बीजिंग से गायब हुआ चीन का ‘सर्वशक्तिशाली’ चेहरा, सत्ता के गलियारों में हलचल तेज़!
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सर्वोच्च नेता और एक दशक से अधिक समय से चीन की सत्ता पर काबिज़ राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों नज़र नहीं आ रहे हैं। न टीवी चैनलों पर, न ब्रिक्स मंच पर, और न ही पार्टी की प्रमुख बैठकों में। सवाल ये है — आख़िर शी जिनपिंग कहां हैं?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और खुफिया सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि चीन में सत्ता परिवर्तन की पटकथा लिखी जा रही है। कई अहम संकेत इस ओर इशारा कर रहे हैं कि शी जिनपिंग का प्रभाव कम हो रहा है या उन्हें धीरे-धीरे किनारे लगाया जा रहा है।
🔥 शी जिनपिंग का अचानक ‘गायब’ होना – संयोग या साजिश?
- मई-जून में कई महत्वपूर्ण बैठकों से अनुपस्थित रहे
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से भी किनारा किया
- चीनी मिलिट्री इंटेलिजेंस के अनुसार, उनकी सिक्योरिटी में 50% तक कटौती
- कम्युनिस्ट पार्टी और सेना के कई पदों से उनके करीबी हटाए गए
- कुछ रिपोर्ट्स में दावा — आंतरिक विद्रोह की आहट!
यह वही शी जिनपिंग हैं, जिन्होंने चीन को “माओ युग” के बाद सबसे शक्तिशाली नेतृत्व दिया। फिर ऐसा क्या हुआ कि उनकी सत्ता डगमगाने लगी?
🛑 सेना में भूचाल: तख्तापलट की तैयारी?
शी जिनपिंग ने हाल के वर्षों में PLA (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) में बड़े पैमाने पर अनुशासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया।
पर अब जो घटनाएं हो रही हैं, वो ‘साफ़-सफाई’ कम और ‘सत्ता का संघर्ष’ ज़्यादा लग रही हैं।
- चीनी नौसेना के चीफ ऑफ स्टाफ को बर्खास्त किया गया
- देश के एक प्रमुख न्यूक्लियर साइंटिस्ट को गुप्त रूप से हिरासत में लिया गया
- सैकड़ों अफसरों की जांच चल रही है
- यह वही सेना है, जिसकी नकेल शी ने कसने की कोशिश की थी — अब शायद वही सेना पलटवार कर रही है?
🕵️♂️ राजनीति में षड्यंत्र: “पार्टी विदिन पार्टी”?
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ आंतरिक हलकों से लीक हुई जानकारियां बताती हैं कि पार्टी में अब दो स्पष्ट धड़े बन चुके हैं:
- शी समर्थक गुट – जो अभी भी उन्हें मसीहा मानता है
- विरोधी गुट – जो शी के केंद्रीकरण से नाराज़ है और ‘कलेक्टिव लीडरशिप’ की वापसी चाहता है
सूत्र बताते हैं कि कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पिछले महीनों में “इमरजेंसी पॉलिटब्यूरो मीटिंग्स” की मांग की, जो सिर्फ़ सत्ता परिवर्तन के हालात में होती हैं।
⚠️ दलाई लामा को लेकर विवादास्पद बयान — शक्ति प्रदर्शन या बौखलाहट?
चीनी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में दलाई लामा के अगले उत्तराधिकारी के चयन को लेकर बयान दिया कि —
“चीन की सदियों पुरानी परंपरा और नियमों के अनुसार ही अगला दलाई लामा चुना जाएगा।”
यह बयान न सिर्फ़ तिब्बतियों के धार्मिक अधिकारों पर हस्तक्षेप है, बल्कि एक सख्त संदेश भी — कि धार्मिक क्षेत्रों में भी सरकार की ही चलेगी।
पर राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बयान देश के भीतर अस्थिरता को ढकने का एक हथियार हो सकता है — जब भीतर की राजनीति चरमरा रही हो, तब बाहरी शोर मचाना पुरानी रणनीति है।
👀 तो क्या हो रहा है चीन में?
- शी जिनपिंग की सेहत, मानसिक स्थिति और राजनीतिक स्थिति — तीनों पर सवाल
- आंतरिक बगावत और कम्युनिस्ट पार्टी की नीतिगत असहमति
- सेना का अप्रत्याशित रूप से आक्रामक रवैया
- विदेशी मंचों से दूरी — अंतरराष्ट्रीय कूटनीति से कटाव
📉 दुनिया को क्यों चिंता होनी चाहिए?
चीन में सत्ता परिवर्तन या अस्थिरता का मतलब केवल बीजिंग का संकट नहीं होता।
यह पूरी दुनिया की आर्थिक व्यवस्था, भू-राजनीति और भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए सीधा प्रभाव डालता है।
विशेषज्ञों की मानें तो अगर शी जिनपिंग को सत्ता से हटाने की कोशिशें तेज हुईं, तो यह 1989 के तियानआनमेन स्क्वायर प्रोटेस्ट के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा।
🔍 अंतिम सवाल: क्या शी जिनपिंग लौटेंगे — और अगर हां, तो कितने मज़बूत होकर?
यह चीन की ‘दीवारों के पीछे की सच्चाई’ है — जहाँ सत्ता का खेल खामोशी से खेला जाता है, लेकिन उसका असर पूरी दुनिया महसूस करती है।
“कहीं ऐसा तो नहीं कि शी जिनपिंग की ‘अनुपस्थिति’ एक नई सत्ता संरचना की ‘उपस्थिति’ का संकेत है?”
🟥 जवाब अभी नहीं मिला है, लेकिन संकेत साफ़ हैं — चीन बदल रहा है।

