दिल्ली की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज़ है। विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अब तक 70 में से 58 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। लेकिन जो 12 सीटें बची हैं, उनमें कुछ बड़े नामों के शामिल होने की अटकलें तेज़ हो गई हैं। इन नामों में सबसे प्रमुख नाम है पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)क्या स्मृति ईरानी दिल्ली की राजनीति का चेहरा बनेंगी?
स्मृति ईरानी का नाम देशभर में अपनी राजनीतिक सक्रियता और तेज-तर्रार छवि के लिए जाना जाता है। अमेठी में राहुल गांधी को हराकर उन्होंने एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। इसके बाद उन्होंने अपने मंत्रालयों में जो काम किए, उससे उनकी प्रशासनिक क्षमता भी साबित हुई। ऐसे में, अगर वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में उतरती हैं, तो यह भाजपा के लिए एक बड़ा दांव साबित हो सकता है।
भाजपा की रणनीति और स्मृति ईरानी की भूमिका
दिल्ली में भाजपा पिछले कई चुनावों से सत्ता हासिल करने में विफल रही है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेतृत्व में अरविंद केजरीवाल ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बनाई है। ऐसे में भाजपा को एक ऐसे नेता की जरूरत है, जो न केवल जनता से जुड़ सके, बल्कि केजरीवाल की लोकप्रियता को चुनौती भी दे सके। स्मृति ईरानी की भाषण कला, आक्रामक रणनीति और जमीनी पकड़ भाजपा के लिए यह उम्मीद जगा सकती है।
मीनाक्षी लेखी बनाम स्मृति ईरानी
सूत्रों की मानें, तो दिल्ली की राजनीति में मीनाक्षी लेखी का नाम भी चर्चा में है। लेखी, जो नई दिल्ली से सांसद हैं, दिल्ली की राजनीति का एक जाना-माना चेहरा हैं। अगर भाजपा मीनाक्षी लेखी को मैदान में उतारती है, तो यह एक स्थिर और जानी-पहचानी रणनीति होगी। वहीं, स्मृति ईरानी की एंट्री एक नए प्रयोग की तरह होगी, जो भाजपा की चुनावी रणनीति में बदलाव को दिखा सकती है।
स्मृति ईरानी के आने से बदलेंगे समीकरण?
अगर स्मृति ईरानी को टिकट दिया जाता है, तो यह भाजपा के लिए एक बड़ा संदेश होगा। यह कदम न केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं में जोश भर सकता है, बल्कि महिलाओं और युवाओं के बीच एक अलग संदेश भी पहुंचा सकता है। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी दिल्ली की स्थानीय राजनीति को समझना और खुद को उस माहौल में ढालना।
दिल्ली की राजनीति में स्मृति ईरानी की संभावित एंट्री भाजपा के लिए एक साहसिक कदम हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने उम्मीदवारों की सूची में किसे जगह देती है और इस रणनीति का असर चुनावी नतीजों पर कितना पड़ता है। स्मृति ईरानी, जो हर बार असंभव को संभव बनाती हैं, अगर दिल्ली के चुनावी मैदान में उतरती हैं, तो यह न केवल भाजपा के लिए बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।
अमितेंद्र शर्मा
