जादूंग (उत्तरकाशी)। भारत-चीन सीमा से सटा यह सीमांत गांव अब पुनर्जागरण की ओर अग्रसर है। कभी 1962 के युद्ध के दौरान खाली किया गया यह गांव अब जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के नेतृत्व में वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत नए जीवन और पहचान की ओर बढ़ रहा है।

रविवार को DM प्रशांत आर्य ने गांव का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माणाधीन कार्यों की प्रगति का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी कार्य समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण हों। निरीक्षण से पहले उन्होंने सीओ आईटीबीपी भानुप्रताप सिंह, सीडीओ एस.एल. सेमवाल, जिला पर्यटन अधिकारी के.के. जोशी, समन्वयक आपदा जय पंवार और अन्य अधिकारियों के साथ सीमांत सुरक्षा और विकास रणनीति पर चर्चा की।
DM प्रशांत आर्य ने बताया कि योजना के पहले चरण में छह होम स्टे तैयार किए जा रहे हैं और दूसरे चरण में आठ और होम स्टे बनाए जाएंगे। सभी 14 होम स्टे तैयार होने पर जादूंग सीमांत पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं को रोजगार और गांव की आर्थिक आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित होगी।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के नेतृत्व में यह परियोजना केवल भौतिक विकास का नहीं है, बल्कि जादूंग के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को पुनर्जीवित करने का प्रयास भी है। उन्होंने कहा, “निकट भविष्य में जादूंग सीमांत पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगा, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थानीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।”
जादूंग की यह यात्रा इतिहास और आधुनिकता का संगम है, और DM प्रशांत आर्य के समर्पित नेतृत्व में यह गांव सीमांत भारत की नई पहचान के रूप में उभर रहा है।