State Pragati Portal Uttarakhand: अब योजनाओं पर रियल-टाइम नजर

उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं की धीमी रफ्तार और मॉनिटरिंग की चुनौतियों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब राज्य सरकार ने इस समस्या का एक टेक्नोलॉजी-ड्रिवन समाधान सामने रखा है। State Pragati Portal Uttarakhand को लेकर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की सख्त समीक्षा बैठक ने साफ संकेत दे दिया है कि अब योजनाओं की प्रगति कागजों पर नहीं, बल्कि रियल-टाइम डेटा के आधार पर ट्रैक की जाएगी। यह कदम राज्य की प्रशासनिक कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव ला सकता है।

देहरादून सचिवालय में आयोजित इस समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि अब राज्य और केंद्रपोषित सभी महत्वपूर्ण योजनाओं की मॉनिटरिंग इसी पोर्टल के माध्यम से होगी। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपनी प्रमुख योजनाओं को जल्द से जल्द पोर्टल पर अपलोड करें, ताकि एक केंद्रीकृत सिस्टम के जरिए उनकी प्रगति का मूल्यांकन किया जा सके।

“डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस” की ओर बड़ा कदम

यह पहल पारंपरिक फाइल-आधारित सिस्टम से हटकर डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट को दर्शाती है। State Pragati Portal Uttarakhand को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि योजनाओं की विभागवार और योजनावार समीक्षा आसानी से की जा सके।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को अपने-अपने प्रोजेक्ट्स के स्पष्ट माइलस्टोन तय करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परियोजना की प्रगति को चरणबद्ध तरीके से ट्रैक किया जा सके और जहां काम धीमा हो, वहां तुरंत हस्तक्षेप किया जा सके। यह मॉडल “प्रोएक्टिव गवर्नेंस” का एक उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें समस्याओं को पहले ही पहचानकर समाधान किया जाता है।

State Pragati Portal Uttarakhand

धीमी योजनाओं पर सख्त नजर, समयबद्ध पूरा करने का लक्ष्य

इस पोर्टल का एक प्रमुख उद्देश्य उन योजनाओं की पहचान करना है, जो निर्धारित समयसीमा से पीछे चल रही हैं। अक्सर देखा गया है कि कई प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाते, जिससे लागत बढ़ती है और जनता को लाभ मिलने में देरी होती है।

अब State Pragati Portal Uttarakhand के जरिए ऐसे प्रोजेक्ट्स को चिन्हित कर उन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह सिस्टम विभागों की जवाबदेही (Accountability) भी बढ़ाएगा, क्योंकि हर स्तर पर प्रगति का डेटा रिकॉर्ड होगा और उसकी समीक्षा की जाएगी।

स्वरोजगार योजनाओं का भी होगा विश्लेषण

मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि पोर्टल में सभी विभागों द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही पिछले 3 से 5 वर्षों में इन योजनाओं से कितने लोगों को रोजगार मिला, इसका विस्तृत विश्लेषण करने को कहा गया है।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अक्सर योजनाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन नहीं हो पाता। अब State Pragati Portal Uttarakhand के जरिए यह स्पष्ट हो सकेगा कि कौन सी योजनाएं प्रभावी हैं और किनमें सुधार की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विभाग पर विशेष फोकस

बैठक के दौरान स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने विभिन्न जिलों में अस्पतालों, उप जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया।

उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि केवल भवन निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मैनपावर और मशीनरी अपग्रेडेशन को भी योजनाओं का हिस्सा बनाया जाए। इसके लिए “होलिस्टिक प्लान” तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार हो सके।

इसके अलावा, नए भवनों में बेसमेंट पार्किंग को अनिवार्य करने का निर्देश भी दिया गया, जिससे शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक और पार्किंग की समस्या को कम किया जा सके।

State Pragati Portal Uttarakhand

प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा संकेत

यह पूरी पहल यह दर्शाती है कि उत्तराखंड सरकार अब केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर भी उतना ही ध्यान दे रही है। State Pragati Portal Uttarakhand प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता (Efficiency) को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।

इस बैठक में प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव सचिन कुर्वे, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम और अपर सचिव झरना कमठान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जो इस पहल की प्राथमिकता को दर्शाता है।

निष्कर्ष: टेक्नोलॉजी से बदलेगा गवर्नेंस मॉडल

अगर इस पोर्टल को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो यह उत्तराखंड में गवर्नेंस का पूरा मॉडल बदल सकता है। योजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग, डेटा-आधारित निर्णय और बेहतर जवाबदेही—ये सभी कारक राज्य के विकास को नई गति दे सकते हैं।

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आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि State Pragati Portal Uttarakhand किस हद तक जमीनी स्तर पर बदलाव ला पाता है और क्या यह अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

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