बाहर से शांत, भीतर से सिस्टम बदलने वाला दिमाग
चेन्नई।
आईआईटी मद्रास (IIT Madras) के डायरेक्टर वी. कामकोटि को देखकर पहली नज़र में कोई यह नहीं कह सकता कि यह शख्स भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को जड़ से हिलाने की तैयारी में है। न कोई शोर, न कोई दिखावा—लेकिन काम ऐसा, जो आने वाले वर्षों में डिग्री और रोज़गार की परिभाषा बदल सकता है।
वी. कामकोटि को कंप्यूटर साइंस, सिस्टम इंजीनियरिंग और इंटरडिसीप्लिनरी रिसर्च में उनके प्रभावशाली योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने “IIT मद्रास फॉर ऑल” के विज़न के तहत JEE के बिना ऑनलाइन डिग्री कोर्स शुरू कर शिक्षा को आम लोगों तक पहुँचाने का काम किया। उनका फोकस सिर्फ़ डिग्री देने पर नहीं, बल्कि जॉब क्रिएटर्स तैयार करने पर है, जिसके लिए उन्होंने A Patent a Day जैसी पहल और DeepTech स्टार्टअप्स को बढ़ावा दिया। राष्ट्र हमेशा पहले के सिद्धांत पर चलते हुए, स्वदेशी तकनीक और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले उनके प्रयासों को ही पद्मश्री 2026 से सम्मानित किया गया है।
पद्मश्री 2026 से सम्मानित वी कामकोटि के लिए सफलता का मतलब सिर्फ़ रैंकिंग, प्लेसमेंट या इंटरनेशनल अवॉर्ड नहीं है। उनका साफ़ मानना है—
“शिक्षा का असली मूल्य तब है, जब वह समाज और देश के लिए असर पैदा करे।”
🇮🇳 राष्ट्र पहले: वी कामकोटि का सीधा सवाल
वी कामकोटि अक्सर एक सवाल उठाते हैं—
अगर IIT जैसे संस्थान जॉब क्रिएटर्स नहीं बनाएंगे, तो फिर कौन बनाएगा?
इसी सोच के साथ उन्होंने IIT मद्रास में एक Rapid Innovation Action Plan लागू किया, जिसका लक्ष्य सिर्फ़ पढ़ाना नहीं, बल्कि रोज़गार पैदा करने वाली सोच तैयार करना है।
यह कोई भाषण नहीं, बल्कि डेटा से साबित होती रणनीति है।
📊 आंकड़े जो वी कामकोटि के विज़न को साबित करते हैं
🔹 “हर दिन एक पेटेंट” की सोच
वी कामकोटि ने IIT मद्रास में “A Patent a Day” पहल शुरू की।
- वित्त वर्ष 2025 में 417 पेटेंट फाइल
- यह आंकड़ा भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए असाधारण है
यह दिखाता है कि रिसर्च अब सिर्फ़ जर्नल तक सीमित नहीं, मार्केट-रेडी इनोवेशन बन रही है।

🚀 स्टार्टअप फैक्ट्री में बदलता IIT मद्रास
वी कामकोटि के नेतृत्व में IIT मद्रास का इनक्यूबेशन इकोसिस्टम देश के सबसे सक्रिय सिस्टम्स में शामिल हो चुका है।
- एक साल में 104 नए स्टार्टअप्स
- DeepTech, AI, हेल्थटेक और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी पर फोकस
उनका अगला लक्ष्य और भी बड़ा है—
👉 2027 तक हर साल 100 DeepTech स्टार्टअप्स
👉 कम से कम 5 Global Blockbuster कंपनियाँ
👉 इसके लिए तैयार हो रहा है ₹100 करोड़ का विशेष फंड
🎓 “IIT सबके लिए” — वी कामकोटि का सबसे बड़ा प्रयोग
वी कामकोटि का सबसे क्रांतिकारी कदम है—Education का Democratisation।
उनका नारा है—
👉 “IIT Madras For All”
अब IIT की पहचान सिर्फ़ JEE टॉपर्स तक सीमित नहीं।
📚 ऑनलाइन BS डिग्री प्रोग्राम
IIT मद्रास ने डेटा साइंस और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम्स में ऑनलाइन BS कोर्स शुरू किए हैं।
खास बातें:
- ✔ JEE अनिवार्य नहीं
- ✔ कोई उम्र सीमा नहीं
- ✔ वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए फ्लेक्सिबल
- ✔ बीच में Exit Option (सर्टिफिकेट / डिप्लोमा)
यानी IIT की डिग्री अब एलिट टैग नहीं, बल्कि नेशनल रिसोर्स बन रही है।
🤖 AI और भविष्य: Job Seeker से Job Creator
वी कामकोटि का मानना है कि भारत AI और DeepTech में अब फॉलोअर नहीं रहेगा।
उनके शब्दों में—
“भारत को अब नौकरी ढूंढने वालों का देश नहीं, नौकरी देने वालों का देश बनना होगा।”
IIT मद्रास का मौजूदा मॉडल दिखाता है कि डिग्री तभी सार्थक है, जब वह इनोवेशन + रोजगार से जुड़ी हो।
🏅 पद्मश्री 2026: सम्मान नहीं, जिम्मेदारी
2022 में डायरेक्टर बने वी. कामकोटि खुद IIT मद्रास के पूर्व छात्र हैं। कंप्यूटर साइंस और सिस्टम इंजीनियरिंग में उनका योगदान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाना जाता है।
पद्मश्री 2026 उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उस सोच की मान्यता है जिसमें—
शिक्षा = राष्ट्र निर्माण का औज़ार
यह कहानी सिर्फ़ वी कामकोटि की नहीं है।
यह उस भारत की झलक है जहाँ—
- डिग्री से ज़्यादा दिशा मायने रखती है
- क्लासरूम से ज़्यादा कंपनियाँ निकलती हैं
- और IIT एक संस्थान नहीं, Nation Builder बनता है