ईरान संकट के बीच भारतीयों को बड़ी राहत: लैंड बॉर्डर से निकलने की मिली अनुमति

पश्चिम एशिया में तेजी से बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरानी सरकार ने भारतीय नागरिकों को लैंड बॉर्डर के जरिए देश छोड़ने की अनुमति दे दी है। अधिकारियों के मुताबिक, भारतीयों को अब किसी विशेष निकास अनुमति (Exit Permit) की आवश्यकता नहीं होगी और वे केवल वैध पासपोर्ट के साथ पड़ोसी देशों में प्रवेश कर सकते हैं

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यह फैसला ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद हो गए हैं और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें व्यापक रूप से बाधित हो चुकी हैं, जिससे हजारों विदेशी नागरिक फंसे हुए हैं।


क्यों बढ़ा संकट: पश्चिम एशिया में युद्ध जैसी स्थिति

फरवरी 2026 के अंत से पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़े हैं। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले के बाद क्षेत्र में सैन्य टकराव बढ़ गया। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संकट गहरा गया।

इस टकराव का सबसे बड़ा असर नागरिक उड़ानों पर पड़ा। कई देशों ने सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र बंद कर दिए, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द हो गईं और हजारों विदेशी नागरिक फंस गए।

इसी वजह से कई देशों ने अपने नागरिकों को हवाई मार्ग के बजाय भूमि मार्ग से सुरक्षित निकलने की सलाह देना शुरू किया।


ईरान संकट में भारत की कूटनीतिक जीत

भारतीय नागरिकों को कैसे मिलेगी राहत

ईरान में भारतीय नागरिकों, खासकर छात्रों और कामगारों की बड़ी संख्या मौजूद है। अनुमान के मुताबिक वहां हजारों भारतीय छात्र मेडिकल और तकनीकी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि कई लोग व्यापार और रोजगार के लिए भी रहते हैं।

ईरानी अधिकारियों के अनुसार अब भारतीय नागरिक:

  • किसी भी लैंड बॉर्डर चेकपोस्ट से निकल सकते हैं
  • केवल वैध पासपोर्ट दिखाना होगा
  • कोई अतिरिक्त एग्जिट परमिशन नहीं चाहिए
  • पड़ोसी देशों के रास्ते सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की जा रही है

बताया जा रहा है कि कई छात्रों को आर्मेनिया, अज़रबैजान, तुर्कमेनिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं के जरिए बाहर भेजने की योजना बनाई जा रही है।

भारतीय दूतावास ने जारी की एडवाइजरी

तेहरान स्थित भारतीय दूतावास पहले ही भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दे चुका है। दूतावास ने स्थिति को देखते हुए छात्रों और अन्य नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित भी किया है।

इसके साथ ही भारत सरकार ने संकट को देखते हुए विशेष हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, ताकि प्रभावित भारतीयों को तुरंत सहायता मिल सके।

सरकार ने यह भी कहा है कि जो भारतीय ईरान में हैं वे स्थानीय भारतीय मिशन के संपर्क में रहें और आधिकारिक सलाह का पालन करें।


छात्रों की सबसे ज्यादा चिंता

ईरान में फंसे भारतीयों में सबसे बड़ी संख्या मेडिकल छात्रों की है। कई छात्र जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से हैं।

कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया पर बताया कि क्षेत्र में धमाकों की आवाजें और इंटरनेट व्यवधान जैसी स्थितियां देखी जा रही हैं, जिससे परिवारों में चिंता बढ़ गई है।

हालांकि राहत की बात यह है कि कई विश्वविद्यालयों ने संकेत दिया है कि यदि छात्र अस्थायी रूप से देश छोड़ते हैं तो उनकी परीक्षाएं बाद में आयोजित की जाएंगी, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो।


भारत सरकार की संभावित रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है तो भारत सरकार बड़े पैमाने पर निकासी अभियान भी शुरू कर सकती है।

इससे पहले 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंधु चलाकर हजारों भारतीयों को युद्धग्रस्त क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकाला था।

वर्तमान संकट को देखते हुए भी सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर विशेष विमान या सुरक्षित कॉरिडोर की व्यवस्था की जा सकती है।


वैश्विक स्तर पर भी शुरू हुई निकासी

केवल भारत ही नहीं, बल्कि यूरोप और एशिया के कई देश भी अपने नागरिकों को निकालने की तैयारी कर रहे हैं।

कई सरकारें चार्टर फ्लाइट्स, कूटनीतिक सहायता और लैंड बॉर्डर रूट्स के जरिए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

यह स्थिति दर्शाती है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक यात्रा और सुरक्षा पर पड़ने लगा है


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आगे क्या हो सकता है

विशेषज्ञों के अनुसार यदि क्षेत्रीय तनाव कम नहीं हुआ तो:

  • एयरस्पेस लंबे समय तक बंद रह सकता है
  • विदेशी नागरिकों की बड़े पैमाने पर निकासी होगी
  • क्षेत्रीय व्यापार और यात्रा पर असर पड़ेगा

इसलिए भारत सहित कई देशों की सरकारें अपने नागरिकों को सतर्क रहने और जल्द सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दे रही हैं।

ईरान में बढ़ते सैन्य तनाव और उड़ानों के ठप होने के बीच भारतीय नागरिकों को लैंड बॉर्डर से निकलने की अनुमति मिलना बड़ी राहत की खबर है। अब भारतीय नागरिक वैध पासपोर्ट के साथ पड़ोसी देशों के रास्ते सुरक्षित रूप से देश छोड़ सकते हैं।

हालांकि स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और भारतीय दूतावास लगातार नागरिकों को सतर्क रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दे रहा है।

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