देहरादून, 14 जनवरी 2026।
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👉 अभी ज्वाइन करें (Join Now)उत्तराखंड की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक अहम और निर्णायक खबर सामने आई है। उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी को आखिरकार नया और स्थायी कुलपति मिल गया है। राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय की कुलपति पद पर नियुक्ति को लेकर आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
यह नियुक्ति न केवल विश्वविद्यालय के प्रशासनिक स्थायित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि संस्कृत शिक्षा के भविष्य को नई दिशा देने वाला कदम भी मानी जा रही है।
कौन हैं प्रो. रमाकान्त पाण्डेय?
राज्यपाल सचिवालय द्वारा जारी आदेश संख्या 27702 के अनुसार, प्रो. रमाकान्त पाण्डेय को उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का नया कुलपति नियुक्त किया गया है।
वर्तमान में वे केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर में निदेशक (Director) के पद पर कार्यरत हैं। संस्कृत भाषा, शास्त्रीय अध्ययन और शैक्षणिक प्रशासन में उनका अनुभव व्यापक और बहुआयामी रहा है। यही कारण है कि उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना गया।
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नियुक्ति की शर्तें और कार्यकाल
राजभवन से जारी आदेश में नियुक्ति से जुड़ी सभी शर्तें स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं:
- कार्यकाल: प्रो. रमाकान्त पाण्डेय का कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से 03 वर्ष का होगा।
- कानूनी आधार: यह नियुक्ति उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा-12 (1) के अंतर्गत की गई है, जो उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी पर भी लागू होती है।
- विशेष शर्त: यदि भविष्य में कोई अग्रेत्तर आदेश जारी होता है, तो वह प्रभावी माना जाएगा।
यह स्पष्ट करता है कि नियुक्ति पूरी तरह नियमों और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप की गई है।
अस्थायी व्यवस्था का हुआ अंत
इस नियुक्ति के साथ ही विश्वविद्यालय में लंबे समय से चली आ रही अस्थायी या अंतरिम व्यवस्था समाप्त हो गई है।
दिनांक 23 अगस्त 2025 को जारी आदेश संख्या 24077 को अब निरस्त (Supersede) कर दिया गया है।
अब प्रो. रमाकान्त पाण्डेय पूर्णकालिक कुलपति के रूप में विश्वविद्यालय का नेतृत्व करेंगे, जिससे निर्णय प्रक्रिया और शैक्षणिक योजना में स्थायित्व आएगा।
उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी के लिए क्यों अहम है यह नियुक्ति?
शिक्षा जगत का मानना है कि प्रो. रमाकान्त पाण्डेय के नेतृत्व में उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी को अकादमिक गुणवत्ता, शोध, डिजिटल पहल और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।
संस्कृत भाषा के संरक्षण, प्रचार-प्रसार और आधुनिक शिक्षा प्रणाली से इसके समन्वय की दिशा में यह नियुक्ति एक मजबूत रणनीतिक कदम के रूप में देखी जा रही है।
कुल मिलाकर, यह नियुक्ति उत्तराखंड की संस्कृत शिक्षा व्यवस्था के लिए एक टर्निंग पॉइंट मानी जा रही है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रो. रमाकान्त पाण्डेय के नेतृत्व में उत्तराखंड संस्कृत यूनिवर्सिटी आने वाले वर्षों में किस नई ऊंचाई तक पहुंचती है।

