देवभूमि में गूंजा सरोद का जादू: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने किया 30वें ‘विरासत महोत्सव’ का शुभारंभ, बोले—संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा है

देहरादून, 04 अक्टूबर 2025।
देवभूमि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून शनिवार शाम संस्कृति, कला और संगीत के सुरों से सराबोर हो उठी। अवसर था 30वें विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के शुभारंभ का, जहां परंपरा और आधुनिकता का अनोखा संगम देखने को मिला। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेडियम, ओएनजीसी देहरादून में दीप प्रज्वलित कर इस भव्य आयोजन का उद्घाटन किया।

रीच संस्था द्वारा आयोजित यह 15 दिवसीय महोत्सव उत्तराखंड की पहचान बन चुका है। इस बार आयोजन की भव्यता और भी बढ़ी, क्योंकि मंच पर उपस्थित थे विश्वविख्यात सरोद वादक पद्मविभूषण उस्ताद अमजद अली खान। जैसे ही उनकी उंगलियाँ सरोद के तारों पर थिरकीं, पूरा वातावरण मधुर संगीत की लहरों में डूब गया। तबले की जुगलबंदी और सरोद की तानों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का उत्सव है। “संस्कृति ही राष्ट्र की आत्मा है,” उन्होंने कहा, “और विरासत महोत्सव उस आत्मा को जीवंत करने का प्रयास है, जो हमारी परंपराओं, लोककला और विविधता में बसी है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह आयोजन न केवल कलाकारों को मंच देता है, बल्कि युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम भी बनता है।

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राज्यपाल ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा करते हुए कहा कि देवभूमि के मेले, त्योहार, लोकगीत और लोकनृत्य हमारी पहचान हैं। यह धरती प्रकृति के साथ संतुलन की प्रतीक है—जहां संस्कृति और प्रकृति एक-दूसरे में रची-बसी हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी परंपराओं को केवल जानें नहीं, बल्कि उन्हें जीवन का हिस्सा बनाएं।

राज्यपाल ने कहा कि विरासत महोत्सव ने 30 वर्षों की अपनी यात्रा में भारत की सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर पहुँचाया है। इस बार इसमें श्रीलंका, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और बेलारूस जैसे देशों की लोकधुनें भी गूंजेंगी, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय सौहार्द और “विविधता में एकता” का संदेश देगा।

उन्होंने आयोजकों को इस शानदार पहल के लिए बधाई देते हुए कहा कि जब कला और संस्कृति का उत्सव जीवित रहता है, तभी राष्ट्र का आत्मविश्वास और पहचान सशक्त होती है।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, रीच संस्था के महासचिव आर. के. सिंह, वाइस प्रेसिडेंट सुनैना प्रकाश, हेमंत अरोड़ा सहित बड़ी संख्या में कला-प्रेमी उपस्थित रहे।

देहरादून की रात जब सरोद की गूंज और ताल की लय में डूबी, तब “विरासत” केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति का पुनर्जागरण प्रतीत हुआ।

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