सुनामी बनकर दौड़ा लोकतंत्र का फॉर्म! बिहार में 74.39% वोटरों ने भरी एन्‍युमरेशन फॉर्म – ECI को भी चौंकाया

बिहार में लोकतंत्र की लहर फिर से सिर चढ़कर बोल रही है! राज्य में करीब 7.90 करोड़ मतदाताओं में से अब तक 5.87 करोड़ से ज़्यादा लोगों ने अपने Enumeration Form (नामांकन फॉर्म) भरकर यह साबित कर दिया है कि मतदाता जागरूक हैं और आने वाले चुनावों के लिए तैयार भी।

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74.39% भागीदारी – यह आंकड़ा न सिर्फ चुनाव आयोग के लिए राहत की खबर है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए एक चुनौती भी बन गया है।


🔎 क्या है ये Enumeration Form?

चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे Special Intesive Revision (SIR) अभियान के तहत घर-घर जाकर बीएलओ (Booth Level Officer) मतदाताओं से ये फॉर्म भरवा रहे हैं। इसमें मतदाता की जानकारी अपडेट की जाती है – पता, आयु, लिंग, ट्रांसजेंडर की पहचान, मृत व्यक्तियों के नाम हटाना और नए नाम जोड़ना।


🧭 ऑपरेशन: फॉर्म स्टॉर्म!

इस फॉर्म अभियान को लेकर ECI ने जबरदस्त संगठनात्मक ढांचा खड़ा किया है।

  • 38 जिलों के DEO,
  • 243 विधानसभा क्षेत्रों के ERO,
  • और 963 AERO
    लगातार फील्ड में घूमकर निगरानी कर रहे हैं। BLOs की टीमें मोबाइल ऐप्स और डिजिटल टैब के जरिए डेटा को रियल टाइम में अपलोड कर रही हैं।

यह सब कुछ ऐसे समय में हो रहा है जब अंतिम तिथि आने में अभी कुछ दिन बाकी हैं – यानी यह आंकड़ा 80% के पार भी जा सकता है!


🔥 ग्राउंड रिपोर्ट्स: ग्रामीण महिलाएं, युवाओं और बुजुर्गों में गजब की भागीदारी!

गया, सीवान, मधुबनी, दरभंगा और पूर्णिया जैसे जिलों से मिली रिपोर्ट्स के अनुसार,

  • महिलाएं पहली बार बड़ी संख्या में आगे आ रही हैं,
  • कॉलेजों में BLOs के शिविर लग रहे हैं,
  • यहां तक कि 85+ उम्र के बुजुर्ग भी अपने कागज़ तैयार कर फॉर्म भर रहे हैं।

📲 डिजिटल क्रांति का असर

इस बार की SIR प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल रूप से सक्षम है।

  • Digitization और Form Uploading का काम तेज़ी से चल रहा है।
  • मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से डेटा प्रोसेसिंग हो रही है।
  • इससे डुप्लीकेट, फर्जी और मृत मतदाताओं की पहचान करना पहले से कहीं आसान हो गया है।

📉 क्या हटेंगे लाखों नाम?

बिहार में चुनाव आयोग के पिछले प्रयासों में 30 लाख से अधिक फर्जी और डुप्लीकेट नाम हटाए गए थे। अब जब 74% से अधिक लोगों ने अपने अपडेटेड फॉर्म भर दिए हैं, तो अनुमान है कि इस बार करीब 35 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं – जो या तो मृत हैं, दोहराए गए हैं या स्थानांतरित हो चुके हैं।


📍क्या बंगाल, यूपी, झारखंड तैयार हैं?

बिहार का यह रिकॉर्ड अब बाकी राज्यों पर दबाव बना रहा है। सूत्रों के मुताबिक, अगस्त से पश्चिम बंगाल, झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी ECI बड़ा अभियान चलाने वाला है।

बिहार के मतदाता ने एक बार फिर दिखा दिया है कि “चुनाव सिर्फ सरकार बनाने की प्रक्रिया नहीं है, यह लोकतंत्र की आत्मा है!”
अब बाकी राज्यों की बारी है – क्या वे बिहार के 74.39% को पछाड़ पाएंगे?

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