नई दिल्ली | 23 जनवरी
भारत आज पराक्रम दिवस मना रहा है—एक ऐसा दिवस जो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अदम्य साहस, निर्भीक नेतृत्व और राष्ट्र के लिए उनके असाधारण योगदान को समर्पित है। 23 जनवरी को बोस की जयंती के अवसर पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों और बलिदान से प्रेरित करना है।
23 से 25 जनवरी तक देशव्यापी आयोजन
पराक्रम दिवस के अवसर पर 23 से 25 जनवरी तक विविध कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक राष्ट्रीय प्रदर्शनी प्रमुख आकर्षण है—यही वह भूमि है जहाँ नेताजी ने कभी सत्ता संभाली थी और आज़ाद हिंद सरकार के स्वप्न को साकार किया था। इसके अलावा, नेताजी के जीवन से जुड़े 13 ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष आयोजन किए जा रहे हैं।
इन स्थलों में कटक—नेताजी का जन्मस्थान—भी शामिल है, जहाँ आयोजित कार्यक्रम में जगदीप धनखड़ की उपस्थिति प्रस्तावित है। इन आयोजनों के माध्यम से नेताजी के संघर्ष, विचार और योगदान को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
आज़ाद हिंद फौज और निर्भीक नेतृत्व की विरासत
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय राष्ट्रीय सेना का नेतृत्व करते हुए औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का मार्ग प्रशस्त किया। 1943 में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना उनके दूरदर्शी नेतृत्व का प्रमाण थी। उनका नारा—“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा”—आज भी राष्ट्रभक्ति का शिखर प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री का संदेश: साहस और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पराक्रम दिवस पर नेताजी को नमन करते हुए कहा:
“नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती, जिसे पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है, पर हम उनके अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के लिए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हैं। उन्होंने निर्भीक नेतृत्व और अटूट राष्ट्रभक्ति का आदर्श प्रस्तुत किया। उनके आदर्श आज भी पीढ़ियों को एक सशक्त भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं।”
सरकार और विभिन्न मंत्रालयों ने नेताजी के विचारों को आधुनिक आत्मनिर्भरता (आत्मनिर्भर भारत) से जोड़ते हुए उनके संदेशों की प्रासंगिकता पर बल दिया।
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जनमानस की सहभागिता और प्रेरणा
देशभर में नागरिक, विद्यार्थी और प्रशंसक नेताजी की जोशीली देशभक्ति, अनुशासन और त्याग को स्मरण कर रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक, उनके विचारों पर चर्चा और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है—जो यह दर्शाता है कि नेताजी की विरासत आज भी जीवंत है।
पराक्रम से प्रेरित भविष्य
पराक्रम दिवस केवल स्मरण का अवसर नहीं, बल्कि संकल्प का दिवस है—साहस, आत्मसम्मान और राष्ट्रनिर्माण के लिए। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्श आज के भारत को दृढ़, आत्मनिर्भर और एकजुट बनने की प्रेरणा देते हैं। यही पराक्रम, यही प्रेरणा—भारत के भविष्य की दिशा तय करती है।