अमित त्रिवेदी और पांडवाज की गूंज, खैट पर्वत का रहस्य इस बार टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 में क्या है खास?

टिहरी (उत्तराखंड)।

सबसे पहले और सटीक खबरें पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें

👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)

टिहरी लेक फेस्टिवल 2026

क्या आपने कभी कल्पना की है कि एक शांत दिखने वाली झील के नीचे एक पूरा शहर, उसका इतिहास, राजमहलों की यादें और पीढ़ियों की कहानियाँ सोई हों? उत्तराखंड की टिहरी झील सिर्फ़ जलराशि नहीं, बल्कि स्मृतियों और विरासत का महासंग्रह है। इसी झील के तट पर एक बार फिर उत्सव की धड़कनें तेज़ होने जा रही हैं। 6 से 9 मार्च 2026 के बीच आयोजित होने वाला टिहरी लेक फेस्टिवल इस बार पहले से कहीं ज़्यादा भव्य, बहुआयामी और अनुभवात्मक होने जा रहा है।

यह आयोजन केवल एक सरकारी कैलेंडर इवेंट नहीं, बल्कि पर्यटन, आध्यात्म, संगीत, लोकसंस्कृति और एडवेंचर का ऐसा संगम है, जो उत्तराखंड को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शुभारंभ के साथ यह चार दिवसीय महोत्सव टिहरी की लहरों से लेकर खैट पर्वत की रहस्यमयी चोटियों तक रोमांच का नया अध्याय लिखेगा।


रहस्य और रोमांच का संगम: टिहरी की पुकार

टिहरी झील का अस्तित्व अपने आप में एक कहानी है। पुराने टिहरी शहर के विस्थापन की पीड़ा, विकास की नई राह और प्रकृति के साथ सामंजस्य—इन सबका प्रतीक है यह झील। अब यही झील के मंच से एक नए संदेश के साथ दुनिया को बुला रही है—आइए, उत्तराखंड को महसूस कीजिए।

टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 के दौरान जल क्रीड़ाओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और एडवेंचर एक्टिविटीज़ के ज़रिये यह दिखाया जाएगा कि किस तरह विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं। प्रशासन और पर्यटन विभाग की रणनीति साफ़ है—“Experience-based tourism” को बढ़ावा देना, ताकि पर्यटक सिर्फ़ देखें नहीं, बल्कि जुड़ें।


टिहरी लेक फेस्टिवल 2026

पौराणिक कथा और आध्यात्म: देवप्रयाग का दिव्य स्पर्श

टिहरी की पहचान केवल झील या पहाड़ नहीं, बल्कि उसकी आध्यात्मिक विरासत भी है। इसी कारण फेस्टिवल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा देवप्रयाग को समर्पित है—वह पावन स्थल जहाँ अलकनंदा और भागीरथी के मिलन से माँ गंगा का जन्म होता है।

रघुनाथ मंदिर: त्रेतायुग की साक्षी परंपरा

देवप्रयाग स्थित रघुनाथ मंदिर को त्रेतायुग से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने यहाँ तप किया था। फेस्टिवल के दौरान यहाँ दर्शन, गंगा आरती और योग सत्रों को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है, ताकि पर्यटक आध्यात्मिक शांति के साथ यात्रा का अनुभव ले सकें।

खैट पर्वत का रहस्य: ‘परियों का देश’

लोककथाओं में खैट पर्वत को ‘परियों का देश’ कहा जाता है। कहा जाता है कि यहाँ आज भी अदृश्य शक्तियों का वास है। चाहे कोई इन मान्यताओं को आस्था से देखे या रोमांच से—यह पर्वत हमेशा से जिज्ञासा का केंद्र रहा है।
फेस्टिवल के दौरान आयोजित होने वाला ‘थात–खैट पर्वत ट्रैक’ प्रतिभागियों को इसी रहस्य और रोमांच से रूबरू कराएगा। यह ट्रैक न केवल एडवेंचर प्रेमियों के लिए, बल्कि नेचर फोटोग्राफ़र्स और स्पिरिचुअल ट्रैवलर्स के लिए भी खास होगा।


मुख्य आकर्षण: संगीत, स्वाद और रोमांच का फुल पैक

इस बार जिला प्रशासन और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने इसे पूरी तरह ‘पावर पैक फेस्टिवल’ के रूप में तैयार किया है—जहाँ मनोरंजन भी है और अवसर भी।

1. सुरों की महफिल: जब झील गूंजेगी संगीत से

6 मार्च – पांडवाज (Pandavaas) बैंड
उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को आधुनिक मंच देने वाला पांडवाज बैंड अपनी प्रस्तुति से पहाड़ की आत्मा को जीवंत करेगा। ढोल-दमाऊ, लोकगीत और आधुनिक फ्यूज़न का यह संगम युवाओं के बीच खासा लोकप्रिय है।

7 मार्च – अमित त्रिवेदी लाइव
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार अमित त्रिवेदी की धुनों पर जब टिहरी झील का किनारा गूंजेगा, तो यह पल फेस्टिवल का हाईलाइट बन जाएगा। ‘देव डी’ से लेकर ‘उड़ता पंजाब’ तक—उनका संगीत भावनाओं की पूरी रेंज को छूता है।

नाट्य मंचन
इतिहास प्रेमियों के लिए वीर भड़ माधो सिंह भंडारी की वीरगाथा को नाटक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा, जो स्थानीय इतिहास और बलिदान की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाएगा।


2. एडवेंचर और प्रतियोगिताएं: हुनर दिखाइए, इनाम पाइए

यह टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 सिर्फ़ देखने का नहीं, भाग लेने का भी है। विभिन्न प्रतियोगिताओं के ज़रिये युवाओं और क्रिएटिव टैलेंट को मंच दिया जा रहा है:

  • मास्टर शेफ प्रतियोगिता
  • फोटोग्राफी प्रतियोगिता
  • सोशल मीडिया रील चैलेंज
  • मिस्टर एंड मिस टिहरी
  • रैप सिंगिंग कॉन्टेस्ट

इनाम राशि:

  • प्रथम पुरस्कार: ₹1,00,000
  • द्वितीय पुरस्कार: ₹50,000
  • तृतीय पुरस्कार: ₹25,000
  • सांत्वना पुरस्कार: ₹5,000 के 10 नकद इनाम

यह पहल स्थानीय टैलेंट को पहचान देने के साथ-साथ क्रिएटर इकॉनमी को भी प्रोत्साहित करती है।


दर्शन, योग और सांस्कृतिक संध्या (संभावित समय)

  • गंगा आरती (देवप्रयाग संगम): प्रतिदिन शाम 6:30 बजे
  • योगाभ्यास: सुबह 6:00 से 7:30 बजे (संगम तट)
  • सांस्कृतिक संध्या: शाम 5:00 बजे से रात 9:00 बजे तक (कोटी कॉलोनी)

पैली-पैली बार: विकास की धुन में उत्तराखंड

ट्रैवल गाइड: कैसे पहुंचें, कहाँ रुकें और क्या खाएं

कैसे पहुंचें

  • हवाई मार्ग: जॉलीग्रांट एयरपोर्ट, देहरादून (टिहरी से लगभग 85 किमी)
  • रेल मार्ग: ऋषिकेश या योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन (लगभग 75 किमी)
  • सड़क मार्ग: दिल्ली, देहरादून और हरिद्वार से सीधी बसें व टैक्सी उपलब्ध

कहाँ रुकें

कोटी कॉलोनी क्षेत्र में ईको-हट्स, फ्लोटिंग हट्स और स्थानीय होमस्टे उपलब्ध हैं, जो प्रकृति के करीब ठहरने का अनुभव देते हैं।

क्या खाएं

टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 परिसर में विशेष फूड कोर्ट लगाया जाएगा, जहाँ उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन—चैंसू, फाणू और सिंगोरी—का स्वाद पर्यटकों को पहाड़ से जोड़ देगा।


क्यों खास है टिहरी लेक फेस्टिवल 2026?

यह टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 महोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के सांस्कृतिक ब्रांड बिल्डिंग की रणनीति है। संगीत से लेकर आध्यात्म, एडवेंचर से लेकर लोकव्यंजन—यह आयोजन दिखाता है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ कैसे आगे बढ़ सकती हैं।

टिहरी लेक फेस्टिवल 2026 सिर्फ़ एक आयोजन नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ने का निमंत्रण है—जहाँ हर लहर, हर सुर और हर कदम एक नई कहानी कहता है।

 

#TehriLakeFestival #HimalayanO2 #UttarakhandTourism #Devprayag #KhaitParvat #AmitTrivediLive #Pandavaas #ExploreTehri #AdventureIndia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com