2027 से Online Shopping में नहीं चलेंगी ये 8 चालें, Fake Discount पर भी सरकार का शिकंजा

नई दिल्ली: अगर आप Amazon, Flipkart या किसी दूसरे ई-कॉमर्स मंच से खरीदारी करते हैं तो 1 जनवरी 2027 आपके लिए अहम तारीख होने वाली है। केंद्र सरकार ने Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों में फर्जी या भ्रामक छूट, खोज परिणामों में हेरफेर, Sponsored Listings को छिपाने, Dark Patterns, विक्रेता की जानकारी, आयातित सामान और उपभोक्ता डेटा से लेकर शिकायत दर्ज कराने तक कई प्रावधानों को सख्त किया गया है।

यानी 2027 से ऑनलाइन खरीदारी के दौरान आपको केवल यह नहीं देखना होगा कि किसी सामान पर कितने प्रतिशत की छूट मिल रही है, बल्कि वास्तविक पुरानी कीमत, विक्रेता, वापसी नीति, वारंटी, प्रायोजित सूची और उत्पाद के मूल देश जैसी जानकारी भी अधिक स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई जानी होगी।

सबसे खास बदलाव यह है कि अगर किसी उत्पाद पर छूट दिखाई जा रही है तो उसकी ‘Prior Price’ यानी पूर्व कीमत भी बतानी होगी। सरकार के नए नियमों के अनुसार यह पूर्व कीमत उस उत्पाद की छूट घोषित होने से पहले के 30 दिनों में उपलब्ध सबसे कम कीमत होगी।

1 जनवरी 2027 से लागू होंगे नए ई-कॉमर्स नियम

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Department of Consumer Affairs ने 10 सितंबर 2026 को Consumer Protection (E-Commerce) Rules, 2020 में संशोधन की घोषणा की। Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। सरकार ने इसे डिजिटल बाजार में उपभोक्ता संरक्षण और पारदर्शिता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया है।

नए नियमों में खासतौर पर उपभोक्ता शिकायतों, Search Results, Sponsored Listings, Price Reductions, Dark Patterns और Seller Disclosures से जुड़े प्रावधानों को मजबूत किया गया है।

आइए समझते हैं कि ऑनलाइन खरीदारी की कौन-कौन सी 8 चालों पर नए नियमों का असर पड़ेगा।

1. Fake Discount पर लगेगी लगाम

ऑनलाइन शॉपिंग में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली चीज होती है—बड़ी छूट

किसी उत्पाद पर 60 प्रतिशत, 70 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा छूट देखकर उपभोक्ता को लगता है कि वह बड़ी बचत कर रहा है। लेकिन सवाल यह है कि जिस कीमत को पुरानी कीमत बताकर छूट दिखाई जा रही है, क्या वह वास्तव में वही कीमत थी जिस पर उत्पाद हाल में बिक रहा था?

नए नियम इसी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की कोशिश करते हैं।

अब जब किसी वस्तु या सेवा की कीमत कम करके दिखाई जाएगी तो Reduced Price के साथ Prior Price भी प्रदर्शित करनी होगी। Prior Price का अर्थ छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों में उस वस्तु या सेवा की पेशकश की गई सबसे कम कीमत होगा।

उदाहरण के लिए, अगर कोई उत्पाद 5,000 रुपये का बताया जा रहा है और उसे 3,000 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है, तो केवल 5,000 रुपये को पुरानी कीमत बताना पर्याप्त नहीं होगा। नियमों के अनुसार पिछले 30 दिनों की कीमतों को ध्यान में रखना होगा।

इसका सीधा असर उन Discount Claims पर पड़ेगा जिनमें पुरानी कीमत को बढ़ाकर दिखाने से छूट बहुत बड़ी नजर आती है।

2. Search Results में मनमानी नहीं चलेगी

आप किसी ऑनलाइन मंच पर कोई उत्पाद खोजते हैं और सामने कई विकल्प आते हैं। सामान्य तौर पर उपभोक्ता शुरुआती परिणामों को अधिक महत्व देता है।

नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स इकाई ऐसे तरीके से Search Results में हेरफेर नहीं कर सकेगी जिससे उपयोगकर्ता गुमराह हो या परिणाम उसकी Search Query की प्रासंगिकता के विपरीत प्रभावित हों।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर वेबसाइट पर Search Results का क्रम एक जैसा होना जरूरी होगा। लेकिन ऐसा तरीका अपनाना समस्या बन सकता है जिससे उपभोक्ता को प्रासंगिकता के नाम पर भ्रामक परिणाम दिखाए जाएं।

3. Sponsored Product को छिपाना मुश्किल होगा

कई बार ऑनलाइन मंच पर कुछ उत्पाद सबसे ऊपर दिखाई देते हैं। लेकिन उपभोक्ता के लिए यह समझना हमेशा आसान नहीं होता कि कोई उत्पाद सामान्य Search Result है या उसे पैसे देकर प्रमुखता दी गई है।

नए नियमों के तहत Sponsored Listings की पहचान स्पष्ट और प्रमुख रूप से करनी होगी।

यानी Paid Promotion और सामान्य Search Result के बीच अंतर उपभोक्ता को दिखाई देना चाहिए।

इससे खरीदारी का फैसला लेते समय उपभोक्ता को यह पता चल सकेगा कि सामने दिखाई दे रहा उत्पाद उसकी खोज के आधार पर आया है या वह भुगतान किए गए प्रचार का हिस्सा है।

4. Dark Patterns पर कंपनियों को हर साल देना होगा हिसाब

Dark Patterns डिजिटल मंचों पर इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे डिजाइन या तरीके हैं जो उपभोक्ता के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं और उसे ऐसी कार्रवाई की ओर ले जा सकते हैं जिसे वह पूरी जानकारी के साथ शायद न करता।

उदाहरण के तौर पर कृत्रिम जल्दबाजी पैदा करना, विकल्पों को अस्पष्ट रखना या किसी सदस्यता के लिए उपभोक्ता की सहमति को स्पष्ट तरीके से न लेना जैसी व्यवस्थाएं Dark Pattern के दायरे में आ सकती हैं।

नए नियमों में ई-कॉमर्स कंपनियों को Dark Patterns की रोकथाम और विनियमन संबंधी 2023 की दिशानिर्देशों का पालन, सालाना Self-Audit और प्रमुखता से Compliance Certificate प्रदर्शित करना होगा।

यह प्रावधान केवल कागजी अनुपालन तक सीमित नहीं है। जून 2026 में CCPA ने PhysicsWallah और McAfee पर Dark Pattern से जुड़े मामलों में क्रमशः 5 लाख और 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।

जुलाई 2026 में CCPA ने SpiceJet पर भी 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। मामले में स्वचालित Loyalty Programme नामांकन और पहले से चुने गए Promotional Messages जैसे व्यवहारों को Dark Pattern से जोड़ा गया था।

इससे स्पष्ट है कि Dark Patterns पहले से ही नियामकीय निगरानी में हैं और नए नियम इस व्यवस्था को ई-कॉमर्स क्षेत्र में और औपचारिक बनाते हैं।

5. Seller कौन है, Return और Warranty क्या है—जानकारी साफ होगी

ऑनलाइन खरीदारी में उत्पाद सामने होता है, लेकिन बेचने वाला कौन है और उसके साथ लेनदेन की वास्तविक शर्तें क्या हैं, यह कई बार कम स्पष्ट दिखाई देता है।

नए नियमों के तहत Marketplace E-Commerce Entities को उपभोक्ताओं को महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें Best Before/Use Before, Return और Refund की शर्तें, Warranty, Delivery और Payment से जुड़ी जानकारी शामिल है।

इसका उद्देश्य यह है कि उपभोक्ता खरीदारी करने से पहले उपलब्ध जानकारी के आधार पर निर्णय ले सके।

यानी अब केवल उत्पाद की तस्वीर और कीमत देखकर खरीदारी करने के बजाय उससे जुड़ी जरूरी शर्तों को समझना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

6. Imported सामान पर Country of Origin और Importer की जानकारी

अगर कोई उत्पाद आयातित है तो उसके बारे में भी जानकारी स्पष्ट करनी होगी।

नए नियमों के अनुसार Imported Goods के लिए Importer Details और Country of Origin का खुलासा करना होगा।

यह जानकारी खासकर उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है जो किसी उत्पाद को खरीदते समय उसके निर्माण या आयात के देश को भी ध्यान में रखते हैं।

इससे उत्पाद की पहचान और उसकी आपूर्ति श्रृंखला के बारे में उपभोक्ता को अधिक स्पष्ट जानकारी मिलेगी।

7. आपके Data के इस्तेमाल पर Express Consent जरूरी

ऑनलाइन खरीदारी के दौरान उपभोक्ता से जुड़ी बड़ी मात्रा में जानकारी डिजिटल मंचों तक पहुंचती है।

नए नियमों के तहत Marketplace E-Commerce Entities उपभोक्ता की जानकारी का निर्धारित उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल Express और Affirmative Consent के बिना नहीं कर सकेंगी।

इसका मतलब है कि संबंधित उपयोग के लिए उपभोक्ता की स्पष्ट सहमति का महत्व बढ़ेगा।

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि ई-कॉमर्स कंपनियां उपभोक्ता से संबंधित किसी भी जानकारी का किसी भी परिस्थिति में इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। नियम विशेष रूप से निर्धारित उद्देश्यों के लिए स्पष्ट सहमति की आवश्यकता तय करते हैं।

8. शिकायत दर्ज कराई तो उसकी Copy भी मिलेगी

मान लीजिए आपने ऑनलाइन सामान मंगाया और वह खराब निकला। आपने शिकायत दर्ज की। ऐसे में आपके पास यह रिकॉर्ड होना महत्वपूर्ण है कि शिकायत में वास्तव में क्या दर्ज किया गया था।

नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स इकाई के Grievance Officer द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध करानी होगी।

इसके साथ ही प्रत्येक ई-कॉमर्स इकाई को National Consumer Helpline यानी NCH की Convergence Process का भागीदार बनना होगा।

इससे शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया गया है।

2025 में 17.71 लाख शिकायतें, करीब 29% ई-कॉमर्स से

नए नियमों के पीछे उपभोक्ता शिकायतों का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है।

सरकार के अनुसार 2025 में National Consumer Helpline को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं। इनमें 5,11,196 शिकायतें ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं। यह कुल शिकायतों का लगभग 29 प्रतिशत है।

ई-कॉमर्स से जुड़ी शिकायतों का बड़ा हिस्सा Refund से संबंधित भी रहा है। सरकार के अनुसार 25 अप्रैल 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच NCH ने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 1,66,189 Refund शिकायतों के समाधान के जरिए 105 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वापस दिलाने में मदद की। इनमें ई-कॉमर्स क्षेत्र की 1,00,466 शिकायतों के माध्यम से 74 करोड़ रुपये से अधिक का Refund कराया गया।

यही वजह है कि नए नियमों में शिकायत, Refund, Seller Information और उपभोक्ता को उपलब्ध कराई जाने वाली जानकारी पर खास जोर दिया गया है।

छिपे हुए शुल्क पर भी नजर

नए नियमों में Marketplace E-Commerce Entities द्वारा ऐसे Bundled Fees लेने पर भी प्रावधान किया गया है जो ई-कॉमर्स मंच से संबंधित सेवाओं से जुड़े नहीं हैं। हालांकि निर्धारित शर्तों के तहत Loyalty या Membership Programme के लिए अपवाद रखा गया है।

इसका महत्व उस स्थिति में समझा जा सकता है जब किसी उत्पाद की शुरुआती कीमत आकर्षक दिखाई देती है, लेकिन खरीदारी की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर अतिरिक्त शुल्क जुड़ते जाते हैं।

नए नियम ऐसे शुल्कों की पारदर्शिता को लेकर ई-कॉमर्स कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाते हैं।

क्या 2027 से Online Shopping पूरी तरह बदल जाएगी?

ऐसा कहना सही नहीं होगा कि 1 जनवरी 2027 से ऑनलाइन खरीदारी का पूरा तरीका बदल जाएगा। नए संशोधन मुख्य रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए पारदर्शिता, उपभोक्ता जानकारी, शिकायत निवारण और अनुचित डिजिटल व्यवहार से जुड़े अनुपालन को मजबूत करते हैं।

सरकार ने भी इन संशोधनों को केवल उपभोक्ता संरक्षण के कदम के रूप में नहीं, बल्कि ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए एक पारदर्शी और संतुलित नियामकीय ढांचा बनाने के प्रयास के रूप में बताया है।

इसलिए कंपनियों को अपनी वेबसाइट और ऐप के मूल्य प्रदर्शन, Search Results, Sponsored Listings, Seller Information, Data Consent, शिकायत व्यवस्था और Dark Patterns से जुड़ी प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी।

उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ा बदलाव क्या होगा?

व्यावहारिक रूप से देखें तो 2027 से ऑनलाइन खरीदारी करते समय उपभोक्ता के पास पहले की तुलना में कुछ महत्वपूर्ण सूचनाएं अधिक स्पष्ट रूप में होनी चाहिए।

बड़ी छूट दिखाई दे तो Prior Price देखें।
उत्पाद ऊपर दिखे तो देखें कि वह Sponsored तो नहीं।
खरीदने से पहले Seller और Return Policy देखें।
Imported Product है तो Country of Origin और Importer Details देखें।
किसी वेबसाइट पर अनावश्यक दबाव या भ्रमित करने वाला विकल्प दिखे तो सावधान रहें।
और शिकायत की स्थिति में दर्ज शिकायत की प्रति अपने रिकॉर्ड में रखें।

यानी नए नियमों का मूल उद्देश्य केवल कंपनियों पर नई जिम्मेदारियां डालना नहीं, बल्कि उपभोक्ता को खरीदारी से पहले अधिक स्पष्ट और उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराना है।

कंपनियों के लिए बढ़ेगा Compliance का दायरा

नए नियमों का दूसरा पक्ष ई-कॉमर्स कंपनियां हैं। उन्हें अपने डिजिटल मंचों की प्रक्रियाओं की समीक्षा करनी होगी।

विशेष रूप से Search Results, Sponsored Listings, Price Reduction, Seller Information, Consumer Data, Grievance Redressal और Dark Patterns से जुड़े प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना होगा।

सरकार ने संशोधित नियमों को उपभोक्ता हितों की रक्षा के साथ-साथ ई-कॉमर्स क्षेत्र के लिए स्पष्ट जिम्मेदारियां तय करने वाला ढांचा बताया है।

इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां 1 जनवरी 2027 तक इन प्रावधानों को अपने प्लेटफॉर्म पर किस तरह लागू करती हैं और नियामक संस्थाएं इनके अनुपालन को किस तरह लागू कराती हैं।

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1 जनवरी 2027 याद रखें

ऑनलाइन खरीदारी करने वालों के लिए 1 जनवरी 2027 इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी तारीख से Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 लागू होंगे।

Fake Discount से लेकर Sponsored Listings, Search Results और Dark Patterns तक, नए नियम डिजिटल खरीदारी के उन हिस्सों को अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर देते हैं जहां उपभोक्ता को वास्तविक जानकारी और प्रचार के बीच अंतर समझने में परेशानी हो सकती है।

अब सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “कितनी छूट मिल रही है?” बल्कि यह भी होगा कि “छूट किस कीमत के मुकाबले है, सामान कौन बेच रहा है, परिणाम क्यों ऊपर दिख रहा है और खरीदारी की शर्तें क्या हैं?”

यही बदलाव 2027 से ऑनलाइन खरीदारी के अनुभव को प्रभावित कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: नए Online Shopping Rules कब लागू होंगे?
उत्तर: Consumer Protection (E-Commerce) (Amendment) Rules, 2026 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

प्रश्न: Prior Price क्या होगी?
उत्तर: कीमत में कटौती की घोषणा से पहले के 30 दिनों में जिस सबसे कम कीमत पर वस्तु या सेवा उपलब्ध कराई गई थी, वही Prior Price मानी जाएगी।

प्रश्न: क्या Sponsored Product की पहचान करनी होगी?
उत्तर: हां। Sponsored Listings की पहचान स्पष्ट और प्रमुख तरीके से करनी होगी।

प्रश्न: क्या शिकायत की Copy मिलेगी?
उत्तर: हां। ई-कॉमर्स इकाई के Grievance Officer द्वारा दर्ज शिकायत की प्रति शिकायतकर्ता को उपलब्ध करानी होगी।

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