Guys, यह सिर्फ एक suicide case नहीं है।
यह मामला अब उत्तराखंड पुलिस के सिस्टम, भरोसे और जवाबदेही की असली परीक्षा बन चुका है।
सबसे पहले और सटीक खबरें पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें
👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)Social media पर गुस्सा, वायरल वीडियो और सीधे आरोपों के बाद
👉 उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है।
🔴 पूरा मामला क्या है? (Quick Recap)
जनपद ऊधमसिंहनगर के ग्राम पैगा, थाना आईटीआई निवासी सुखवन्त सिंह ने
10/11 जनवरी 2026 की रात काठगोदाम, हल्द्वानी में आत्महत्या कर ली थी।
इसके बाद scene पूरी तरह बदल गया जब:
- मृतक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ
- एक ई-मेल शिकायत सामने आई
- जिसमें स्थानीय लोगों और ऊधमसिंहनगर पुलिस के कुछ अधिकारियों/कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए
यहीं से मामला national attention की तरफ बढ़ा।
साइबर सुरक्षा में उत्तराखंड पुलिस देश में अग्रणी—₹47 करोड़ की राशि पीड़ितों को लौटाई, दोषसिद्धि दर राष्ट्रीय औसत से दोगुनी
🕵️♂️ High-Level SIT का गठन, IG STF को कमान
उत्तराखंड पुलिस ने साफ कर दिया है कि
अब जांच सिर्फ कागज़ी नहीं, ground-level और hard facts पर होगी।
👉 मामले की गहन विवेचना के लिए
नीलेश आनन्द भरणे (IG STF) की अध्यक्षता में
5 सदस्यीय Special Investigation Team (SIT) का गठन किया गया है।
SIT में शामिल:
- पुलिस अधीक्षक, चम्पावत
- क्षेत्राधिकारी, टनकपुर
- निरीक्षक व उपनिरीक्षक स्तर के अधिकारी
Signal बिल्कुल clear है —
उत्तराखंड पुलिस इस केस को हल्के में नहीं ले रही।
🚔 निष्पक्ष जांच के लिए बड़ा फैसला: 12 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर
Fair probe के लिए उत्तराखंड पुलिस ने tough call लिया है।
👉 इस केस से जुड़े:
- 03 उपनिरीक्षक
- 01 अपर उपनिरीक्षक
- 01 मुख्य आरक्षी
- 07 आरक्षी
कुल 12 पुलिसकर्मियों को
➡️ गढ़वाल रेंज के जनपद चमोली और रुद्रप्रयाग
➡️ तत्काल प्रभाव से स्थानांतरित कर दिया गया है।
मतलब साफ है —
👉 जांच पर कोई दबाव, कोई influence नहीं चलेगा।
📧 वायरल वीडियो और ई-मेल की Deep जांच
उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय ने SIT को साफ निर्देश दिए हैं कि:
- सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो क्लिप
- मृतक द्वारा भेजी गई ई-मेल शिकायत
इनमें लगाए गए सभी आरोपों का:
- detail में fact check
- legal scrutiny
- और दोष मिलने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई
की जाए।
यह जांच अब सिर्फ suicide नहीं,
👉 पूरे सिस्टम की credibility से जुड़ चुकी है।
⚠️ क्यों इतना sensitive है यह केस?
क्योंकि:
- आरोप सीधे उत्तराखंड पुलिस के कामकाज पर हैं
- Social media पर public trust shaken है
- Youth openly सवाल पूछ रहा है
- और प्रशासन की transparency stake पर है
लोग यही जानना चाहते हैं 👇
👉 “क्या इस बार सच बाहर आएगा?”
SIT का गठन और 12 पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर
यह दिखाता है कि उत्तराखंड पुलिस दबाव में नहीं, जिम्मेदारी में फैसला ले रही है।
लेकिन असली story अब जांच लिखेगी।
❓ क्या सुखवन्त सिंह को इंसाफ मिलेगा,
या यह मामला भी वक्त के साथ ठंडा पड़ जाएगा?
आप क्या सोचते हैं?
Comments में खुलकर लिखिए — यही debate असली है।
