें नम हो जाती हैं।
📖 छठा मोती: ‘हम भारत के लोग’
संविधान की प्रस्तावना—
👉 गणतंत्र की आत्मा।
यह मोती बताता है कि
शक्ति सत्ता में नहीं,
👉 जनता में निहित है।
🏛️ सातवां मोती: प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद
सादगी, मर्यादा और संविधानिक संतुलन—
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने दिखाया
कि सत्ता सेवा का दूसरा नाम है।
👩✈️🌱🚀 आठवें से दसवें मोती: नया भारत
- महिला सैनिकों की परेड
- पर्यावरण संरक्षण की झलक
- ड्रोन, मिसाइल, अंतरिक्ष शक्ति
👉 यह बताता है कि भारत
परंपरा और प्रगति—
दोनों को साथ लेकर चल रहा है।
🏅🎭🌾 ग्यारहवें से बीसवें मोती: समाज की असली ताकत
- बच्चे → भविष्य
- वीरता पुरस्कार → बलिदान
- संस्कृति → आत्मा
- किसान-उद्यमी → आत्मनिर्भरता
- शिक्षा-स्वास्थ्य → मजबूत राष्ट्र
- पर्यटन-खेल-कला → वैश्विक पहचान
हर मोती बताता है—
👉 भारत सिर्फ सरकार नहीं, समाज की सामूहिक शक्ति है।
💻👩⚖️🌍 इक्कीसवें से पच्चीसवें मोती: आधुनिक गणतंत्र
- डिजिटल इंडिया
- महिला सुरक्षा
- पर्यावरण संतुलन
- युवा स्टार्टअप
- धार्मिक सद्भाव
👉 यही वह भारत है,
जो संविधान को किताब नहीं,
जीवन-पद्धति मानता है।
🌟 छब्बीसवां मोती: विकसित भारत 2047
यह मोती भविष्य का है—
जहाँ भारत
👉 ज्ञान में अग्रणी,
👉 तकनीक में सशक्त,
👉 और मूल्यों में अडिग होगा।
26 मोती-माणक दरअसल
👉 26 मूल्य हैं,
👉 26 प्रेरणाएं हैं,
👉 और 140 करोड़ नागरिकों की साझा जिम्मेदारी हैं।
गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है—
भारत सिर्फ भूमि नहीं,
एक जीवंत आत्मा है।
26 जनवरी हमें झंडा फहराने के लिए नहीं,
👉 संविधान जीने के लिए प्रेरित करती है।
हर नागरिक एक मोती है—
और जब ये मोती साथ चमकते हैं,
तभी बनता है
👉 भारत का गणतंत्र।
🇮🇳 जय हिंद। जय भारत।

