भारतीय संसद का सत्र सोमवार को उस वक्त बेहद गरमा गया जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर विपक्ष के सवालों पर बेबाक जवाब दिया। विपक्ष जहां ऑपरेशन की सफलता, नुकसान और आंकड़ों को लेकर सवाल उठा रहा था, वहीं राजनाथ सिंह ने अपने दमदार भाषण से स्पष्ट किया — “परीक्षा में ये नहीं देखा जाता कि पेंसिल टूटी या पेन गुम हुआ, परिणाम देखा जाता है।”
क्या बोले रक्षा मंत्री?
राजनाथ सिंह ने संसद में खड़े होकर एक के बाद एक कटाक्ष और तथ्य सामने रखे:
🔹 “विपक्ष पूछता है हमारे कितने विमान गिरे, पर कभी ये नहीं पूछा कि दुश्मन के कितने विमान गिरे।”
🔹 “1971 के युद्ध के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने इंदिरा गांधी से नहीं पूछा था कि कितने भारतीय विमान क्षतिग्रस्त हुए।”
🔹 “ऑपरेशन सिंदूर में हमारे किसी महत्वपूर्ण सैन्य संसाधन को नुकसान नहीं हुआ।”
🔹 “10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO को फोन कर सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की।”
ऑपरेशन सिंदूर — रणनीति और संदेश
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अभी तक काफी गोपनीयता बनी हुई है, लेकिन रक्षा मंत्री के बयान से ये साफ है कि यह एक सफल और रणनीतिक सैन्य कार्रवाई थी। इसमें न केवल भारत की सैन्य ताकत का प्रदर्शन हुआ, बल्कि यह भी साबित हुआ कि देश अब जवाब नहीं, सीधा एक्शन देता है।
राजनाथ सिंह के इस बयान से यह भी स्पष्ट हुआ कि यह ऑपरेशन न केवल सीमित समय में पूरा किया गया, बल्कि इसमें भारत की सैन्य संपत्ति की सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया। पाकिस्तान की ओर से बातचीत की पहल यह संकेत देती है कि भारत की कार्रवाई ने असर दिखाया।
विपक्ष पर तीखा हमला
रक्षा मंत्री का भाषण केवल ऑपरेशन की जानकारी तक सीमित नहीं था। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब देश की सेनाएं दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दे रही थीं, तब विपक्ष सवाल पूछकर उनका मनोबल गिराने की कोशिश कर रहा था।
उन्होंने संसद में विपक्ष को याद दिलाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सैन्य कार्रवाइयों को लेकर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सेना का अपमान, देश की भावना का अपमान है।

