मोदी सरकार का तोहफा: अब गुरुकुल के छात्र भी करेंगे IIT में रिसर्च – डिग्री की बाध्यता समाप्त

नई दिल्ली:

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भारतीय शिक्षा व्यवस्था में आज एक ऐसा इतिहास रचा गया है, जिसकी गूंज आने वाले वर्षों तक सुनाई देगी। मोदी सरकार ने पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शोध से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक तोहफा दिया है – अब गुरुकुल शिक्षा प्राप्त छात्र बिना किसी औपचारिक डिग्री के भी IITs और देश के शीर्ष शोध संस्थानों में रिसर्च कर सकेंगे।

इस क्रांतिकारी पहल का नाम है – “सेतुबंध विद्वान योजना”। यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि भारत की आत्मा को फिर से वैश्विक शिक्षा मंच पर खड़ा करने का प्रयास है।


📘 क्या है ‘सेतुबंध विद्वान योजना’?

यह योजना उन छात्रों के लिए तैयार की गई है, जिन्होंने परंपरागत गुरुकुल प्रणाली के तहत वेद, आयुर्वेद, ज्योतिष, दर्शन, गणित, नाट्यशास्त्र जैसे विषयों में गहन अध्ययन किया है। अब ऐसे छात्र बिना किसी विश्वविद्यालय की डिग्री के सीधे IITs और अन्य शोध संस्थानों में उच्च-स्तरीय शोध कर सकेंगे।


✨ योजना की मुख्य विशेषताएं:

🔹 औपचारिक डिग्री की अनिवार्यता समाप्त:
अब तक IIT जैसे संस्थानों में रिसर्च के लिए डिग्री ज़रूरी थी। लेकिन अब गुरुकुल में शिक्षित छात्र विद्वत्ता के आधार पर शोध के लिए पात्र होंगे।

🔹 योग्यता शर्तें:

  • अधिकतम आयु: 32 वर्ष
  • गुरुकुल या गुरु के अधीन कम से कम 5 वर्षों का पारंपरिक अध्ययन
  • संस्कृत, आयुर्वेद, दर्शन, गणित, ज्योतिष आदि क्षेत्रों में उत्कृष्टता का प्रमाण

🔹 आर्थिक सहायता (फेलोशिप और अनुदान):

  • श्रेणी 1 (PG स्तर): ₹40,000/माह + ₹1 लाख/वर्ष शोध अनुदान
  • श्रेणी 2 (PhD स्तर): ₹65,000/माह + ₹2 लाख/वर्ष शोध अनुदान

🔹 शोध के क्षेत्र:
गणित-ज्योतिष, भाषा विज्ञान, स्वास्थ्य-आयुर्वेद, दर्शन-मनोविज्ञान, शास्त्रीय कला समेत 18 अंतर-विषयक क्षेत्रों में रिसर्च के अवसर मिलेंगे।

🔹 अधिकारिक क्रियान्वयन संस्था:
Central Sanskrit University (CSU) और शिक्षा मंत्रालय का IKS प्रभाग योजना को लागू करेगा और छात्रों को मान्यता प्राप्त डिग्री भी प्रदान की जाएगी।


🇮🇳 क्यों है यह मोदी सरकार का ऐतिहासिक तोहफा?

प्राचीन ज्ञान को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा गया
डिग्री के बजाय ज्ञान और योग्यता को प्राथमिकता
NEP 2020 के विज़न को ज़मीनी स्तर पर उतारा गया
पारंपरिक शिक्षा के छात्रों को मिला राष्ट्रीय मंच
शिक्षा व्यवस्था को अधिक समावेशी और भारतीय बनाया गया


🌍 आगे क्या बदलेगा?

▪ अब गुरुकुल के छात्र IIT की लैब्स में दिखेंगे, आधुनिक उपकरणों के साथ वेदों की गहराई में उतरते हुए
▪ आयुर्वेद और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों पर आधुनिक शोध शुरू होंगे
▪ वैदिक गणित, खगोल विज्ञान, दर्शन जैसे विषयों में नई खोजें होंगी
▪ परंपरा और विज्ञान का ऐसा संगम होगा, जो भारत को फिर ज्ञान का ध्रुव बनाएगा


🛕 भारत की आत्मा को मिला मंच

यह तोहफा सिर्फ गुरुकुल छात्रों को नहीं, भारतीय सभ्यता और ज्ञान परंपरा को मिला सम्मान है। वर्षों से जो ज्ञान सिर्फ परंपरा में सीमित था, अब वह शोध का विषय बनेगा, अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में छपेगा, और विश्व को दिखाएगा कि भारत का ज्ञान सिर्फ इतिहास नहीं – भविष्य भी है।

मोदी सरकार की यह पहल ‘सेतुबंध’ की तरह पारंपरिक भारत और आधुनिक भारत के बीच एक जीवंत पुल है। यह शिक्षा में समानता, सम्मान और भारतीयता का नया अध्याय है – एक ऐसा अध्याय, जिसकी शुरुआत अब गुरुकुल से होती है और जिसकी गूंज IIT तक सुनाई देती है।

 

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