ट्रंप का बड़ा बयान: ‘भारत पर टैरिफ लगाना आसान नहीं था’, संबंधों में आई खटास

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि भारत पर 50% टैरिफ (आयात शुल्क) लगाना एक “आसान काम नहीं” था और इस कदम से नई दिल्ली के साथ अमेरिकी संबंधों में खटास आई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है।

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क्या है पूरा मामला?

ट्रंप ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में कहा, “देखिए, भारत रूस का सबसे बड़ा ग्राहक था। मैंने भारत पर 50% टैरिफ लगाया क्योंकि वे रूस से तेल खरीद रहे थे। यह करना आसान नहीं था। यह एक बहुत बड़ा कदम है और इससे भारत के साथ संबंधों में दरार पड़ी है।”

ट्रंप प्रशासन ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर लगातार आपत्ति जताई थी। भारत ने हमेशा यह तर्क दिया है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाज़ार की गतिशीलता पर आधारित है। भारत ने पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद रूस से रियायती दर पर तेल खरीदना जारी रखा।

इस बयान का क्या मतलब है?

ट्रंप का यह बयान कई मायनों में महत्वपूर्ण है:
* रुख में बदलाव: यह पहली बार है जब ट्रंप ने खुद यह माना है कि उनकी सख्त व्यापार नीति का भारत-अमेरिका संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पहले उन्होंने इस तरह के कदमों को केवल ‘व्यापार संतुलन’ ठीक करने के लिए ज़रूरी बताया था।
* कूटनीतिक दबाव: यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत ने जिस तरह से कूटनीतिक दबाव का सामना किया और अपनी राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी, उसने अमेरिका जैसे बड़े देश को भी अपने रुख पर सोचने के लिए मजबूर किया है।
* आगे का रास्ता: ट्रंप के इस बयान से यह उम्मीद जगी है कि भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक वार्ताएं फिर से शुरू हो सकती हैं। हालांकि, अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद बना हुआ है, लेकिन ट्रंप का यह बयान एक संभावित ‘सकारात्मक बदलाव’ का संकेत दे सकता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर टैरिफ का असर

50% टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात पर गहरा असर पड़ा है। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टैरिफ से भारतीय जीडीपी पर 0.5% से 0.6% तक का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है। विशेष रूप से कपड़ा, रत्न और आभूषण जैसे श्रम-गहन उद्योगों को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ा है, क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है।

लेकिन इस चुनौती के बीच, भारत सरकार ने नए व्यापार समझौते करके और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को बढ़ावा देकर घरेलू उद्योग को मज़बूती देने का प्रयास किया है, ताकि अमेरिका पर निर्भरता कम हो सके।

ट्रंप का यह बयान भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया मोड़ हो सकता है। जहां एक ओर उनकी आक्रामक नीतियों ने दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा किया, वहीं उनका यह स्वीकार करना भविष्य में बातचीत के लिए एक रास्ता खोल सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या यह सिर्फ एक बयान है या इसका असर वास्तविक नीतियों पर भी दिखेगा।

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