उत्तराखंड के चमोली ज़िले में नंदानगर क्षेत्र फिर से आपदा की चपेट में है। बीती रात हुई अतिवृष्टि (अत्यधिक वर्षा) से कुंतरी और धुर्मा गाँव में भारी तबाही हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई मकान पानी और मलबे की चपेट में आ गए, जिससे जन-धन की बड़ी क्षति हुई है।

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि कुछ ग्रामीण अब भी लापता बताए जा रहे हैं। वहीं, पुलिस और प्रशासन की टीमें राहत व बचाव कार्य में लगातार जुटी हुई हैं। जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) स्वयं मौके के लिए रवाना हो चुके हैं ताकि हालात का जायज़ा लेकर तेजी से राहत कार्य संचालित किया जा सके।

नंदप्रयाग-नंदानगर मार्ग भी कई स्थानों पर मलबा आने के कारण अवरुद्ध हो गया है, जिससे प्रभावित गाँवों तक पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं। भारी बारिश के चलते स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है, जबकि प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कवायद शुरू

यह आपदा उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही प्राकृतिक चुनौतियों का एक और उदाहरण है, जहाँ हर साल बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएँ जनजीवन को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में अनियंत्रित निर्माण कार्य और बदलते मौसम पैटर्न भी इस तरह की आपदाओं को और घातक बना रहे हैं।